खडूर साहिब से आज तक किसी विधायक को नहीं मिली कैबिनेट में जगह

विधानसभा हलका खडूर साहिब में 1972 से लेकर 2017 तक कुल दस बार चुनाव हुए।

JagranPublish: Sat, 29 Jan 2022 12:01 AM (IST)Updated: Sat, 29 Jan 2022 02:30 PM (IST)
खडूर साहिब से आज तक किसी विधायक को नहीं मिली कैबिनेट में जगह

धर्मबीर सिंह मल्हार, तरनतारन: विधानसभा हलका खडूर साहिब में 1972 से लेकर 2017 तक कुल दस बार चुनाव हुए। इसमें छह बार शिरोमणि अकाली दल और चार बार कांग्रेस ने जीत हासिल की है। इस हलके से शिअद से रणजीत सिंह छज्जलवड्डी और मनजीत सिंह मीयांविड दो-दो बार चुनाव जीतने में कामयाब रहे। हालांकि कांग्रेस के रमनजीत सिंह सिक्की ने दो बार जीत दर्ज करवाई। दूसरा खडूर साहिब से किसी भी विधायक को सरकार की कैबिनेट में मंत्री बनने का सौभाग्य प्राप्त नहीं हुआ।

1972 में कांग्रेस की बीबी जसवंत कौर ने शिअद के मोहन सिंह को हराया। 1977 के चुनाव में शिअद के जत्थेदार निरंजन सिंह शाहबाजपुरी ने सीपीआइ के सरवन सिंह को हराया। प्रदेश में प्रकाश सिंह बादल की अगुआई में अकाली दल की सरकार बनी। परंतु शाहबाजपुरी को कैबिनेट में स्थान नहीं मिला। 1980 में कांग्रेस के लक्खा सिंह ने आजाद प्रत्याशी पाल सिंह को मात दी। दरबारा सिंह की अगुआई में बनी कांग्रेस की सरकार में लक्खा को जगह नहीं दी गई। 1985 के चुनाव में शिअद के तारा सिंह ने कांग्रेस की महिला प्रत्याशी कंवलजीत कौर को हराया। परंतु तारा सिंह को शिअद सरकार की कैबिनेट में जगह नहीं मिली। 1992 में बादल दल ने चुनाव का बायकाट किया। अकाली दल (लोंगोवाल) से रणजीत सिंह छज्जलवड्डी ने कांग्रेस के लक्खा सिंह को 298 मतों से मात दी। परंतु बेअंत सिंह की सरकार बनी। 1997 में छज्जलवड्डी ने बादल दल से दोबारा चुनाव लड़ा और जीत दर्ज करवाई। फिर भी बादल सरकार में छज्जलवड्डी को मंत्री पद नहीं मिला।

वर्ष 2002 के चुनाव में शिअद ने मनजीत सिंह मीयांविड को उतारा तो उन्होंने कांग्रेस के पूर्व मंत्री सुखदेव सिंह शाहबाजपुरी को हरा दिया। विधायक शिअद का जीता, तो सरकार कैप्टन अमरिदर सिंह की बन गई। वर्ष 2007 में मीयांविड को शिअद ने दोबारा टिकट दी। उन्होंने तरसेम सिंह डीसी (कांग्रेस) को हरा दिया। बादल की अगुआई में सरकार बनी तो मीयांविड को सीपीएस तक ही सीमत रखा गया। पहले आरक्षित रहा है हलका, अब जनरल घोषित किया

खडूर साहिब हलका अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित रहा। नई हलकाबंदी में यह हलका जनरल घोषित कर दिया गया। 2012 के चुनाव में कांग्रेस ने रमनजीत सिक्की को उतारा तो शिअद ने रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा को टिकट दिया। सिक्की ने ब्रह्मपुरा को 3057 मतों से हरा दिया। तब राज्य में शिअद की सरकार बन गई। 2017 के चुनाव में कांग्रेस ने दोबारा सिक्की को मैदान में उतारा तो शिअद के रविदर सिंह ब्रह्मपुरा को सिक्की ने हरा दिया। कैप्टन की सरकार बनने के बावजूद सिक्की को कैबिनेट में जगह नहीं मिली। उप चुनाव में जीते थे रविदर सिंह ब्रह्मंपुरा

धार्मिक बेअदबी के मामले में 2016 में विधायक रमनजीत सिंह सिक्की ने त्यागपत्र दिया। फिर उप चुनाव में शिअद के रविदर सिंह ब्रह्मपुरा ने 63 हजार मतों से आप के प्रत्याशी भूपिदर सिंह बिट्टू ख्वासपुर को हराया, परंतु बादल सरकार के महज दस माह के कार्यकाल के चलते रविदर सिंह ब्रह्मपुरा केवल विधायक ही रह पाए। उप-चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने बायकाट किया था। रोचक: सबसे कम और सर्वाधिक मतों से जीते थे रणजीत छज्जलवड्डी

दूसरा रोचक किस्सा यह बी है कि खडूर साहिब से रणजीत सिंह छज्जलवड्डी ऐसे प्रत्याशी रहे हैं जिन्होंने सबसे कम और सबसे अधिक अंतर से इस सीट पर जीत हासिल की है। वर्ष 1992 में हुए चुनाव में वह महज 298 मतों से और 1997 में रिकार्ड 33,290 मतों से जीते थे। उनसे पहले 1972 में कांग्रेस की बीबी जसवंत कौर ने 25,292 मत लेकर शिअद के मोहन सिंह को सिर्फ 1794 मतों से हराया था।

Edited By Jagran

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