प्रत्याशियों ने लिए वोट, वादों संग बेवफाई

आज भी कच्चा है बीहड़ इलाके में बना पगडंडीनुमा मार्ग ग्रामीणों को विकास की आस फिरोजाबाद की सीमा से जुड़ा है गगनकी गांव सात दशक बाद भी बदहाल

JagranPublish: Sun, 23 Jan 2022 06:10 AM (IST)Updated: Sun, 23 Jan 2022 06:10 AM (IST)
प्रत्याशियों ने लिए वोट, वादों संग बेवफाई

जागरण टीम, आगरा। प्रत्याशियों ने वोट हासिल किए, लेकिन वादों संग बेवफाई की। पिछड़ेपन का दंश झेल रहे गगनकी गांव की पीड़ा लंबे समय बाद भी दूर नहीं हो सकी है। दुर्गम स्थान पर बना पगडंडीनुमा रोड आवागमन में बड़ी बाधा है। गांव के लोग कहते हैं कि जनप्रतिनिधियों ने हर बार छला लेकिन अपेक्षित विकास न हुआ। गांव जाने वाला मार्ग बदहाल है। सात दशक बाद भी गांव के लिए न सड़क बनी है और न ही पानी की निकासी का मुकम्मल इंतजाम है।

फिरोजाबाद जिले की सीमा से जुड़े गगनकी गांव की बाह तहसील से दूरी 30 किलोमीटर है। 28 किलोमीटर का मार्ग आसान है लेकिन दो किलोमीटर का रास्ता आपको परेशान कर देखा। जंगल के बीच मिट्टी के टीलों के बीच पगडंडीनुमा मार्ग धूल से अटा रहता है। प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ इस गांव तक नहीं पहुंचा है। कच्ची झोपड़ी में लोग जीवन बसर कर रहे हैं। यहां की गुड्डी देवी, जमुना देवी, यशपाल, रामखिलाड़ी, हीरा सिंह आदि कहना है कि गांव का रास्ता बन जाय तो विकास के रास्ते खुल जाएंगे। रामखिलाड़ी , हीरा सिंह झोपड़ी में गुजर कर रहे हैं। कहते हैं, साहब सरकारी आवास तो तब मिलेगा, जब यहां सरकारी कर्मचारी या जनप्रतिनिधि आएंगे। तीन किलोमीटर दूर विद्यालय

गांव में कोई विद्यालय भी नहीं है। बच्चों को तीन किलोमीटर दूर बलाई गांव जाना पड़ता है। यह मार्ग भी बीहड़ इलाकों से होकर गुजरता है। परिवार के सदस्य ही उन्हें छोड़ने और लेने जाते हैं। अब तक गाम कौ रास्ताई नाय बकै। बेटन के ब्याह के लैं दिक्कित होतिए। अपई बेटी ब्याहिवे के लैं आइबे बाए एक बार के बाद फिर नाय आबत।

-गुड्डी देवी, क्षेत्रीय महिला पक्की सड़क नाय जा गाम में। तासूं चौमासिन मैं कछु जादा हैरान हौनौ पड़तुऐ। पैहले के जमाने में तो ब्याह है जाते, अब सब अपई बेटिन के लैं अच्छे गाम देखतें।

- जमुना देवी, क्षेत्रीय महिला

गरीबी की मार है। सरकार ने कछु नाय सोची। आवास नाय मिलो, कच्चे घर में रहकर गुजारों करनौ पड़ रहयो ऐ। बारिश में परेशानी जादा होतिऐ।

- रामप्रकाश, क्षेत्रीय ग्रामीण वोटन के बख्त नेता आवतैं और सड़क बनवाइबे कूं कह जात ऐं। वोट लैवे के बाद फिर पाच साल झांकिवे ऊ नाय आवत।

-यशपाल, क्षेत्रीय ग्रामीण

Edited By Jagran

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