एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट का प्रोजेक्ट अधर में

जालंधर में इंडस्ट्री के प्रदूषित पानी को ट्रीट करने के लिए फोकल प्वाइंट में एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण किया जाना था।

JagranPublish: Fri, 28 Jan 2022 08:17 PM (IST)Updated: Fri, 28 Jan 2022 08:17 PM (IST)
एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट का प्रोजेक्ट अधर में

कमल किशोर, जालंधर

जालंधर में इंडस्ट्री के प्रदूषित पानी को ट्रीट करने के लिए फोकल प्वाइंट में एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण किया जाना था। अभी हर साल 18 लाख लीटर प्रदूषित पानी ट्रीट करने के लिए लुधियाना भेजा जा रहा है। दो साल पहले सरकार ने फोकल प्वाइंट में 4600 वर्ग गज जगह भी मुहैया करवा दी थी, लेकिन सरकार ने प्लांट का निर्माण नहीं करवाया। इससे प्रोजेक्ट अधर में लटक गया है।

प्लांट का निर्माण न होने का कारण कुछ उद्यमी पालीटिकल एजेंडा बता रहे हैं। प्लांट का निर्माण होने से इंडस्ट्री का प्रदूषित पानी ट्रीट करके दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता था। वहीं इंडस्ट्री पर पड़ने वाला अतिरिक्त बोझ कम हो जाता। जालंधर में मात्र लेदर कांप्लेक्स में एक ट्रीटमेंट प्लांट है, जो केवल टेनरीज के लिए है। शहर की बाकी इंडस्ट्री अपना प्रदूषित पानी ट्रीट करने के लिए लुधियाना भेजती है, जिस पर हर माह 15 से 17 लाख रुपये खर्च होते हैं। प्लांट का निर्माण जालंधर एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट सोसायटी द्वारा करवाया जाना था। सोसायटी के सदस्यों ने कहा कि प्लांट के निर्माण को लेकर सरकार के नुमाइंदों से मिले व पर्यावरण अथारटी से हरी झंडी भी मिल गई थी, लेकिन प्लांट का निर्माण न होना समझ से परे है।

----- फैक्ट फाइल

- 280 यूनिट जालंधर में, जिससे निकलता है गंदा पानी

- 18 लाख लीटर प्रदूषित पानी हर साल निकला है

- 15 से 17 लाख रुपये का इंडस्ट्री पर अतिरिक्त बोझ

- 150 एमएलडी प्लांट फोकल प्वाइंट में बनना था

- 12 करोड़ रुपये से अधिक का आना था खर्च

------ पालिटिकल एजेंडा बन गया है ट्रीटमेंट प्लांट प्रोजेक्ट जालंधर एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट सोसायटी के प्रधान गुरशरण सिंह ने कहा कि सरकार ने प्लांट का निर्माण करने के लिए फोकल प्वाइंट में जगह भी मुहैया करवा दी थी, लेकिन निर्माण नहीं हुआ। प्लांट एक पालिटिकल एजेंडा बनकर रह गया है। प्लांट का निर्माण होने से जालंधर की इंडस्ट्री को फायदा होना था। इससे प्रदूषित पानी को लुधियाना नहीं भेजना पड़ता। यहां आधुनिक तकनीक वाले प्लांट का निर्माण किया जाना था, जिसमें पानी ट्रीट कर खेती में प्रयोग कर सकते थे।

---- कम हो जाता इंडस्ट्री पर पड़ने वाला अतिरिक्त बोझ

जालंधर इंडस्ट्रियल एस्टेट एक्सटेंशन वेलफेयर सोसायटी के प्रधान सूबा सिंह ने कहा कि सरकार द्वारा फोकल प्वाइंट में 4600 वर्ग गज जगह मुहैया करवाने के बावजूद प्लांट का निर्माण नहीं हुआ। प्लांट का निर्माण करने के लिए राजनीतिक नुमाइंदों से मिले, लेकिन काम आगे नहीं बढ़ पाया। प्लांट के निर्माण पर 12 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च आना था। इससे रोजाना गंदा पानी लुधियाना नहीं भेजना पड़ता। इंडस्ट्री पर पड़ने वाले अतिरिक्त बोझ भी कम हो जाता। ----

प्लांट का निर्माण जरूरी, उद्यमियों की मांग जायज

सोसायटी के कोषाध्यक्ष संजय गोयल ने कहा कि सरकार जिस मर्जी पार्टी की बने, इंडस्ट्री की बेहतरी के लिए काम होने चाहिए। नए फोकल प्वाइंट के साथ-साथ प्लांट का निर्माण होना चाहिए, ताकि इंडस्ट्री को फायदा मिल सके। कई इंडस्ट्री ने प्रदूषित पानी को एकत्रित करने के लिए ड्रम लगा रखे हैं। सरकार को इंडस्ट्री से रेवेन्यू मिलता है। ऐसे में उनका भी फर्ज है कि इंडस्ट्री की जरूरतों को पूरा करे।

------ करोड़ों का रेवेन्यू देती है इंडस्ट्री, फिर भी लापरवाही

सोसायटी के वाइस प्रेसिडेंट जसविदर सिंह ने कहा कि सरकार को करोड़ों रुपये का रेवेन्यू देने वाली इंडस्ट्री की बेहतरी के लिए कार्य न के बराबर किए गए हैं। हर वर्ष 18 लाख लीटर प्रदूषित पानी ट्रीट होने के लिए लुधियाना भेजा जा रहा है। प्लांट का निर्माण होने से इंडस्ट्री को फायदा होना था। 150 एमएलडी का प्लांट लगना था। ट्रीट पानी को प्रयोग में ला सकते थे। इतने फायदे के बावजूद इस तरफ गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है।

Edited By Jagran

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