श्री ब्राह्माण सभा गुरदासपुर ने मक्रर संक्राति पर हवन करवाया

श्री ब्राह्माण सभा गुरदासपुर द्वारा अध्यक्ष यशपाल कौशल की अध्यक्षता में मक्रर संक्राति के उपलक्ष्य में ब्राह्मण भवन में हवन यज्ञ का आयोजन किया गया

JagranPublish: Sat, 15 Jan 2022 06:05 PM (IST)Updated: Sun, 16 Jan 2022 12:14 AM (IST)
श्री ब्राह्माण सभा गुरदासपुर ने मक्रर संक्राति पर हवन करवाया

संवाद सहयोगी, गुरदासपुर

श्री ब्राह्माण सभा गुरदासपुर द्वारा अध्यक्ष यशपाल कौशल की अध्यक्षता में मक्रर संक्राति के उपलक्ष्य में ब्राहमण भवन में हवन यज्ञ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर 6वें राशन वितरण समारोह दौरान 11 परिवारों को राशन वितरित किया गया। कमलेश कुमारी ने अपनी तरफ से 11 जरूरतमंदों को गर्म कंबल भी वितरित किए गए।

अध्यक्ष यशपाल कौशल व महासचिव अरूण शर्मा ने उपस्थिति को मक्रर संक्राति पर बधाई दी और उन्होंने बताया कि इस दिन सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण की तरफ अपनी दिशा बदलता है, जिससे सर्दी से राहत मिलती है और आगामी छ: माह सूर्य उत्तरायण दिशा में ही रहेगा।

उन्होंने कहा कि भविष्य में ब्राहमण सभा द्वारा जरूरतमंद परिवारों के लिए अन्य भी समाज भलाई के प्रोजैक्ट शुरू किए जाएंगे। कमलेश कुमारी ने सभा के सदस्यों को आश्वासन दिया कि भविष्य में भी यथासंभव सहयोग दिया जाएगा। इस अवसर पर मित्रा वासु कोषाध्यक्ष, मुकेश शर्मा संगठन मंत्री, मदन लाल जोशी, शाम लाल शर्मा, ब्रहम पाल शर्मा, मेजर यशपाल शर्मा, मनोज रैणा, अनुज शर्मा, बद्री नाथ, रूप लाल जोशी, अशोक शर्मा आदि भी उपस्थित थे। इस अवसर पर सभा द्वारा चाय पकौड़ों का लंगर भी आयोजित किया गया। मकर संक्रांति के दान, ध्यान और स्नान का बहुत महत्व : डीआर शर्मा

सुच्चे मोती ग्रुप की बैठक शिवभक्त एडवोकेट डीआर शर्मा की अध्यक्षता में हुई। इस दौरान शर्मा ने बताया कि मकर संक्रांति पर्व का मुख्यत मतलब होता है कि पृथ्वी के देव सूर्य एक माह बाद अपना स्थान परिवर्तन कर दूसरी राशि में जाते हैं, जिसे संक्रांति कहा जाता है। जब वे अपना चक्र पूरा कर राशि मकर में जाते हैं तो उसे मकर संक्रांति कहा जाता है। इस दिन धरती का गोला‌र्द्ध सूर्यदेव की तरफ मुड़ जाता है। शर्मा ने बताया कि इस दिन भीष्म पितामह ने अपने प्राण त्यागे थे। इस दिन दान, ध्यान व स्नान की बहुत महत्ता है या तिलों का भोग व दान करना उचित माना जाता है। शरद ऋतु समापन की ओर बसंत ऋतु आगमन होता है। भगवान विष्णु की असुरों पर विजय की खुशी में भी यह अवसर मनाया जाता है। दक्षिण में इस दिन को पोंगल, गुजरात में उत्तरायण, पंजाब में लोहड़ी, असम में बिहू आदि के नाम से जाना जाता है। इस मौके पर संदीप दुग्गल, अजय त्रिपाठी,अजीत कार बिट्टू, शेलेंद्र भास्कर, विजय महाजन सहित कई लोग उपस्थित थे।

Edited By Jagran

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