जालंधर के नकोदर में कैप्टन ने उतारा हाकी का विश्व विजेता कप्तान, कांग्रेस को टर्बनेटर का इंतजार

Punjab Election 2022 नकोदर सीट पर अब कांग्रेस के उम्मीदवार का इंतजार रह गया है। कांग्रेस यहां से अकाली दल के मौजूदा विधायक गुरप्रताप सिंह वडाला के खिलाफ पूर्व क्रिकेटर टर्बिनेटर हरभजन सिंह को मैदान में उतारना चाहती है।

Publish: Mon, 24 Jan 2022 06:01 AM (IST)Updated: Mon, 24 Jan 2022 10:13 AM (IST)
जालंधर के नकोदर में कैप्टन ने उतारा हाकी का विश्व विजेता कप्तान, कांग्रेस को टर्बनेटर का इंतजार

जगजीत सिंह सुशांत, जालंधर। भारत को विश्व हाकी कप जिताने वाली टीम के कप्तान रहे अजीत पाल सिंह अब चुनाव मैदान पर बिना स्टिक के गोल करते नजर आएंगे। पद्मश्री व अर्जुन अवार्ड से सम्मानित अजीत पाल सिंह को पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने नकोदर सीट से पंजाब लोक कांग्रेस का उम्मीदवार बनाया है। कैप्टन की सूची में जालंधर से सिर्फ एक सीट पर ही घोषणा की गई है। नकोदर सीट पर अब कांग्रेस के उम्मीदवार का इंतजार रह गया है। कांग्रेस यहां से अकाली दल के मौजूदा विधायक गुरप्रताप सिंह वडाला के खिलाफ पूर्व क्रिकेटर टर्बिनेटर हरभजन सिंह को मैदान में उतारना चाहती है।

फिलहाल हरभजन सिंह ही ऐसा नाम है जो नकोदर में कांग्रेस का बेड़ा पार लगा सकता है। नकोदर से भज्जी के नाम की चर्चा इसलिए भी है क्योंकि विधानसभा चुनाव की घोषणा से पहले ही हरभजन सिंह ने क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा की है। इसके बाद पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के ट्विटर हैंडल पर भी उनकी फोटो सिद्धू के साथ अपलोड हुई। अगर हरभजन सिंह नकोदर सीट पर आते हैं तो दो बड़े खिलाड़ियों के बीच चुनावी जंग देखने को मिल सकती है। कैंट हलके में दो हाकी ओलिंपियन कांग्रेस के परगट सिंह और आप के सुरिंदर सिंह सोढी पहले ही मैदान में है। अब नकोदर सीट भी हाट बनती जा रही है। फिलहाल हरभजन सिंह कोरोना संक्रमित है और घर पर ही आइसालेट है लेकिन आने वाले दिनों में उनकी टिकट का एलान हो सकता है।

74 साल की उम्र में राजनीति के मैदान में, बीएसएफ में भी रहे

तीन ओलिंपिक, तीन व‌र्ल्ड कप व दो एशियन गेम्स में हाकी स्टिक का जादू दिखा चुके अजीत पाल सिंह का जन्म 1 अप्रैल 1947 को जालंधर के संसारपुर गाव में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा कैंटोनमेंट बोर्ड हायर सेकेंडरी स्कूल में हुई थी। इसके बाद वह लायलपुर खालसा कालेज में पढ़े और हाकी खेले। बाद में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में भी रहे। वह मैक्सिको सिटी में वर्ष 1968 में हुए ओलिंपिक में कांस्य जीतने वाली टीम के सदस्य रहे। उसके बाद म्यूनिख ओलिंपिक में भी कास्य पदक विजेता टीम में वह थे। उनकी कप्तानी में टीम ने वर्ष 1975 में हाकी व‌र्ल्ड कप जीता था। उससे पहले विश्व कप में ही 1971 में बार्सिलोना और फिर 1973 में एम्स्टर्डम में टीम ने क्रमश: कास्य और रजत पदक जीता था। अजीत पाल को वर्ष 1992 में पद्मश्री से अलंकृत किया जा चुका है।

इसलिए आए राजनीति में

अजीत पाल सिंह ने कहा कि कुछ अर्सा पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह ने उनके साथ चुनाव लड़ने के संबंध में बातचीत की थी और उन्होंने इसकी मौखिक स्वीकृति दे दी थी। इस बार वह चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि एक साधारण घर से निकलकर संघर्ष करते हुए ही उन्होंने यह सब कुछ पाया है। अब चुनाव लड़ने का मौका मिला है तो वह यहां भी संघर्ष करेंगे। उन्होंने कहा कि लोगों को अब परंपरागत राजनीति के बजाय साफ-सुथरी छवि वाले उम्मीदवार की तलाश है। संसारपुर, जालंधर और नकोदर तो उनका अपना इलाका है। अगर लोगों का सहयोग मिला तो वह जीत भी हासिल करेंगे।

इधर केपी का फोकस आदमपुर पर, कांग्रेस हो या भाजपा

आदमपुर में अकाली दल के मौजूदा विधायक पवन टीनू के मुकाबले कांग्रेस ने सुखविंदर सिंह कोटली को मैदान में उतारा है लेकिन जब तक यहां से भाजपा गठबंधन का उम्मीदवार फाइनल नहीं होगा तब तक चुनाव का मैदान नहीं सजेगा। भाजपा यहां से ऐसा चेहरा चाहती है जो मजबूती से टक्कर दे सके। इसके लिए भाजपा ने कांग्रेस के बड़े चेहरे मोहिंदर सिंह केपी पर भी फोकस किया है। केपी ने पिछला चुनाव आदमपुर सीट से ही कांग्रेस की टिकट पर लड़ा था लेकिन इस बार कांग्रेस ने टिकट काट दी है। केपी अभी भी कांग्रेस में ही हैं और आदमपुर की सीट को रिव्यू करने की मांग कर चुके हैं। वह फगवाड़ा से भी कांग्रेस की टिकट चाहते हैं लेकिन पार्टी ने फगवाड़ा के मौजूदा विधायक की सीट काटने का मन नहीं बनाया।

केपी की भाजपा से भी बात चलती रही है। वह भाजपा से जालंधर वेस्ट की सीट चाहते थे लेकिन ऐसा नहीं हो पाया है। अब केपी की नजर आदमपुर और फगवाड़ा पर टिकी हुई है। इसके लिए पार्टी चाहे कांग्रेस हो या भाजपा इससे फर्क नहीं पड़ेगा। भाजपा ने अभी दोनों ही सीटों पर उम्मीदवार घोषित करने हैं। आदमपुर में डेरा सचखंड बल्ला की प्रभाव में आने वाली वोटों की बड़ी गिनती है। केपी इसके सहारे ही मैदान में उतरना चाहते हैं।

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