कोरोना वायरस संक्रमण के दो वर्ष ने खिलाडि़यों को पीछे ढकेला, उम्र तो बढ़ी पर अवसर हाथ से निकले

कोरोना संक्रमण से 23 मार्च 2020 के बाद लाकडाउन लगा। स्टेडियम या अन्य मैदानों पर चल रहे प्रशिक्षण शिविर बंद हो गए। कई खिलाड़ी जो जूनियर लेवल पर अच्छा खेल रहे थे। दो वर्ष बाद खेल की गतिविधियां अब फिर शुरू हईं हैं लेकिन अब वे ऊपरी स्तर पर खेलेंगे।

Brijesh SrivastavaPublish: Tue, 17 May 2022 12:00 PM (IST)Updated: Tue, 17 May 2022 12:00 PM (IST)
कोरोना वायरस संक्रमण के दो वर्ष ने खिलाडि़यों को पीछे ढकेला, उम्र तो बढ़ी पर अवसर हाथ से निकले

प्रयागराज, जागरण संवाददाता। कोरोना वायरस ने सभी क्षेत्रों में अपना असर दिखाया है। इससे खेल और खिलाड़ी भी अछूते नहीं रहे। कोरोना ने इनका भी नुकसान किया है। संक्रमण से पहले जो खिलाड़ी अपने आयु वर्ग में अच्छा खेल रहे थे, अचानक दो वर्ष के अंतराल ने उनके प्रयासों पर पानी फेर दिया। दो वर्ष तक जिला स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर कोई प्रतियोगिता नहीं हुई। इस दौरान इन खिलाड़ियों की उम्र ने छलांग लगाई लेकिन उन्हें प्रतियोगिता खेलने का अवसर नहीं मिला।

लाकडाउन में खेल मैदानों में प्रशिक्षण शिविर बंद हो गए : कोरोना संक्रमण के कारण 23 मार्च 2020 के बाद लाकडाउन लग गया। स्टेडियम या अन्य मैदानों पर चल रहे प्रशिक्षण शिविर बंद हो गए। कई ऐसे खिलाड़ी रहे जो जूनियर लेवल पर अच्छा खेल रहे थे। दो वर्ष बाद खेल की गतिविधियां अब फिर शुरू हईं हैं लेकिन अब वे ऊपरी स्तर पर खेलेंगे। कुछ खेलों में अनुभवी होने पर बेल्ट भी दी गई, लेकिन उनकी बेल्ट जूनियर वाली ही रही। एथलेटिक्स, क्रिकेट आदि खेलों में दो साल पहले जूनियर लेवल खेल रहे खिलाड़ी सीनियर टीम के लायक हो गए।

प्रशिक्षुओं ने बातचीत में अपनी टीस को उजागर किया। उनका कहना है कि इन दो सों में पढ़ाई करने वाले सभी छात्र पास हो गए लेकिन उनकी स्थिति जहां थी वहीं रह गई।

ताइक्‍वांडो के खिलाडि़यों की टीस : ताइक्वांडो की खिलाड़ी श्रेया पाल बताती हैं कि 2020 में कैडेट वर्ग में प्रतिभाग कर रही थीं। उन्हें उम्मीद थी कि कोई न कोई मेडल निकाल लेंगी लेकिन इसके बाद कोई प्रतियोगिता नहीं हुई। इस वर्ष वे जूनियर वर्ग में प्रतिभाग करेंगी। इसी स्पर्धा के कार्तिकेय का कहना है कि दो वर्षों से बेल्ट टेस्ट तक नहीं हुआ। रेड बेल्ट 2020 में था और इस बार भी वे इसी बेल्ट के साथ प्रतियोगिता में प्रतिभाग करेंगे। विशाल कश्यप कहते हैं कि दो साल पहले सब जूनियर से कैडेट वर्ग में आए थे। अब वे जूनियर वर्ग में पहुंच गए है।

एथलेटिक्‍स की प्रतिभाएं क्‍या कहती हैं : 800 मीटर दौड़ स्पर्धा में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने वाले इरफान बताते हैं कि बीते दो वर्ष ने उनके करियर पर बड़ा असर डाला है। 2020 में भोपाल में हुई अंडर-20 में प्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने चांदी जीती थी। इस बार मैंगलुरू में हुई अखिल भारतीय अंतर विश्वविद्यालयीय प्रतियोगिता में कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा। इसी स्पर्धा की सपना राय ने दो वर्ष पहले फेडरेशन कप में अंडर-18 आयु वर्ग में मेडल हासिल किया था। अभ्यास के अभाव में इस बार आपेक्षित सफलता नहीं मिली।

