विशेष मुलाकात में भगवंत मान ने की खुलकर बात, बताया पंजाब को लेकर क्या है आप की रणनीति

आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भगवंत मान ने दैनिक जागरण से खुलकर बात कई। भगवंत मान ने विरोधियों पर तंज कसा तो आप की चुनावी रणनीति के बारे में बताया। बताया कि आप के पास क्या एजेंडा है।

Kamlesh BhattPublish: Tue, 18 Jan 2022 10:38 AM (IST)Updated: Wed, 19 Jan 2022 07:33 AM (IST)
विशेष मुलाकात में भगवंत मान ने की खुलकर बात, बताया पंजाब को लेकर क्या है आप की रणनीति

जालंधर [मनुपाल शर्मा]। पंजाब विधानसभा चुनाव के मुहाने पर खड़ा है। पंजाब की परंपरागत राजनीतिक पार्टियों के साथ ही आम आदमी पार्टी (आप) भी चुनाव मैदान में डटी हुई है। आप दिल्ली की केजरीवाल सरकार का माडल दिखाकर पंजाब में वोट मांग रही है। पंजाब को लेकर आप की विकास नीतियां क्या होंगी, किसानों के लिए किस सोच को लेकर पार्टी आगे बढ़ेगी, मुफ्त की घोषणाओं को लेकर पार्टी क्या सोचती है और धर्म व राजनीति को लेकर किस सोच के साथ आप आगे बढ़ेगी, इसे लेकर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद भगवंत मान की दैनिक जागरण के संवाददाता हुई बातचीत के मुख्य अंश...

आम आदमी पार्टी दिल्ली माडल की बात करती है, लेकिन चुनाव में आप का पंजाब माडल क्या है?

इस समय पंजाब खटारा गाड़ी बना हुआ है। पंजाब में आप की सरकार बनने पर शिक्षा के स्तर को ऊपर उठाना, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार करना, बेरोजगारी दूर करना, कचहरी एवं सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार को दूर करना प्राथमिकता होगी।

कर्ज में डूबे पंजाब का विकास कैसे संभव है?

पंजाब में इस समय रेत माफिया, शराब माफिया, मंडी माफिया, टेंडर माफिया और यहां तक की फूस माफिया काम कर रहा है। इन सभी पर रोक लगेगी। पंजाब का जो पैसा माफिया लूट रहा है उसे पंजाब के विकास पर लगाया जाएगा। पंजाब से भ्रष्टाचार खत्म होगा। युवाओं का ब्रेन ड्रेन रोका जाएगा और पंजाब की किसानी को जिंदा किया जाएगा।

पंजाब के किसान आत्महत्याएं कर रहे हैं, किसानी को लेकर आपकी क्या योजना है?

कोआपरेटिव मुहिम को पंजाब में मजबूत बनाए जाने की बड़ी जरूरत है। पंजाब में जरूरत के मुकाबले 70 प्रतिशत ज्यादा ट्रैक्टर हैं। कोआपरेटिव मुहिम मजबूत होगी तो किसानों के खर्च में कमी आएगी। इसके लिए पंजाब को विभिन्न जोन में बांटकर क्षेत्र आधारित फसलों के उत्पाद को प्रोत्साहित किया जाएगा। परंपरागत कृषि चक्र से किसानों को निकालने के लिए योजनाएं लागू की जाएंगी। विविधिकरण पर जोर दिया जाएगा।

कृषि में इन सुधारों के लिए क्या आप कानून लाएंगे?

कानून तो बने हुए हैं, जरूरत पड़ी तो हम उनमें संशोधन कर सकते हैं।

लेकिन केंद्र सरकार भी तो किसानों की बेहतरी के लिए कानून लाई थी, फिर उनमें संशोधन करने जा रहा थी, उसका आपने विरोध किया?

इसे ऐसे समझें कि उन कानूनों को निजी खरीदारों को सरकारी मंडियों के बाद निजी मंडी लगाने की छूट मिल जाती। पहले तो वह लोग एमएसपी से अधिक दाम पर फसल खरीद लेते, लेकिन जब इससे मंडी सिस्टम या आढ़ती खत्म हो जाते तो निजी खरीदार फिर अपनी मर्जी के दाम पर फसल खरीदते, हमारा तो मंडी सिस्टम ही बर्बाद हो जाता। अगर किसी निजी खरीदार को फसल खरीदनी है तो वह मंडी में एमएसपी पर खरीद ले, उनके लिए अलग मंडी बनाने की जरूरत ही क्यों है।

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पंजाब में एक बार फिर बेअदबी की घटनाएं हुई हैं, आप इसे कैसे देखते हैं?

पंजाब के लोग आतंकवाद का दौर दोबारा नहीं देखना चाहते। पंजाब में मजबूत भाईचारक सांझ है और कई हिंदू घरों में एक लड़का अब भी पगड़ी बांधता है। इस हिंदू-सिख एकता को कोई नहीं तोड़ सकता। यहां के लोग बेटियों की इज्जत बचाने को अपनी जान दे देते हैं। पंजाबी सरबत का भला मांगते हैं, लेकिन धक्का भी नहीं होने देते। यह सबकुछ कमजोर सरकारों के कारण हो रहा है। धर्म को चलाना धार्मिक लोगों का काम है और राजनीति को चलाना राजनीतिक लोगों का काम है। प्रकाश सिंह बादल ने इसके विपरीत काम किया। धर्म और राजनीति को आपस में मिला दिया।

पंजाब सीमांत राज्य है और यहां की चुनौतियां अलग हैं, किसान आंदोलन से जो शुरू हुआ वह अब कई जगह अराजकता पैदा करता है। कई विघटनकारी तत्व भी इसका फायदा उठाने लगे हैं। क्या यह पंजाब के लिए खतरा नहीं और यह सब कैसे रुकेगा?

