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नाराज महात्मा बनेंगे खेवनहार, महंत नरेंद्र गिरि की मृत्यु के बाद अखाड़ा परिषद की बैठक आज

संतों के सबसे बड़े संगठन अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की एकता भंग हो गई है। समझौता की गुंजाइश नगण्य है। इसके साथ अखाड़ों की अंदरूनी वैमनस्यता सामने आने लगी है। शुरुआत निर्मल अखाड़ा से हुई है। महंत हरि गिरि का पक्ष 13 अखाड़ों का समर्थन दिखाकर शक्ति प्रदर्शन करेगा।

Ankur TripathiMon, 25 Oct 2021 06:50 AM (IST)
नाराज महात्मा बनेंगे खेवनहार, महंत नरेंद्र गिरि की मृत्यु के बाद अखाड़ा परिषद की बैठक आज

प्रयागराज, जागरण संवाददाता। महंत नरेंद्र गिरि के ब्रह्मलीन होने के बाद संतों के सबसे बड़े संगठन अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की एकता भंग हो गई है। समझौता की गुंजाइश नगण्य है। इसके साथ अखाड़ों की अंदरूनी वैमनस्यता सामने आने लगी है। शुरुआत निर्मल अखाड़ा से हुई है। रेशम सिंह ने कोर्ट के आदेश का हवाला देकर खुद को निर्मल अखाड़ा का अध्यक्ष बताते हुए सोमवार की बैठक में शामिल होने की घोषणा की है। श्रीनिरंजनी अखाड़ा में प्रस्तावित बैठक में महानिर्वाणी, अटल, बड़ा उदासीन सहित वैष्णव सम्प्रदाय के अखाड़ों के नाराज महात्माओं को शामिल करने की तैयारी है। इसके जरिए महंत हरि गिरि का पक्ष 13 अखाड़ों का समर्थन दिखाकर शक्ति प्रदर्शन करेगा।

13 अखाड़ों के महात्माओं का समर्थन हासिल होने का दावा

अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की 20 सितंबर को मृत्यु हो गई। इसके बाद अध्यक्ष पद का चुनाव करने के लिए महामंत्री महंत हरि गिरि ने 25 अक्टूबर को प्रयागराज में दारागंज स्थित श्रीनिरंजनी अखाड़ा के आश्रम में परिषद की बैठक प्रस्तावित किया था। इसके पहले 21 अक्टूबर को हरिद्वार के कनखल स्थित श्रीमहानिर्वाणी अखाड़ा परिसर में महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें महानिर्वाणी के अलावा अटल, निर्मोही अनी, निर्वाणी अनी, दिगंबर अनी, बड़ा अखाड़ा उदासीन व निर्मल अखाड़ा ने नई कार्यकारिणी गठित कर ली। महानिर्वाणी के सचिव श्रीमहंत रवींद्र पुरी अध्यक्ष व निर्मोही अनी अखाड़ा के अध्यक्ष श्रीमहंत राजेंद्र दास महामंत्री चुने गए। दूसरे गुट ने इसे मान्यता देने से इन्कार करते हुए 25 अक्टूबर को नई कार्यकारिणी घोषित करने की घोषणा की है, जिसके साथ अखाड़ों की संख्या अधिक होगी, उसी का बहुमत माना जाएगा। यही कारण है कि शक्ति बढ़ाने के लिए दोनों गुट के हर अखाड़े के महात्माओं से संपर्क करके उन्हें अपने साथ लेने की जुगत भिड़ा रहे हैं।

अखाड़ा परिषद में कुल 26 सदस्य

13 अखाड़ों में आपसी सामंजस्य स्थापित करने के लिए 1954 में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद का गठन हुआ है। इसमें हर अखाड़े के दो-दो सदस्य अर्थात कुल 26 सदस्य होते हैं। हर अखाड़ा संगठन के काम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सचिव व श्रीमहंत को अखाड़ा परिषद के लिए नामित करता है। वो परिषद में अखाड़े का प्रतिनिधित्व करते हैं। अध्यक्ष सहित समस्त पदों का चुनाव हाथ उठवाकर करवाया जाता है। जिसके पक्ष में ज्यादा लोग हाथ उठाते हैं उसी को पद पर आसीन किया जाता है।

2014 से बढ़ गए सदस्य

2014 से अखाड़ा परिषद में 28 सदस्य हो गए थे। अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि व महासचिव महंत हरि गिरि अतिरिक्त सदस्य थे, क्योंकि उनके अखाड़े से दो-दो सदस्य पहले से नामित थे, लेकिन परिषद का महत्वपूर्ण पद होने के कारण उनको लेकर कोई आपत्ति नहीं थी। अब संख्या अधिक होने पर भी आपत्ति हो रही है।

अभी कौन है किसके साथ

अखाड़ा परिषद में शामिल 13 अखाड़ों में शैव (संन्यासी) के सात जूना, महानिर्वाणी, निरंजनी, अग्नि, आह्वान, अटल व आनंद हैं। उदासीन के तीन निर्मल, बड़ा उदासीन व नया उदासीन अखाड़ा हैं। वहीं, वैष्णव सम्प्रदाय के निर्मोही अनी, निर्वाणी अनी व दिगंबर अनी अखाड़ा हैं। मौजूदा समय महानिर्वाणी, अटल, निर्मल, निर्मोही अनी, दिगंबर अनी व निर्वाणी अनी, बड़ा उदासीन अखाड़ा एक तरफ हैं। वहीं, दूसरी ओर जूना, निरंजनी, अग्नि, आह्वान, आनंद, नया उदासीन हैं।

Edited By Ankur Tripathi

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