Punjab Election 2022: मोहिंदर केपी की आहट से दोआबा कांग्रेस में घबराहट, परगट सहित कई प्रत्याशियों की नींद उड़ी

Punjab Election 2022 कांग्रेस की टिकट न मिलने से नाराज मोहिंदर सिंह केपी अब आजाद चुनाव लड़ सकते हैं। केपी जिस भी सीट से बतौर आजाद उम्मीदवार चुनाव लड़ेंगे वहां कांग्रेस प्रत्याशी के लिए जीतना बेहद मुश्किल हो जाएगा।

Pankaj DwivediPublish: Fri, 21 Jan 2022 11:29 AM (IST)Updated: Fri, 21 Jan 2022 11:29 AM (IST)
Punjab Election 2022: मोहिंदर केपी की आहट से दोआबा कांग्रेस में घबराहट, परगट सहित कई प्रत्याशियों की नींद उड़ी

मनुपाल शर्मा, जालंधर। पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष मोहिंदर सिंह केपी को टिकट न देकर कांग्रेस ने कम से कम दोआबा क्षेत्र के कांग्रेस प्रत्याशियों की नींद तो जरूर उड़ा डाली है। टिकट न मिलने से खफा हुए केपी अब आजाद चुनाव लड़ने का लगभग मन बना चुके हैं। यह भी तय है कि केपी जिस भी सीट से बतौर आजाद उम्मीदवार चुनाव लड़ेंगे, वहां कांग्रेस प्रत्याशी के लिए जीतना बेहद मुश्किल हो जाएगा। अब केपी किस सीट को चुनाव लड़ने के लिए फाइनल करते हैं, फिलहाल यह सौ फीसद तय नहीं हो पाया है। कांग्रेस के प्रत्याशी यही कामना कर रहे हैं कि कम से कम केपी उनके हलके की तरफ रुख न करें।

खास बात यह भी है कि कांग्रेस के कई दिग्गज अब केपी के कंधे पर बंदूक रखकर अपना पुराना हिसाब चुकता करने की कोशिश कर रहे हैं। यही वजह है कि केपी के बतौर आजाद उम्मीदवार लड़ने के बावजूद भी कांग्रेस पार्टी के भीतर से ही समर्थन मिल सकता है। अभी तक अटकलें यह लग रही है कि केपी विधानसभा क्षेत्र कैंट से बतौर आजाद उम्मीदवार ताल ठोक सकते हैं। यहां से शिक्षा एवं खेल मंत्री परगट सिंह मौजूदा विधायक हैं और कांग्रेस की टिकट पर तीसरी बार मैदान में हैं। 

मोहिंदर सिंह केपी को चुनावी रण में कांग्रेस के ही एक ऐसे दिग्गज का भी समर्थन प्राप्त है, जो केपी के लिए दोआबा की किसी भी सीट से चुनाव लड़ने के लिए अपना पूर्ण समर्थन देने की घोषणा कर चुका है। हालांकि इस दिग्गज का कांग्रेस के ही कुछ विधायकों की तरफ से पिछले दिनों विरोध किया गया। उसके खिलाफ कांग्रेस हाईकमान तक को पत्र लिखा गया। अटकलें यह भी लग रही है कि इस दिग्गज की राह में रोड़े अटकाने वाले भी केपी के जरिए निपटाए जा सकते हैं। वजह साफ है कि मौजूदा राजनीतिक समीकरणों के मद्देनजर किसी भी सीट के ऊपर हार-जीत में कोई बहुत बड़ा अंतर नहीं होगा। ऐसे मुकाबले में एक-एक वोट भी मायने रखेगी। केपी दलित बाहुल्य दोआबा की किसी भी सीट से इतने वोट तो जुटाने में कामयाब हो ही जाएंगे, जो कांग्रेस के प्रत्याशी को जीत से दूर कर सकती हैं।

Edited By Pankaj Dwivedi

ਪੰਜਾਬੀ ਵਿਚ ਖ਼ਬਰਾਂ ਪੜ੍ਹਨ ਲਈ ਇੱਥੇ ਕਲਿੱਕ ਕਰੋ!

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.Accept