Rajasthan Assembly Election 2023: राजस्थान में विधानसभा चुनाव से पहले गरमाया किसान कर्जमाफी का मुद्दा, जानें-किसने क्या कहा

Rajasthan Assembly Election 2023 राजस्थान में किसान कर्जमाफी का मुद्दा विधानसभा चुनाव से पहले गरमा गया है। कर्ज नहीं चुकाने के कारण राज्य के 10 हजार से ज्यादा किसानों की जमीन नीलाम करने की प्रक्रिया चल रही है। किसान कर्ज माफी को लेकर भाजपा कांग्रेस सरकार को घेर रही है।

Sachin Kumar MishraPublish: Fri, 21 Jan 2022 03:58 PM (IST)Updated: Fri, 21 Jan 2022 03:58 PM (IST)
Rajasthan Assembly Election 2023: राजस्थान में विधानसभा चुनाव से पहले गरमाया किसान कर्जमाफी का मुद्दा, जानें-किसने क्या कहा

जयपुर, नरेन्द्र शर्मा। राजस्थान विधानसभा चुनाव से पहले किसान कर्जमाफी का मुद्दा गरमा गया है। कर्ज नहीं चुकाने के कारण राज्य के 10 हजार से ज्यादा किसानों की जमीन नीलाम करने की प्रक्रिया चल रही है। किसान कर्ज माफी को लेकर भाजपा जहां कांग्रेस सरकार को घेर रही है। वहीं, अशोक गहलोत सरकार का कहना है कि राज्यपाल कलराज मिश्र और केंद्र सरकार के कारण सभी किसानों का कर्ज माफ नहीं हो पा रहा है। सीएम गहलोत के बाद अब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि सरकार ने 31 अक्टूबर, 2020 को किसान की पांच एकड़ तक की जमीन को नीलामी या कुर्की से मुक्त करने को लेकर सिविल प्रक्रिया संहिता राजस्थान संशोधन विधेयक, 2020 विधानसभा में पारित करवाया था। इस विधेयक के साथ ही केंद्रीय कृषि कानूनों को बाईपास करने के लिए तीन विधेयक भी पारित कर मंजूरी के लिए राज्यपाल के पास भेजे गए थे, लेकिन राज्यपाल ने चारों विधेयकों को मंजूरी नहीं दी है। राज्यपाल यदि विधेयक को मंजूरी दे देते तो पांच एकड़ तक भूमि के मालिकों को राहत मिल जाती। उधर, करीब 35 लाख किसानों पर 60 हजार करोड़ का राष्ट्रीयकृत बैंकों का कर्ज बकाया है। इन बैंकों ने कर्ज वसूली की प्रक्रिया शुरू की है।

सरकार का दावा 14 हजार करोड़ का कर्ज माफ किया

राज्य के सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना का कहना है कि सरकार ने सहकारी बैंकों के 14 हजार करोड़ के कर्ज माफ किए हैं। इससे करीब 25 लाख किसानों को लाभ हुआ है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीयकृत बैंकों के कर्ज माफ करने को लेकर केंद्र सरकार से कई बार आग्रह किया जा चुका है। राष्ट्रीयकृत बैंकों का कर्ज माफ करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है। हालांकि सीएम गहलोत ने शुक्रवार को नीलामी पर रोक लगा दी है, लेकिन अब यह सवाल उठने लगा है कि जब राष्ट्रीयकृत बैंक राज्य सरकार के अधीन नहीं है तो फिर इनकी वसूली पर कैसे रोक लगाई जा सकती है। डोटासरा का कहना है कि उपखंड अधिकारियों की अनुमति के बिना नीलामी नहीं हो सकती है। ऐसे में सरकार ने इन्हें नीलामी की मंजूरी नहीं देने के निर्देश दिए हैं।

अशोक गहलोत बोले, विधेयक को मंजूरी मिले तो कानून बने

सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि किसानों की जमीन नीलाम नहीं होगी। सरकार ने तीन काले कृषि कानूनों के समय अपने विधेयक बनाकर राज्यपाल के पास भेजे थे। उनमें से एक विधेयक किसानों की पांच एकड़ तक जमीन नीलाम नहीं कर सकने का था। उस विधेयक को राज्यपाल ने केंद्र को भेजा होगा। उसे मंजूरी नहीं मिली है। केंद्र सरकार उस विधेयक को मंजूर कर दे तो यह कानून बन जाएगा। इसके बाद जमीन नीलाम करने की किसी अधिकारी की हिम्मत नहीं होगी।

भाजपा ने कहा, राहुल गांधी का वादा पूरा नहीं कर रहे अशोक गहलोत

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने एक बयान में कहा कि राहुल गांधी ने विधानसभा चुनाव के समय सभी किसानों के कर्ज माफ करने का वादा किया था, लेकिन गहलोत अपने नेता का वादा ही पूरा नहीं कर रहे हैं। गहलोत सरकार को सभी किसानों के कर्ज माफ करने चाहिए। इस मामले में भाजपा आंदोलन करेगी।

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राहुल जी आपने कर्ज माफी के नाम पर किसानों को खूब गिनती सुनाई थी। उन्होंने भरोसा किया जिसकी वजह से आज उनकी जमीन नीलाम हो रही है। अब गहलोत जी ने नीलामी रुकवाने का ड्रामा किया है लेकिन बैंक ने बस सात दिनों की मोहलत दी है। जो पार्टी 70 साल में भूमिपुत्रों का भला नहीं कर सकी, वो सात दिनों में क्या कर लेगी? कांग्रेस कभी किसानों के साथ नहीं रही, उसके सगे तो भू-माफिया हैं। #Rajasthan - Gajendra Singh Shekhawat (@gssjodhpur) 21 Jan 2022

Edited By Sachin Kumar Mishra

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