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समझदारी से उठाएं फायदा

अगर लोगों से निवेश के फायदे गिनाने को कहा जाए तो ज्य़ादातर लोगों का पहला जवाब होता है- टैक्स की बचत, पर इस जल्दबाज़ी में लोग यह भूल जाते हैं कि निवेश का मूल उद्देश्य केवल टैक्स बचाना नहीं, बल्कि आर्थिक सुरक्षा के लिए लाभ अर्जित करना भी है।

Wed, 24 Dec 2014 10:41 AM (IST)
समझदारी से उठाएं फायदा

दो महीने बाद इनकम टैक्स से जुडी कवायद शुरू हो जाएगी। टैक्स का नाम सुनते ही लोग चिंतित हो जाते हैं और इससे बचने के लिए वे बिना सोचे-समझे ऐसी योजनाओं में भी निवेश कर देते हैं, जिससे उन्हें कोई ख्ाास फायदा नहीं होता। ऐसी समस्या से बचने के लिए निवेश संबंधी निर्णय लेने में कोई जल्दबाजी न दिखाएं।

अगर लोगों से निवेश के फायदे गिनाने को कहा जाए तो ज्य़ादातर लोगों का पहला जवाब होता है- टैक्स की बचत, पर इस जल्दबाजी में लोग यह भूल जाते हैं कि निवेश का मूल उद्देश्य केवल टैक्स बचाना नहीं, बल्कि आर्थिक सुरक्षा के लिए लाभ अर्जित करना भी है।

प्राथमिकताओं को पहचानें

हर निवेशक में जोख्िाम उठाने की क्षमता और मुनाफा प्राप्त करने की अपेक्षाएं अलग होती हैं। इनकम टैक्स की मामूली सी रकम बचाने के लालच में व्यक्ति को अपने जोख्िाम या रिटर्न से जुडी प्राथमिकता की सीमा को नहीं भूलना चाहिए। मिसाल के तौर पर यदि किसी व्यक्ति की उम्र 50 वर्ष है और वह आयकर बचाने के लिए निवेश करना चाहता है तो उसे यूलिप या ईएलएसएस यानी इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम में अत्यधिक निवेश नहीं करना चाहिए। इससे उसके पोर्टफोलियो में अस्थिरता आ सकती है। मात्र 10 से 30 प्रतिशत कर बचत करने के लिए व्यक्ति को अपनी आय का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा निवेश करना होगा, इससे टैक्स में छूट तो अवश्य मिल जाएगी, लेकिन यह निवेश उसके लिए बहुत महंगा साबित होगा। इसी तरह अगर 20 वर्ष की आयु में कोई व्यक्ति टैक्स सेविंग के लिए विकल्प की तलाश कर रहा हो तो उसे ईएलएसएस, यूलिप या पीपीएफ जैसी ज्य़ादा रिटर्न देने वाली योजनाओं में निवेश करना चाहिए।

लंबी योजनाओं से दूरी

टैक्स बचाने की जल्दबाजी में अकसर लोग लंबी लॉक इन पीरियड वाली योजनाओं में अपने पैसे फंसा देते हैं। तुलनात्मक रूप से देखा जाए तो ऐसी पीपीएफ या पांच साल की एफडी में टैक्स की बचत के साथ अच्छा ब्याज जरूर मिल जाता है, पर इसका सबसे बडा नुकसान यह है कि आकस्मिक जरूरत की स्थिति में व्यक्ति वहां से अपने पैसे बीच में निकाल नहीं सकता। महज टैक्स बचाने के लिए एक साथ कई बीमा योजनाओं में पैसे न लगाएं। इसलिए इमरजेंसी फंड से कटौती करके निवेश न करें।

फायदे के लिए करें निवेश

यह न भूलें कि कर बचत के अलावा निवेश से व्यक्ति को कुछ वास्तविक लाभ भी प्राप्त होता है। यदि मुद्रास्फीति की मौजूदा दर 7 प्रतिशत है तो धारा 80 सी के अंतर्गत कर के लाभों पर विचार करें तो आपके निवेश को कर में छूट के बाद भी कम से कम 7 प्रतिशत का रिटर्न अवश्य मिलना चाहिए। यहां टैक्स में छूट के बाद रिटर्न का उल्लेख इसलिए किया गया है क्योंकि निवेश की अवधि पूर्ण होने के बाद पीपीएफ और कुछ निश्चित बीमा योजनाओं में व्यक्ति के निवेश से प्राप्त लाभ पर भी टैक्स वसूला जाता है।

जल्दबाजी में न करें निवेश

निवेश के लिए के लिए 31 मार्च की समय सीमा का इंतजार न करें। अंतिम क्षणों में किया गया निवेश आमतौर पर अनुकूल नहीं होता। जल्दबाजी में लोग अपनी वित्तीय प्रोफाइल पर गौर किए बगैर निर्णय ले लेते हैं। बेहतर यही होगा कि इसके लिए पहले से योजना बनाएं, योग्य फाइनेंशियल प्लानर से सलाह लेने के बाद ही निवेश करें। यदि आप ईएलएसएस अथवा यूलिप में निवेश करने के इच्छुक हैं तो आपको समय सीमा का इंतजार नहीं करना चाहिए और सिप (सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) के माध्यम से निवेश प्रारंभ कर देना चाहिए। इस तरह आप अपने निवेश में बाजार से संबंधित जोखिम को कम करने में कामयाब होंगे।

विनीता

(बोनान्जा पोर्टफोलियो लिमिटेड के एसोसिएट फंड मैनेजर हीरेन ढाकन से बातचीत पर आधारित)