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पंजाब.. धरना देने शिक्षामंत्री के घर पहुंची तो मिलने के लिए बुलाया

संगरूर निजी स्कूलों की वर्ष दर वर्ष बढ़ती फीसों के कारण शिक्षा अब गरीब व मध्यवर्गीय परिवारों से दूर होती जा रही है।

JagranSun, 31 May 2020 08:11 PM (IST)
पंजाब.. धरना देने शिक्षामंत्री के घर पहुंची तो मिलने के लिए बुलाया

जागरण संवाददाता, संगरूर

प्राइवेट स्कूलों हर साल फीसों में बढ़ोतरी कर देते हैं। इससे शिक्षा अब गरीब व मध्यवर्गीय परिवारों से दूर होती जा रही है। इसी के विरोध में पिछले चार वर्ष से संघर्ष करती आ रही जालंधर निवासी 12वीं कक्षा की छात्रा नोबल ने रविवार को लोकसभा हलका संगरूर के सांसद व आम आदमी पार्टी के प्रधान सांसद भगवंत मान की रिहायश के समक्ष एक घंटा धरना लगाया। इसके बाद वह शिक्षामंत्री पंजाब विजयइंद्र सिगला निवास के समक्ष भी धरना लगाने पहुंची। लेकिन शिक्षामंत्री घर पर ही थे। उन्होंने धरने से पहले ही नोबल को मिलने के लिए बुलवा लिया और ज्ञापन ले लिया। छात्रा से बातचीत में शिक्षा मंत्री विजयइंद्र सिंगला ने कहा कि फीसों के मुद्दे पर हाईकोर्ट में कुछ समय बाद अगली पेशी है, उसके बाद स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। सरकार जल्द ही सुप्रीमकोर्ट में जा सकती है। शिक्षा को बेहतर व सस्ता बनाने, परिजनों की आर्थिक लूट को बंद करने के लिए सरकार पूरी गंभीरता से कार्य कर रही है।

सिगला ने नोबल के हौसले की तारीफ कर उसे भरोसा दिलाया कि उसकी मांगों संबंधी जल्द से जल्द सार्थक कदम उठाए जाएंगे।

नोबल ने बताया कि प्राइवेट स्कूल-कॉलेजों के माध्यम से शिक्षा माफिया तेजी से फैल रहा है। शिक्षा लगातार महंगी होती जा रही है, जिस कारण आम परिवार के बच्चों को अब उच्च शिक्षा से दिलवाने में असमर्थ हैं। सांसद भगवंत मान ने भी संसद में आज तक कोई आवाज नहीं उठाई। भगवंत मान को मांग पत्र के जरिए शिक्षा माफिया पर नकेल कसने की मांग कर चुकी हैं, लेकिन उन्होंने कोई रूचि नहीं दिखाई। इसी विरोध में सांसद भगवंत मान की बंद पड़ी कोठी के समक्ष धरना लगाया। उनसे संपर्क करने की पिछले चार दिन से कोशिश की गई पर उनसे बात नहीं हो पायी। नौंवी कक्षा से हीं संघर्ष कर रही नोबल

नोबल के पिता राजू सोनी ने बताया कि नोबल नौंवी कक्षा के समय से शिक्षा माफिया के खिलाफ संघर्ष कर रही है। उनकी दो बेटियां है। नोबल बड़ी बेटी है व छोटी बेटी प्राइमरी शिक्षा प्राप्त कर रही है। स्कूल में पढ़ते समय जब नोबल को अधिक कीमत पर स्कूल ने किताबें दी, तो नोबल ने इसका विरोध किया। साथ ही 80 दिन तक लगातार स्कूल के खिलाफ संघर्ष किया। उसी दिन के बाद से हीं वह इस बारे में लगातार संघर्ष कर रही है।

Edited By Jagran

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