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Death anniversary of Firaq Gorakhpuri : आखिर रघुपति सहाय को कैसे मिला फिराक उपनाम, पढ़िए और जानिए पूरा किस्सा

Death anniversary of Firaq Gorakhpuri : आखिर रघुपति सहाय को कैसे मिला फिराक उपनाम, पढ़िए और जानिए पूरा किस्सा

साहित्यकार रविनंदन सिंह बताते हैं कि फिराक से पहले स्वदेश में गजलें नहीं छपती थीं किन्तु उनके आने के बाद उसमें गजलें भी छपने लगीं। महात्मा गांधी की गिरफ्तारी के विरोध में स्वदेश के संपादकीय में उनकी पहली गजल छपी- जो जबानें बंद थीं आजाद हो जाने को हैं।

Ankur TripathiWed, 03 Mar 2021 07:00 AM (IST)
 
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