सहायक जेल सुपरिटेंडेंट सिक्योरिटी हरसिमरन बल्ल राष्ट्रपति मेडल से सम्मानित

बुजुर्गों का कथन है कि ईमानदारी तथा लगन का सिद्धांत अपनाने वाले को हमेशा कामयाबी व सम्मान मिलता है।

JagranPublish: Tue, 25 Jan 2022 04:22 PM (IST)Updated: Tue, 25 Jan 2022 04:25 PM (IST)
सहायक जेल सुपरिटेंडेंट सिक्योरिटी हरसिमरन बल्ल राष्ट्रपति मेडल से सम्मानित

अरुण कुमार पुरी, रूपनगर: बुजुर्गों का कथन है कि ईमानदारी तथा लगन का सिद्धांत अपनाने वाले को हमेशा कामयाबी व सम्मान मिलता है। बुजुर्गों का उक्त कथन रूपनगर की जिला जेल में तैनात सहायक जेल सुपरिटेंडेंट सिक्योरिटी हरसिमरन सिंह बल्ल पर स्टीक साबित हुआ है। उन्हें सर्वोच्च राष्ट्रपति मेडल सम्मान से नवाजा गया है। बल्ल ने कहा कि 1992 से लेकर अभी तक की पुलिस सर्विस में उन्होंने जिस ईमानदारी व लगन से काम किया है यह उसी का परिणाम है। 11 अक्टूबर 1972 को अमृतसर में जन्मे हरसिमरन सिंह बल्ल के पिता भी पंजाब पुलिस के पीएपी विभाग में इंस्पेक्टर थे। उनकी प्राथमिक शिक्षा थर्ड तक चंडीगढ़ में हुई, जिसके बाद तीसरी कक्षा से लेकर 12 वीं तक पढ़ाई उन्होंने श्री दशमेश अकादमी आनंदपुर साहिब में की। उन्होंने कहा कि उनके पिता के सिद्धांतों को अपनाने के कारण 1992 के दौरान उन्हें पंजाब पुलिस में सीधे एएसआइ की नौकरी मिली। उन दिनों आतंकवाद का दौर था । पहली पोस्टिंग उनकी चमकौर साहिब में हुई । 1994 में जब वह कमांडो में थे, तो आतंकवाद के अंतिम दौर के तत्कालीन डीजी केपीएस गिल के दिशा निर्देशों पर कई आतंकवादियों का उन्होंने एनकाउंटर किया। 2007-08 में इंस्पेक्टर बने। 2011 में उनकी तैनाती चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर की गई, जहां वह डीएसपी बने तथा वर्ष 2019 तक वहीं तैनात रहे। 2019 के बाद डीजी जेल पीके सिन्हा ने गुरु नानक देव जी के 550 साल को समर्पित जेलों में सुधार व कैदियों को मुख्य धारा के साथ जोड़ने का अभियान शुरू किया गया, जिसमें उन्हें भी काम करने का मौका दिया गया। इस दौरान उनकी तैनाती बठिडा जेल में हुई। यहां डीजी जेल पीके सिन्हा के 13 सूत्री मिशन पर सफलता से काम किया, जिस पर उन्हें पुलिस डिस्क फिर सीएम डिस्क से नवाजा गया। पिता की सीख व अधिकारियों को मार्गदर्शन कम नहीं बल्न ने इन दिनों रूपनगर जेल में बतौर सहायक जेल सुपरिटेंडेंट सिक्योरिटी सेवाएं निभा रह रहे हैं। उनका कहना है कि उन्हें इस बात का गर्व है कि उन्हें पुलिस में रहते हुए सर्वोच्च राष्ट्रपति पुलिस मेडल मिलने जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसका श्रेय पिता से मिली ईमानदारी की सीख तथा अधिकारियों से मिले नेक मार्गदर्शन को जाता है। बकौल हरसिमरन सिंह बल्ल उनका विवाह वर्ष 1998 में हुआ। उनके दो पुत्र हैं जो उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद अपने दादा व पिता की तरह देश की सेवा करने की इच्छा रखते हैं। उन्होंने कहा कि अब वह जेल व अपराधियों पर पीएचडी करने की तैयारी कर रहे हैं।

Edited By Jagran

ਪੰਜਾਬੀ ਵਿਚ ਖ਼ਬਰਾਂ ਪੜ੍ਹਨ ਲਈ ਇੱਥੇ ਕਲਿੱਕ ਕਰੋ!

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.Accept