Famous Temples Hoshiarpur: पंजाब में सबसे ऊंचाई पर स्थित है प्रसिद्ध गगन जी का टिल्ला शिव मंदिर, कैलास पर्वत का कराता है आभास

Famous Temples of Punjab होशियारपुर के गांव सहोड़ा स्थित गगनजी का टिल्ला प्रसिद्ध एवं ऐतिहासिक शिव मंदिर है। यह पंजाब में सबसे ऊंचाई पर स्थापित तीर्थ स्थान है। गगनचुंबी मंदिर तक पहुंचने के लिए 766 भव्य सीढ़ियों को चढ़ना पड़ता है। सावन में यहां मेले सा माहौल रहता है।

Pankaj DwivediPublish: Fri, 24 Jun 2022 05:07 PM (IST)Updated: Fri, 24 Jun 2022 05:07 PM (IST)
Famous Temples Hoshiarpur: पंजाब में सबसे ऊंचाई पर स्थित है प्रसिद्ध गगन जी का टिल्ला शिव मंदिर, कैलास पर्वत का कराता है आभास

सरोज बाला, दातारपुर (होशियारपुर)। शिवालिक पहाड़ियों में गांव सहोड़ा स्थित गगनजी का टिल्ला नामक प्रसिद्ध एवं ऐतिहासिक शिव मंदिर पंजाब में सबसे ऊंचाई पर स्थापित तीर्थ स्थान है। लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र यह मंदिर दसूहा से 15 किलोमीटर, हाजीपुर से 6 किलोमीटर तथा दातारपुर से 7 किलोमीटर की दूरी पर पहाड़ की चोटी पर शोभायमान है। गगनचुंबी मंदिर तक पहुंचने के लिए 766 भव्य सीढ़ियों को चढ़ना पड़ता है। यात्रा मार्ग में हर तरफ पेड़ पौधे तथा विभिन्न वनस्पतियां इसकी शोभा बढ़ाती हैं।

आधी सीढ़ियां चढ़ते चढ़ते दाईं तरफ 40 फीट ऊंचीर शिवजी की विशाल तथा दिव्य मूर्ति है। इसका निर्माण दसूहा के प्रसिद्ध समाजसेवी, दानवीर एवं उद्योगपति मुकेश रंजन ने करवाया है। सीढ़ियां समाप्त होते ही अलौकिक एवं मनमोहक नजारा सामने होता है। एक ओर शिवालिक की हरी भरी वादियां हैं तो उत्तर दिशा में धौलाधार की बर्फ से ढकी हुई पहाड़ियां। दक्षिण में लहलहाता पंजाब का हरा भरा क्षेत्र।

मंदिर मार्ग पर स्थापित भगवान शिव की विशाल मूर्ति।

शिवरात्रि पर जुटते हैं दो लाख श्रद्धालु

आश्रम में पहुंच कर भक्तों को कैलाश पर्वत के दर्शन होने जैसा अनुभव होता है। शिवरात्रि को यहां लगने वाले मेले में दो लाख से ज्यादा श्रद्धालु भगवान भोले का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं। सावन महीने यहां रोजाना हजारों लोग अपनी श्रद्धा का इजहार करते हैं। सावन में दसूहा ,दातारपुर ,हाजीपुर तथा मुकेरियां तथा अन्य शहरों से निःशुल्क बसों में प्रातः तीन बजे से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शिवपूजन करते हैं। शिवरात्रि को चार पहर की पूजा और दूसरे दिन विशाल भंडारा यहां का मुख्य पर्व है। हरसमय यहां बम बम भोले और कैलाशपति के जयकारे माहोल को पावन और शिवमय बनाते हैं। 

मंदिर को जाती सीढ़ियां और स्थापित शिवलिंग।

पांडवों ने की थी शिवालय की स्थापना

भगवान शिव के परमभक्त मुकेश रंजन ने बताया कि अज्ञातवास के समय विराट नगरी दसूहा में रहते हुए पांचों पांडवों ने यहां द्रोपदी सहित आकर शिवालय की स्थापना की थी। वे यहां शिवार्चन करते थे। मुकेश रंजन, महंत शिवगिरि तथा कमेटी प्रधान गुरदीप पठानिया और संजय रंजन ने बताया की यहां हररोज हजारों लोग शिव वंदन करके अपनी मनोकामना पूरी करते हैं। मंदिर की व्यवस्था महंत शिवगिरि तथा प्रबंधक समिति करती है। यहां सावन महीने में हर समय उत्सव का माहौल बना रहता है।

Edited By Pankaj Dwivedi

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