हाफ मैराथन व पोल वाल्‍ट के खिलाड़ी बोले : हाफ मैराथन में प्रतिभाग करने वाली नीतू कुमारी बताती हैं कि उन्होंने इसी वर्ष मैंगलुरू में हुई अखिल भारतीय विवि प्रतियोगिता में अपने वर्ग में स्वर्ण पदक हासिल किया। इसके लिए वे अपने स्तर पर परेड मैदान पर अभ्यास करती रहीं। पोल वाल्ट के खिलाड़ी कुंवर ज्ञानेंद्र सिंह का कहना है कि उनकी स्पर्धा के लिए कोई कोच नहीं है। बावजूद इसके एथलेटिक्स प्रशिक्षक के मार्ग दर्शन में वे अभ्यास करते हैं। दो वर्ष जिला अथवा स्टेट स्तर के टूर्नामेंट नहीं होने से खिलाड़ियों के पदक अथवा सर्टीफिकेट की मान्यता खत्म हो गई।

हैंडबाल के खिलाड़ी भी प्रभावित : हैंडबाल की खिलाड़ी गायत्री पाल दो वर्ष पहले जूनियर वर्ग में थीं। अब खेल शुरू हुआ तो वे सीनियर वर्ग में ही प्रतिभाग करने लायक रहीं। इन दो वर्षों में घर पर मेहनत की। इसका प्रतिफल भी उन्हें मिला। जब उन्होंने सीनियर स्तर पर अप्रैल में इंदौर में हुई राष्ट्रीय हैंडबाल प्रतियोगिता में भाग लिया। क्रिकेट में अंडर-19 उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने वाले अरविंद द्विवेदी कहते हैं कि अभ्यास के साथ मैच मिलने से खिलाड़ी को अनुभव मिलता है। सुब्रत तिवारी का कहना है कि 2020 में वे अंडर 17 खेले थे लेकिन अब वे अंडर 19 के लायक भी नहीं रहे।

इनकी उम्‍मीद थी स्वर्ण जीतने की थी लेकिन नियति कुछ और थी : जूडो खिलाड़ी कृति श्रीवास्तव भी सब जूनियर खेल रहीं थीं। हालांकि अब पुन: जब खेलना शुरू किया तो वे जूनियर स्तर पर पहुंच गईं। निराशा व्यक्त करते वे कहती हैं इस वर्ग में प्रतिस्पर्धा के लिए अब उन्हें पुन: जुटना होगा। इसी प्रकार प्रियंका यादव जूनियर वर्ग में वर्ष 2020 में स्वर्ण पदक जीता था। उन्हें उम्मीद थी कि इस वर्ग में आगे भी वे और स्वर्ण जीतेंगी लेकिन नियति कुछ और थी। इस वर्ग में उन्हें प्रतिस्पर्धा का मौका भी नहीं मिला और वे अब सीनियर वर्ग में पहुंच गईं।

जूडो प्रशिक्षक बोले : प्रयागराज में जूड़ा के प्रशिक्षक संजय कहते हैं कि बच्चे लगातार खेलते रहते हैं तो उनके मानसिक स्तर में वृद्धि होती रहती है। मैदान से जैसे ही वह दूर होता है तो सारी मेहनत बेकार हो जाती है।

ताइक्‍वांडो प्रशिक्षक ने कहा : ताइक्‍वांडो प्रशिक्षक रंजीत यादव ने कहा कि कोरोना संक्रमण ने प्रशिक्षकों की सारी प्लानिंग ध्वस्त कर दी। अब नए सिरे से प्लानिंग कर बच्चों को तैयार करना पड़ेगा।

हैंडबाल प्रशिक्षक क्‍या बोले : हैंडबाल प्रशिक्षक संजय श्रीवास्‍तव बोले कि खिलाड़ियों को लगातार अभ्यास और मैच मिलते रहना चाहिए। नहीं तो खिलाड़ी का खेल का ग्राफ भी तेजी से नीचे जाने लगता है।

Edited By Brijesh Srivastava

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