लुधियाना दक्षिण की तरक्की में पूर्वाचल समाज ने दिया योगदान, नहीं मिली नुमाइंदगी

औद्योगिक शहर लुधियाना में वैसे तो छह विधानसभा क्षेत्र हैं लेकिन लुधियाना दक्षिण में मूल रूप से पूर्वांचल समाज के लोगों की बड़ी आबादी है। पंजाब की तरक्की में पूर्वांचल के लोगों की अहम भूमिका रही है जिन्होंने इस शहर के उद्योगों में अपने खून-पसीने से जान डाली है।

JagranPublish: Fri, 21 Jan 2022 01:55 AM (IST)Updated: Fri, 21 Jan 2022 01:55 AM (IST)
लुधियाना दक्षिण की तरक्की में पूर्वाचल समाज ने दिया योगदान, नहीं मिली नुमाइंदगी

भूपेंदर सिंह भाटिया, लुधियाना : औद्योगिक शहर लुधियाना में वैसे तो छह विधानसभा क्षेत्र हैं, लेकिन लुधियाना दक्षिण में मूल रूप से पूर्वांचल समाज के लोगों की बड़ी आबादी है। पंजाब की तरक्की में पूर्वांचल के लोगों की अहम भूमिका रही है, जिन्होंने इस शहर के उद्योगों में अपने खून-पसीने से जान डाली है। हालांकि इन सबके बावजूद इस विधानसभा क्षेत्र में रहने वाले लोगों को न तो मूलभूत सुविधाएं मिली और न ही उन्हें कभी राजनीतिक ग्राउंड में नुमाइंदगी। आज भी इस विधानसभा के लोग स्वच्छ पानी, स्तरीय सड़कें और सीवरेज जैसी सुविधा से वंचित हैं। सड़कों और गलियों में फैले सीवरेज के पानी और बीमारियों की आशंकाओं के बीच अपना जीवन यापन कर रहे हैं।

उनका मानना है कि पूर्वांचली लोगों को राजनीति में स्थान मिला होता या यहां से कोई विधायक चुना गया होता तो उन्हें इतनी समस्याएं नहीं झेलनी पड़ती। हालात यह है कि जहां एक ओर लुधियाना चकाचौंध की दुनिया में खोया है, वहीं दूसरी ओर लुधियाना दक्षिण के लोगों को चौथे दर्जे की सुविधाएं भी नहीं मिल पाती। हर मौसम में संक्रमण फैलना यहां आम बात है। जब कभी गेस्ट्रो या हैजा फैलता है तो प्रशासन की ओर से सफाई आदि करवाई जाती है, लेकिन उसके बाद उनकी फिर वही दुर्दाशा होती है।

हालांकि पूर्वांचल समाज के लोग भी इस बात को मानते हैं कि समाज में एकजुटता न होने के कारण ही उन्हें आज तक सम्मान नहीं मिल पाया है। 80 हजार से ज्यादा मतदाता होने के बावजूद वह राजनीतिक दलों के झांसे में आकर बंट जाते हैं और अपने अधिकारों तक वंचित रह जाते हैं। पार्षद तक की टिकट उनके समाज को नहीं मिल पाती है। खासकर लुधियाना दक्षिण में तो उन्हें राजनीति के लायक नहीं समझते हैं।

आश्वासन के अलावा कोई भी नेता समाज के लिए कुछ नहीं करता : लवकुश गौतम

इलाका निवासी लवकुश गौतम कहते हैं कि चुनाव के समय नेताजी आते हैं और उन्हें आश्वासन देकर चले जाते हैं। जीत के बाद कोई नहीं आता। शिकायत करो तो हाथ हिलाकर चले जाते हैं कि देख लेते हैं। इस बार ऐसा नहीं चलेगा। हम उम्मीदवार को सोच समझकर ही वोट देंगे। दूसरी ओर दीप कुमार कहते हैं कि यहां सीवरेज पानी सड़कों पर हमेशा बहता है। उसी के बीच जीवन बिताना पड़ता है। बीमारियों का डर बना रहता है। अब सम्मान के लिए एकजुटता जरूरी : चंद्रभान चौहन

पर्व डिप्टी सीएम सुखबीर बादल के राजनीतिक सलाहकार और पूर्वांचल समाज के नेता चंद्रभान चौहान कहते हैं कि हर राजनीतिक दल ने उनके साथ धोखा किया। विधायक की टिकट तो दूर, पार्षद की टिकट तक नहीं दी। इस बार शिअद सुप्रीमो बादल ने उन्हें राजनीतिक सलाहकार बनाया तो जरूर है, लेकिन उनके सुझाव को मान पूर्वांचल समाज को राजनीतिक ग्राउंड में प्रतिनिधित्व देते हैं, तभी उन्हें सम्मान मिल पाएगा। पूर्वांचल समाज को अपना हक और सम्मान पाने के लिए एकजुटता बनाना जरूरी है।

Edited By Jagran

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