आगरा के जिस उद्योग की दुनियाभर में है धाक, लेकिन घर में मिल रही मात, ये है कारण

जूता निर्यात पर कंटेनर के भाड़े घरेलू बाजार पर जीएसटी की मार। कोरोना के साथ जीएसटी वृद्धि से जूझ रहा घरेलू बाजार। जूता निर्यातकों को कंटेनर की अनुपलब्धता सता रही। शहर में करीब सात हजार जूता कारखाने हैं। करीब तीन लाख लोग प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से आश्रित हैं।

Tanu GuptaPublish: Tue, 25 Jan 2022 05:00 PM (IST)Updated: Tue, 25 Jan 2022 05:00 PM (IST)
आगरा के जिस उद्योग की दुनियाभर में है धाक, लेकिन घर में मिल रही मात, ये है कारण

आगरा, जागरण संवाददाता। आगरा के जूते की धाक दुनियाभर में है। देश के जूता निर्यात में 28 फीसद और घरेलू बाजार में 65 फीसद की भागीदारी रखने वाला जूता कारोबार आज कई परेशानियों से जूझ रहा है। जूता निर्यातकों को कंटेनर की अनुपलब्धता व भाड़े की वृद्धि ने परेशान कर रखा है तो घरेलू कारोबार कोरोना वायरस के संक्रमण के साथ ही जीएसटी की वृद्धि से जूझ रहा है। अनिश्चितता की स्थिति होने से व्यापारी माल नहीं खरीद रहे हैं।

आगरा का जूता कारोबार वर्ष 2020 में दुनिया में कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने के साथ प्रभावित हुआ था। वित्तीय वर्ष 2020-21 में जूता निर्यातकों के आर्डर घटकर 40 से 50 फीसद रह गए थे। वित्तीय वर्ष 2021-22 में कोरोना वायरस के संक्रमण की दूसरी लहर के चलते कारोबार प्रभावित हुआ। सरकार ने कच्चे चमड़े के आयात पर 10 फीसद कर लगाने के साथ ही जूते की गुणवत्ता बढ़ाने को इंपोर्ट लाइसेंस स्कीम को रद कर दिया गया था। इससे जूता निर्माण महंगा हो गया। इससे उबरने की कोशिश करते निर्यातकों की मुश्किलें कंटेनर की अनुपलब्धता और भाड़े में हुई वृद्धि ने बढ़ा दीं। उधर, घरेलू जूता कारोबार कोरोना वायरस के संक्रमण से पूरी तरह उबर भी नहीं सका था कि एक जनवरी से एक हजार रुपये तक के जूते पर जीएसटी को पांच से बढ़ाकर 12 फीसद कर दिया गया। कोरोना वायरस का संक्रमण बढ़ने और जीएसटी बढ़ाए जाने से घरेलू जूता कारोबार प्रभावित हो गया है। जूता कारोबारी जीएसटी घटाने की मांग कर रहे हैं।

2022 में स्थिति सुधरने की है उम्मीद

एफमेक अध्यक्ष पूरन डावर ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार में अच्छी संभावनाएं नजर आ रही हैं। उम्मीद है कि कोरोना काल से पूर्व के वित्तीय वर्ष 2019-20 से भी यह अच्छा रहेगा। चीन से जूते का आयात बंद होने के बाद घरेलू बाजार में जूता कारोबारियों के लिए अवसर बढ़ रहे हैं।

समर सीजन में विंटर सीजन की अपेक्षा कम आर्डर मिलते हैं। दुनिया में ओमिक्रोन के मामले बढ़ने के बाद एक बार फिर जूता निर्यात कारोबार बैकफुट पर आ गया है। अनिश्चितता की स्थिति है।

-शाहरू मोहसिन, जूता निर्यातक

जो कंटेनर पहले एक हजार डालर में मिलता था, वो अब 3500 से 5000 डालर तक में मिल रहा है। कंटेनर की दिक्कत भारत ही नहीं, अन्य देशों में भी है। माल भेजना महंगा पड़ रहा है।

-पूरन डावर, अध्यक्ष एफमेक

घरेलू बाजार कोरोना वायरस का संक्रमण बढ़ने और एक हजार रुपये तक के जूते पर जीएसटी को पांच से बढ़ाकर 12 फीसद किए जाने से प्रभावित है। माल नहीं बिक रहा है, बाजार में सन्नाटा है।

-गागनदास रामानी, अध्यक्ष आगरा शू फैक्टर्स फेडरेशन

कोरोना वायरस के संक्रमण की स्थिति से बाजार उबर भी नहीं सका था कि जीएसटी में की गई वृद्धि से जूता कारोबार प्रभावित हो गया। 20 से 25 फीसद कारोबार रह गया है। स्थिति अच्छी नहीं है।

-विनोद सीतलानी, सचिव शू सोल एसोसिएशन

जूता निर्यात कारोबार

-आगरा में करीब 150 जूता निर्यातक इकाइयां हैं।

-करीब पांच हजार करोड़ रुपये का वार्षिक निर्यात होता है।

-देश के जूता निर्यात में आगरा की भागीदारी 28 फीसद है।

-आगरा से 80 फीसद निर्यात यूरोपीय देशों, 16 फीसद अमेरिका व बाकी अन्य देशों को होता है।

-अक्टूबर से फरवरी तक समर सीजन व मार्च से सितंबर तक विंटर सीजन का माल तैयार किया जाता है।

घरेलू जूता कारोबार

-शहर में करीब सात हजार जूता कारखाने हैं।

-करीब तीन लाख लोग प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से आश्रित हैं।

-करीब 15 हजार करोड़ रुपये का घरेलू कारोबार अप्रत्यक्ष रूप से होता है।

-देश के घरेलू जूता कारोबार में आगरा की करीब 65 फीसद भागीदारी है।

-आगरा में करीब दो दर्जन मार्केट जूता कारोबार के हैं। करीब सात हजार दुकानें हैं। 

Edited By Tanu Gupta

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