पंजाब को मजबूत, स्थिर एवं ईमानदार सरकार ही विकास के रास्ते पर ले जा सकती है। ऐसी ही सरकार पंजाब को सांप्रदायिक ताकतों और बाहरी खतरों से बचा सकती है। इस समय तो पंजाब के गृह मंत्री पंजाब को लावारिस छोड़ कर सिद्धू के साथ ही सवाल - जवाबों में फंसे हुए हैं। गृह मंत्री किसी पुल पर एक पुलिस वाले को केवल इस कारण सस्पेंड कर देता है क्योंकि उसकी वर्दी के साथ जूते मेल नहीं खाते। क्या यह गृह मंत्री का काम है? सुरक्षा को लेकर जो काम उसे करने चाहिए वह होते नहीं।

पिछली बार हवा होने के बावजूद सरकार बनाने से आप कैसे चूक गई? आप के नेता पार्टी क्यों छोड़ गए?

पंजाब में आप नई पार्टी थी और कुछ गलतियां जरूर हुई होंगी। जिस वजह से सरकार नहीं बना पाए लेकिन ऐसी गलतियां इस बार नहीं दोहराएंगे और अवश्य सरकार बनाएंगे। आम आदमी पार्टी ने तो साधारण लोगों को विधायक बनाया, ताकि आम लोगों के काम किए जा सकें। एक साधारण टैक्सी चालक को विधायक बनाया तो वह कुलतार सिंह सधवां निकला, एक शिक्षक को विधायक बनाया तो वह मास्टर बलदेव सिंह निकला, एक राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले को विधायक बनाया तो वह सुखपाल खैहरा निकला, एक पूर्व ब्यूरोक्रेट को विधायक बनाया तो वह नाजर सिंह मानशाहिया निकला और लोगों को सरकार बनाने की सीख देने वाले एक अंग्रेजी अखबार के संपादक को विधायक बनाया तो वह कंवर संधू निकला, लेकिन ये ऐसे थे जो पार्टी को जरिया बनाकर कुछ पाना चाहते थे। आम आदमी पार्टी की नीतियां ही ऐसी नहीं है। इस वजह से उन्हें पार्टी छोड़कर जाना पड़ा।

आप का मंडियों में राजनीतिक लोगों की तैनाती को लेकर क्या कहना है, क्या यह उचित हैं?क्या आप इस परंपरा को बदलेंगे?

बिल्कुल। इस परंपरा को बदलेंगे। मंडियों में राजनीतिक लोगों की तैनाती नहीं होगी। किसानों की ही नियुक्ति होगी जो कि किसानों की समस्याओं को समझते हैं। हम मंडियों का राजनीतिकरण नहीं होने देंगे।

पंजाब का कल्चर दिशाहीन नजर क्यों आ रहा है?

इसमें कोई शक नहीं है कि पंजाब के कल्चर का क उतर चुका है और मात्र लचर ही बाकी बचा है। सभ्याचार किसी भी समाज का आइना होता है। आप की सरकार बनने पर कलाकारों, गीतकारों और गायकों को एक मंच पर लाकर यह बताने की कोशिश की जाएगी कि गानों में नजर आने वाले पंजाब के बजाय असल पंजाब नजर आना चाहिए।

अन्य पार्टियों की तरह आप भी मुफ्त वाली घोषणाएं कर रही है, कर्ज में डूबे पंजाब में इन्हें से कैसे सिरे चढ़ाएंगे?

यह मुफ्तखोरी नहीं बल्कि रियायतें हैं, सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा मसला है। दिल्ली में भी ऐसा ही हो रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य एवं भ्रष्टाचार रहित कार्यप्रणाली आप सरकार की पहचान है। सामाजिक सुरक्षा तो दुनिया के बहुत सारे देशों में दी जाती है, हम भी देंगे। माफिया की लूट खत्म कर यह रियायतें दी जाएंगी।

बेबाक टिप्पणी

नरेन्द्र मोदी : भारी बहुमत से प्रधानमंत्री बने, लेकिन उनके अलावा कोई और मंत्री नजर नहीं आता।

अरविंद केजरीवाल: देश के बारे में सोचने वाला इंसान।

कैप्टन अमरिंदर सिंह: एक ऐसा राजा जो कभी महल से बाहर आकर प्रजा से नहीं मिला।

प्रकाश सिंह बादल: कद्दावर राजनीतिज्ञ हैं, लेकिन पुत्रमोह में फंस गए।

सुखबीर बादल : अपनी ही कही बात को दूसरे ही दिन भूल जाते हैं।

नवजोत सिंह सिद्धू: ईमानदार नेता हैं, लेकिन कभी-कभी जरूरत से ज्यादा बोल देते हैं।

भगवंत मान: एक आम आदमी।

Edited By Kamlesh Bhatt

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