कोरोना वायरस से संक्रमित ह्दय रोगियों को संभलकर रहने की जरूरत है, डरें नहीं सजगता बरतें

प्रयागराज में स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय के कोविड-19 वार्ड के अधीक्षक व वरिष्‍ठ फिजीशियन डाक्‍टर सुजीत वर्मा का कहना है कि अब तक वार्ड में अधिकांश वही संक्रमित भर्ती हुए हैं जिन्हें दिल की बीमारी पहले से थी। उन्‍होंने ऐसे मरीजों को सलाह भी दी है।

Brijesh SrivastavaPublish: Sat, 29 Jan 2022 10:52 AM (IST)Updated: Sat, 29 Jan 2022 10:52 AM (IST)
कोरोना वायरस से संक्रमित ह्दय रोगियों को संभलकर रहने की जरूरत है, डरें नहीं सजगता बरतें

प्रयागराज, जागरण संवाददाता। कोरोना संक्रमित लोगों को अगर दिल की बीमारी पहले से है तो उन्हें जान का खतरा ज्यादा रहता है। कोरोना की अब तक तीनों ही लहरों में यह बात उभरकर सामने आई है। क्योंकि जितनी भी जानें कोविड-19 में गई हैं उनमें अधिकांश कार्डियक अरेस्ट यानी पहले से कमजोर दिल पर बीमारी का अटैक होने से हुई। तीसरी लहर में भी अब तक कोविड-19 वार्ड में जो 6 मौतें हुई है उनमें 80 प्रतिशत मामलों में कार्डियक अरेस्ट ही दिखाया गया है। ऐसे में घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि सजग रहें और चिकित्‍सकों की सलाह मानें।

तीसरी लहर में एसआरएन के वार्ड में अब तक छह संक्रमितों की मौत हुई

स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय कोविड-19 का लेवल थ्री श्रेणी का अस्पताल है। इसमें कोरोना के दो वार्ड संचालित हैं। तीसरी लहर में इस वार्ड में अब तक छह संक्रमितों की मौत हुई है। इसमें चार महिलाएं हैं। इन छह मौतों में चिकित्सा विभाग ने पांच मामलों में कार्डियक अरेस्ट दिखाया है यानी संक्रमित की मौत कोरोना से न होकर दिल की बीमारी के चलते हुई। यही कोरोना की पहली और दूसरी लहर में भी हुआ था।

कमजोर है दिल तो बरतें सतर्कता

कोरोना संक्रमण के दिनों में उन लोगों को ज्यादा सतर्क रहना है जिन्हें दिल की बीमारी पहले से है। स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय के कोविड-19 वार्ड के अधीक्षक डाक्‍टर सुजीत वर्मा वरिष्ठ फिजीशियन भी हैं। उनका कहना है कि अब तक वार्ड में अधिकांश वही संक्रमित भर्ती हुए हैं, जिन्हें दिल की बीमारी पहले से थी। ऐसे में ह्रदय रोग विभाग के डाक्टरों को भी संक्रमितों की देखभाल के लिए लगाया जा रहा है। कहा कि कोरोना से बचने के लिए दिल के मरीजों को ज्यादा सतर्क रहना होगा।

कोरोना क्लेम में होगी दिक्कत

कोरोना की संक्रमितों की अब तक मौत हुई है उनके स्वजन को कोरोना क्लेम पाने में परेशानी हुई है। क्योंकि चिकित्सा किसी की मौत सीधे कोरोना से न कह कर दिल या अन्य दूसरी बीमारियों से दिखा रहा है। जबकि मृतकों के अंतिम संस्कार कोविड प्रोटोकाल के तहत ही हो रहा है।

Edited By Brijesh Srivastava

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