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अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद के संरक्षक स्‍वामी महेशाश्रम ने पीएम मोदी से मांग की- नए सिरे तय हो अल्पसंख्यक का मानक

स्‍वामी महेशाश्रम ने कहा कि अल्पसंख्यक के नाम पर जाति विशेष के लोगों को सरकारी संसाधन के जरिए तमाम सुविधा दी जा रही है। जबकि वास्तविकता यह है कि वे अब बहुसंख्यक हो चुके हैं ऐसे लोगों को सुविधा देना सरकार बंद करे।

By Brijesh SrivastavaEdited By: Published: Wed, 05 May 2021 11:37 AM (IST)Updated: Wed, 05 May 2021 11:37 AM (IST)
अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद के संरक्षक स्‍वामी महेशाश्रम ने पीएम मोदी से मांग की- नए सिरे तय हो अल्पसंख्यक का मानक
स्‍वामी महेशाश्रम ने पीएम से मांग किया कि जिन प्रदेशों में हिंदू कम हैं, उन्हें मिले अल्पसंख्यक का दर्जा मिले।

प्रयागराज, जेएनएन। सनातन ज्ञान पीठाधीश्वर व अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद के संरक्षक स्वामी महेशाश्रम ने अहम मांग की। उन्‍होंने देश में जाति आधार पर दिए गए अल्पसंख्यक के दर्जे की समीक्षा की मांग की है। उन्होंने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कहा कि भारत का बंटवारा जाति के आधार पर हुआ था। जिन्हें अलग देश दे दिया गया, उन्हीं को अल्पसंख्यक का दर्जा अभी तक दिया जा रहा है। जबकि उनकी जनसंख्या 20 करोड़ से अधिक है। कहा कि जिस जाति के लोगों की जनसंख्या इतनी अधिक है उन्हें अल्पसंख्यक का दर्जा देना क्या उचित है?

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स्‍वामी महेशाश्रम ने सरकार को दी सलाह

स्‍वामी महेशाश्रम ने कहा कि अल्पसंख्यक के नाम पर जाति विशेष के लोगों को सरकारी संसाधन के जरिए तमाम सुविधा दी जा रही है। जबकि वास्तविकता यह है कि वे अब बहुसंख्यक हो चुके हैं, ऐसे लोगों को सुविधा देना सरकार बंद करे। स्वामी महेशाश्रम ने कहा कि देश में अनेक राज्य ऐसे हैं जहां आज हिंदुओं की आबादी बहुत कम है। जो बचे हैं, उनके ऊपर मतांतरण का लगातार दबाव बनाया जा रहा है। उन्हें प्रताड़ित किया जाता है। ऐसे हिंदुओं के लिए सरकार कुछ नहीं कर रही है। ऐसे हिंदुओं को अल्पसंख्यक का दर्जा देते हुए सरकार सुरक्षा मुहैया कराए।

संस्कृत विद्यालयों में हो भर्ती

स्वामी महेशाश्रम ने कहा कि सरकार मदरसों के आधुनिकीकरण पर ज्यादा ध्यान दे रही है। हालांकि संस्कृत विद्यालयों को लेकर उचित काम नहीं हो रहा है। उनके भवन जर्जर हो गए हैं। शिक्षकों का अभाव है। ऐसी स्थिति में देववाणी दम तोड़ रही है। उन्‍होंने कहा कि संस्कृत के उत्थान के लिए हिंदू भावनाओं के अनुरूप सरकार को उचित कदम उठाना चाहिए। ऐसा न किया गया तो संस्कृत भाषा का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। साथ ही भाजपा सरकार की लोकप्रियता भी प्रभावित होगी।


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