सहयोग की उम्मीद में रूठों को मना रहे उम्मीदवार, टिकट न मिलने से दावेदारों के टूटे अरमान

UP Assembly Elections 2022 अलीगढ़ की सात विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी व राष्‍ट्रीय लोकदल ने गठबंधन कर प्रत्‍याशी उतारे हैं। इसके चलते सपा के कई दावेदारों को टिकट नहीं मिल पाया। ऐसी स्‍थिति में उम्‍मीदवार अब अपने रूठे साथियों को मनाने में जुट गए हैं।

Anil KushwahaPublish: Mon, 24 Jan 2022 08:16 AM (IST)Updated: Mon, 24 Jan 2022 08:45 AM (IST)
सहयोग की उम्मीद में रूठों को मना रहे उम्मीदवार, टिकट न मिलने से दावेदारों के टूटे अरमान

अलीगढ़, जागरण संवाददाता। UP Assembly Elections 2022 समाजवादी पार्टी की टिकट पर टकटकी लगाए बैठे बहुत से दावेदारों के अरमान पूरे न हो सके। कुछ रूठ गए तो कई ने पार्टी नेतृत्व के आदेश के आगे सिर झुका लिया। रूठों को मनाने की जिम्मेदारी नेतृत्व ने उम्मीदवारों को दी है, जो सहयोग की उम्मीद लिए घर-घर जाकर असंतुष्टों को मना रहे हैं। सहयोग का भराेसा मिल भी रहा है।

रालोद को तीन सीट मिली

जनपद की सातों सीटों पर सपा-रालोद गठबंधन ने अपने प्रत्याशी उतारे हैं। इनमें रालोद को बिना किसी विवाद के तीन सीटें मिली हैं। लेकिन, बाकी चार सीटों पर सपा प्रत्याशियों के चयन में काफी मंथन करना पड़ा। इन सीटों पर 40 सपाइयों की दावेदारी थी। शहर सीट पर पूर्व विधायक जफर आलम प्रबल दावेदार थे। अतीत अग्रवाल, विनोद सविता समेत अन्य दावेदार भी तैयारियां कर चुके थे। जातीय समीकरणों के आधार पर वे अपनी दावेदारी पुख्ता मान रहे थे। उधर, काेल सीट पर दावेदारों की सूची लंबी थी। पूर्व विधायक जमीर उल्लाह पुन: इस सीट पर दावा ठोंक रहे थे। सलमान शाहिद ने पिछले दो साल में अपना कद बढ़ाने की भरपूर कोशिश की। उस्मान खान, मोहम्मद सगीर, ख्वाजा जिब्रान, अहमद सईद सिद्दीकी जैसे दिग्गज भी लाइन में लगे थे। सलमान को टिकट मिल भी गया, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने टिकट काटकर पूर्व में चुनाव लड़ चुके अज्जू इश्हाक को प्रत्याशी घोषित कर दिया।

गम भुलाने का प्रयास

अतरौली सीट पर पूर्व विधायक वीरेश यादव प्रत्याशी हैं। यहां से जिलाध्यक्ष गिरीश यादव, पूर्व जिलाध्यक्ष अशोक यादव आदि बड़े नेता दावा कर रहे थे। इधर, छर्रा सीट पर पार्टी ने नया प्रयोग कर छह माह पूर्व पार्टी में शामिल हुईं लक्ष्मी धनगर को प्रत्याशी बनाया है। जबकि, पूर्व छर्रा विधायक राकेश सिंह, पूर्व ब्लाक प्रमुख तेजवीर सिंह समेत दर्जनभर सपाई दावा कर रहे थे। टिकट न मिलने पर तेजवीर सिंह के एक समर्थक ने तो लखनऊ पार्टी मुख्यालय के बाहर खुद पर पेट्रोल डाल लिया था। ऐसे में प्रत्याशियों को वोटरों से पहले पार्टी में असंतुष्टों को मनाना बड़ी चुनौती है। परिस्थितियों को भांपकर ही पार्टी नेतृत्व ने इन्हें मनाने की जिम्मेदारी प्रत्याशियों को दी है। अतीत अग्रवाल को मनाने जफर आलम उनके घर गए थे और सहयोग का भरोसा लेकर लौटे। कोल सीट जीतने का जमीर उल्लाह, सलमान शाहिद आदि दावा कर रहे हैं। छर्रा और अतरौली विधानसभा क्षेत्रों में भी टिकट न मिलने का गम भुलाकर दावेदार प्रत्याशियों के साथ प्रचार-प्रसार में जुट गए हैं।

इनका कहना है

टिकट की घोषणा से पूर्व ही दावेदार अपना-अपना पक्ष मजबूती से रखते हैं। प्रत्याशी घोषित होने पर सभी को पार्टी नेतृत्व का आदेश मानना होता है। प्रत्याशी घर-घर जाकर रूठों को मना रहे हैं। किसी तरह का कोई मतभेद नहीं है। सहयोग भी मिल रहा है।

गिरीश यादव, जिलाध्यक्ष सपा

Edited By Anil Kushwaha

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