नगर निगम को वेस्ट मैनेजमेंट कंपनी जिदल को चुकाने होंगे 204 करोड़ रुपये

शहर में वेस्ट मैनेजमेंट के लिए जिदल कंपनी से नगर निगम का करार बीच में टूटने के मामले में आर्बिट्रेटर ने नगर निगम पर 204 करोड़ रुपये अवार्ड तय किया है। सीधी भाषा में इसका मतलब यह है कि जिदल कंपनी का काम बीच में ही रोकने के लिए नगर निगम को अब जुर्माने के रूप में जिदल कंपनी को 204 करोड़ रुपये चुकाने होंगे।

JagranPublish: Thu, 20 Jan 2022 01:56 AM (IST)Updated: Thu, 20 Jan 2022 01:56 AM (IST)
नगर निगम को वेस्ट मैनेजमेंट कंपनी जिदल को चुकाने होंगे 204 करोड़ रुपये

जागरण संवाददाता, जालंधर : शहर में वेस्ट मैनेजमेंट के लिए जिदल कंपनी से नगर निगम का करार बीच में टूटने के मामले में आर्बिट्रेटर ने नगर निगम पर 204 करोड़ रुपये अवार्ड तय किया है। सीधी भाषा में इसका मतलब यह है कि जिदल कंपनी का काम बीच में ही रोकने के लिए नगर निगम को अब जुर्माने के रूप में जिदल कंपनी को 204 करोड़ रुपये चुकाने होंगे। नगर निगम के लिए यह एक बड़ा झटका है, क्योंकि इसकी आर्थिक स्थिति पहले ही खराब है। हालांकि नगर निगम इसे कोर्ट में चैलेंज कर सकता है।

नगर निगम ने शहर में घरों से कूड़ा उठाने, इसकी प्रोसेसिग के लिए जमशेर में प्लांट लगाने और ट्रांसपोर्टेशन के लिए जिदल कंपनी से करार किया था। साल 2016 में राजनीतिक कारणों से जमशेर में लगने वाले प्लांट पर रोक लगा दी गई थी। इस वजह से नगर निगम ने जिदल कंपनी के साथ प्रोजेक्ट कैंसिल कर दिया। जिदल कंपनी ने हर घर से कूड़ा इकट्ठा करना था, लेकिन इस मामले में भी नगर निगम ने कंपनी को पूरा काम नहीं दिया था। सिर्फ कामर्शियल यूनिट से ही जिदल कंपनी कूड़ा इकट्ठा कर रही थी। इसे लेकर जब यूनियनों के साथ में टकराव बढ़ा तो नगर निगम ने पूरा प्रोजेक्ट रद कर दिया। इसके विरोध में जिदल कंपनी ने कोर्ट में नगर निगम के खिलाफ 962 करोड़ रुपये हर्जाने का केस कर दिया था। इस मामले में नगर निगम ने भी कंपनी पर 1783 करोड़ रुपये का केस किया हुआ है। यह मामला आर्बिट्रेशन में चला गया था और सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज इसकी सुनवाई कर रहे थे। बुधवार को इस पर आर्बिट्रेटर ने अपना फैसला सुनाया है और नगर निगम को आदेश दिया है कि वह जिदल कंपनी को हर्जाने के तौर पर 204 करोड़ रुपये का भुगतान करे। जिदल कंपनी को उठाना पड़ा था भारी नुकसान

यह प्रोजेक्ट रद होने से जिदल कंपनी को काफी नुकसान हुआ है। जिदल कंपनी का दावा था कि उन्होंने प्रोजेक्ट के लिए बड़े पैमाने पर फाइनेंशियल इंतजाम किया था। सर्वे करवाए गए और मशीनरी खरीदी गई, लेकिन प्रोजेक्ट रद करने से कंपनी को नुकसान हुआ। यहां तक कि कंपनी को हर घर से कूड़ा उठाने की मंजूरी भी नहीं मिल पाई थी। कंपनी अपने स्टाफ को वेतन तो देती रहेगी, लेकिन काम कुछ नहीं हुआ। वहीं नगर निगम का दावा है कि कंपनी के काम बीच में छोड़ने से शहर में सफाई व्यवस्था गड़बड़ा गई और वेस्ट मैनेजमेंट ठीक न होने से पर्यावरण को खतरा बढ़ा है। परगट सिंह ने रुकवाया था प्रोजेक्ट

नगर निगम ने जमशेर डेरी कांप्लेक्स के पास कूड़े से बिजली पैदा करने का कारखाना लगाना था। इसके लिए पूरे दोआबा का कूड़ा जमशेर में पहुंचाया जाना था। साल 2016 के आरंभ से गांव जमशेर और आसपास के इलाके के लोगों ने विरोध शुरू कर दिया। तब परगट सिंह अकाली दल से विधायक थे। उन्होंने मामले के राजनीति रंगत लेने पर खुद ही इस प्रोजेक्ट का विरोध शुरू कर दिया और अपनी ही पार्टी के खिलाफ बयानबाजी शुरू कर दी थी। विधानसभा चुनाव 2017 से पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने खुद मौके पर पहुंचकर इस प्रोजेक्ट को रद करने की घोषणा की थी। हालांकि बाद में परगट सिंह कांग्रेस में शामिल हो गए थे।

Edited By Jagran

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