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सहयोगियों का झंडा बुलंद होता देख डगमगाने लगी साइकिल Aligarh news

जिला पंचायत के नौ मोर्चों पर कामयाबी के बाद किला फतह करने का ख्वाब लिए दौड़ रही साइकिल अब डगमगाने लगी है। जिस सहारे से साइकिल अब तक दौड़ रही थी उसका झंडा भी अब लहराने लगा है।

Anil KushwahaMon, 17 May 2021 04:25 PM (IST)
सहयोगियों का झंडा बुलंद होता देख डगमगाने लगी साइकिल Aligarh news

अलीगढ़, जेएनएन  । जिला पंचायत के नौ मोर्चों पर कामयाबी के बाद किला फतह करने का ख्वाब लिए दौड़ रही साइकिल अब डगमगाने लगी है। जिस सहारे से साइकिल अब तक दौड़ रही थी, उसका झंडा भी अब लहराने लगा है। दरअसल, राष्ट्रीय लोक दल भी जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट पर दावेदारी कर रहा है। राजनीति में पैर जमाए रखने के लिए रालाेद के लिए यह जरूरी भी है। चुनाव में रालोद में भले ही सात सीटें जीती हों, लेकिन निर्दलीयों पर अच्छा दबदबा है। उधर, नौ सीटें जीत चुकी सपा भी रालोद और निर्दलीयों के समर्थन के सहारे अध्यक्ष की कुर्सी पर दावे कर रही है। लेकिन, ये इतना भी आसान नहीं होगा। भाजपा ने अपने पत्ते अभी खोले नहीं है। रालोद की दबी मंशा और भाजपा की कूटनीति से भी सपा को सामना करना है।

सत्‍ता पाने की जुग में सपा

उत्तर प्रदेश की सत्ता से दूर हुई समाजवादी पार्टी पुन: सत्ता पाने के लिए हर कोशिश कर रही है। मौजूदा सरकार की कमियां गिनाकर जनता का ध्यान खींचना भी इसी राजनीति का हिस्सा है। हालांकि, विपक्षी पार्टियां अक्सर यही करती हैं। लेकिन, मौके को भुनाना अलग बात है। सपा भी यही कर रही है। नोटबंदी, जीएसटी, सीएए, कृषि कानून के बाद कोरोना काल में अव्यवस्थाआें को लेकर भाजपा पर कटाक्ष किए जा रहे हैं। पंचायत चुनाव में भी इन्हीं सब को लेकर सवाल दागे गए। हालातों को झेल चुकी जनता को पुन: एहसास कराया गया। नेताओं के भाषण में यही मुद्​दे रहते। सपा को इसका कितना फायदा हुआ, ये पार्टी के नेता जाने। लेकिन भाजपा को नुकसान जरूर हुआ है। पंचायत चुनाव में भाजपा नौ सीटें ही जीत सकी है। साथ खड़े होने के लिए कोई दल भी नहीं है। सपा नेता इस बात को जानते हैं। शंका तो इस बात की है कि निर्वाचित हुए 17 निर्दलीय भाजपा के खेमे में चले गए तो सारी बिसात बिगड़ जाएगी। क्योंकि, अध्यक्ष चुनाव लंबा खिंचता जा रहा है। इस दरम्यान सारे पत्ते खुल जाएंगे।

Edited By: Anil Kushwaha

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