चुनावी बैठकों और रैलियों पर कोविड का साया, वर्चुअल रैलियां ट्रेंड में; कारोबारी हो रहे परेशान

कोविड के चलते शादियों का सीजन पिटने के बाद अब कारोबारियों के लिए चुनावी वर्चुअल रैलियां घाटे का सौदा साबित हो रही है। कारोबारियों का कहना है कि चुनावों के दौरान आर्डर भुगताने की कठिनाई होती थी लेकिन इस बार इससे उलट काम हो रहा है।

Vinay KumarPublish: Fri, 28 Jan 2022 09:11 AM (IST)Updated: Fri, 28 Jan 2022 09:11 AM (IST)
चुनावी बैठकों और रैलियों पर कोविड का साया, वर्चुअल रैलियां ट्रेंड में; कारोबारी हो रहे परेशान

मुनीश शर्मा, लुधियाना। कोविड के चलते शादियों का सीजन पिटने के बाद अब कारोबारियों के लिए चुनावी वर्चुअल रैलियां घाटे का सौदा साबित हो रही है। इसका सबसे ज्यादा इफेक्ट टैंट, डीजे, लाइट, साउंड, हलवाईयों पर पड़ा है। इस साल कोविड नियमों को देखते हुए ज्यादा गैदरिंग की अनुमति न मिलने से जहां जनवरी और फरवरी के शुभ मुहुर्त में रिस्पांस देखने को नहीं मिला, वहीं अब चुनावी सीजन में भी कारोबार फीका हो गया है। इसका मुख्य कारण चुनाव आयोग की ओर से भीड़ जमा न करने के आदेश दिए जाना और वर्चुअल रैलियों का ट्रेंड है। ऐसे में संपर्क अभियान में भी केवल डोर टू डोर प्रचार किया जा रहा है। ऐसे में इस कारोबार के लिए सबसे अधिक बुकिंग लाने वाले चुनाव इस बार फीके है। कारोबारियों का कहना है कि चुनावों के दौरान पंजाब में अधिक रैलियां और जनसंपर्क बैठकों के चलते आर्डर भुगताने की कठिनाई होती थी, लेकिन इस बार इससे उलट काम हो रहा है।

इस चुनाव में टैंट गायब

आल इंडिया टैंट एवं डैकोरेटर एसोसिएशन युवा विंग के महासचिव डिंपी मक्कड़ ने कहा कि हर चुनाव में सबसे ज्यादा भूमिका टैंट की रहती है, क्योंकि नुक्कड़ बैठकों से लेकर बड़ी रैलियों के लिए टैंट की आवश्यकता रहती है। लेकिन इस चुनाव टैंट चुनाव से गायब हैं। आज तक किसी चुनाव में ऐसे मंदे हालात नहीं देखे हैं। पंजाब टैंट डीलर्स वैल्फेयर एसोसिएशन के महासचिव शिव शंकर ने कहा कि हमारे लिए दोहरी मार है। चुनाव और शादियों के साथ साथ घरेलू समारोह और धार्मिक आयोजन बंद है। इससे जनवरी और फरवरी के लिए 50 प्रतिशत कैंसलेशन हो रही है। अब चुनावी सीजन में भी कोविड गाइडलाइन के चलते काम ठप है।

लाइट एवं साउंड कई महीनों से बंद

लुधियाना साउंड डीजे लाइट एसोसिएशन के चेयरमैन गुरमीत किट्टू कोहली ने कहा कि हमारे लिए यह समय सबसे बेहतर रहना था। जनवरी और फरवरी में शादियों के भी अच्छे शुभ मुहुर्त थे। इसके साथ ही चुनावी सीजन में भी डिमांड तेज रहती है। लेकिन पिछले दस सालों में यह सबसे कम रिस्पांस वाला साल है। चुनाव होने के बावजूद केवल दस प्रतिशत ही बुकिंग आ रही हैं, जोकि चिंता का विषय है।

हलवाईयों की मांग कम, पैकड़ का ट्रेंड

पंजाब हलवाई एसोसिएशन के प्रधान नरिंदर पाल सिंह ने कहा कि हलवाईयों की मांग बेहद कम हो गई है। इस समय न तो कैटरिंग को लेकर क्रेज है और न ही हलवाईयों के पास से सामान बिक रहा है। इसका मुख्य कारण भीड़ कम जुटाने की गाइडलाइन है। इसके साथ ही शादियों का सीजन भी रूक गया है। चुनावों ने भी इस बार रिस्पांस फीका कर दिया है। हर चुनाव में होने वाले व्यापार की उम्मीदें टूट गई हैं।

Edited By Vinay Kumar

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