गुनहगार बचने नहीं पाए लेकिन किसी बेकसूर को भी सजा नहीं मिले, जानिए किस केस में हाई कोर्ट ने कहा

न्यायालय ने कहा कि ट्रायल का अर्थ होता है घटना की सत्यता तक पहुंचना। जिससे किसी निर्दोष को सजा नहीं होनी चाहिए और न ही कोई दोषी बचना चाहिए। इसके लिए जरूरी है ‌कि अभियोजन और बचाव पक्ष को पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए।

Ankur TripathiPublish: Sat, 22 Jan 2022 08:45 AM (IST)Updated: Sat, 22 Jan 2022 08:45 AM (IST)
गुनहगार बचने नहीं पाए लेकिन किसी बेकसूर को भी सजा नहीं मिले, जानिए किस केस में हाई कोर्ट ने कहा

प्रयागराज, विधि संवाददाता। आजमगढ़ के एक ही परिवार के तीन लोगों की हत्या व नाबालिग से दुष्कर्म करने के आरोपी को सुनाई गई मृत्यु दंड और उम्रकैद भुगतने की सजा के फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुनर्विचारण के लिए वापस सेशन कोर्ट को वापस भेज दिया है। न्यायालय ने कहा कि विचारण न्यायालय ने फैसला सुनाने से पूर्व अभियोजन और बचाव पक्ष को पर्याप्त समय नहीं दिया। साथ ही कहा कि कई महत्वपूर्ण साक्ष्योंं पर ठीक से विचार न करते हुए फैसला सुनाया गया है।

न्यायालय ने कहा कि ट्रायल का अर्थ होता है घटना की सत्यता तक पहुंचना। जिससे किसी निर्दोष को सजा नहीं होनी चाहिए और न ही कोई दोषी बचना चाहिए। इसके लिए जरूरी है ‌कि अभियोजन और बचाव पक्ष को पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए।

आजमगढ़ में कत्ल और दुष्कर्म के मामले में यह आदेश

यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज मिश्र और न्यायमूर्ति समीर जैन की खंडपीठ ने आजमगढ़ के नजीरूद्दीन की अपील और फांसी के रिफरेंस पर एक साथ सुनवाई करते हुए दिया है। मामले के मुताबिक आरोपी नजीरुद्दीन पर पीड़ित परिवार के गृह स्वामी, उनकी पत्नी और तीन माह के मासूम बच्चे की हत्या करने और आठ वर्ष की बच्ची के साथ दुष्कर्म कर गंभीर रूप से घायल करने और छह साल के मासूम को मरणासन्न कर देने का मुकदमा दर्ज कराया गया था।

अपील पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा की अभियोजन पक्ष ने घटना से संबंधित कोई तात्विक वस्तु प्रस्तुत नहीं की है न ही ऐसा कोई संबंधित साक्ष्य दिया है जिससे पता चले कि जब्त की गई वस्तुएं घटनास्थल से ही एकत्र की गई हैं। फील्ड यूनिट द्वारा एकत्र साक्ष्यों को अदालत में प्रदर्शित नहीं किया गया। फोरेंसिंक रिपोर्ट और फिंगर प्रिंट रिपोर्ट अभियुक्त का बयान हो जाने के बाद बरामद की गई। इन रिपोर्ट पर अभियुक्त को अपनी सफाई पेश करने का अवसर नहीं दिया गया। ऐसी दशा में न्यायालय ने मुकदमे का पुनर्विचारण को समीचीन मानते हुए आदेश दिया है।

यह था पूरा घटनाक्रम

25 नवंबर 2019 को पीड़ित परिवार के भाई ने आजमगढ़ के मुबारकपुर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि पड़ोसियों से सूचना मिलने पर जब वह अपने भाई के घर पहुंचा तो 24- 25 नवंबर की रात्रि में उसके भाई, उनकी पत्नी और तीन माह के मासूम की किसी ने बेहरमी से हत्या कर दी थी तथा आठ वर्ष की बच्ची से दुष्कर्म किया। छह वर्ष के मासूम बेटे को भी मरणासन्न् अवस्था में पहुंचा दिया। घायल बच्ची के बयान के आधार पर पुलिस ने नजीरूद्दीन को गिरफ्तार किया। उसकी निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त ईट और औजार व खून लगे कपड़े आदि बरामद किए। मौके से फील्ड यूनिट ने भी साक्ष्य एकत्र का फोरेंसिंक जांच के लिए भेजा। इसके बाद अदालत ने अभियुक्यों को हत्या के जुर्म में फांसी और दुष्कर्म, बच्ची से दुष्कर्म सहित तीन अलग-अलग धाराओं में तीन अलग-अलग उम्रकैद की सजा सुनाई। अभियुक्त पर नौ लाख रुपये जुर्माना भी लगाया है।

Edited By Ankur Tripathi

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