डायरेक्टर की बैठक में शामिल होने के लिए चंडीगढ़ पहुंचे दोनों सिविल सर्जन

जिले में एक कुर्सी के लिए दो सिविल सर्जन डाक्टर हरभजन राम मांडी व डाक्टर विजय काफी समय से आमने-सामने हैं।

JagranPublish: Tue, 30 Nov 2021 06:36 PM (IST)Updated: Tue, 30 Nov 2021 06:36 PM (IST)
डायरेक्टर की बैठक में शामिल होने के लिए चंडीगढ़ पहुंचे दोनों सिविल सर्जन

बाल कृष्ण कालिया, गुरदासपुर

जिले में एक कुर्सी के लिए दो सिविल सर्जन डाक्टर हरभजन राम मांडी व डाक्टर विजय काफी समय से आमने-सामने हैं। मंगलवार को चंडीगढ़ में हुई डायरेक्टर हेल्थ की बैठक में शामिल होने के लिए भी दोनों ही सिविल सर्जन गए। इससे विभाग के कर्मचारियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है कि किसका आदेश माने व किसका नहीं।

विभागीय सूत्रों के मुताबिक सिविल सर्जन की ओर से बनाए गए वाट्सएप ग्रुप से डाक्टर हरभजन राम मंडी को हटा दिया गया जबकि बैठक में भी उन्हें नहीं बुलाया गया। इस मामले की शिकायत हरभजन राम मांडी ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में कर दी है। कोर्ट को लिखे पत्र में हरभजन राम मांडी ने कहा है कि यह अनुशासनहीनता है। कोर्ट के निर्देश के मुताबिक अगले आदेश गुरदासपुर के सिविल सर्जन वहीं हैं जबकि डाक्टर विजय उनके कार्य में बांधा डाल रहे हैं। उधर, डाक्टर विजय का कहना है कि राज्य सरकार के आदेश पर उन्हें सिविल सर्जन का कार्यभार दिया गया है, जबकि डा. माडी का तबादला फतेहगढ़ साहिब किया गया है। इसके बावजूद भी वे अपना स्टेशन नहीं छोड़ रहे हैं। यहां पर अदालत का सहारा लेकर सरकारी काम में बाधा डाल रहे हैं।

मंगलवार को चंडीगढ़ में हेल्थ डायरेक्टर की ओर से बैठक का आयोजन किया गया। उसमें गुरदासपुर से डाक्टर विजय और डाक्टर हरभजन दोनों अधिकारी बैठक में शामिल होने के लिए पहुंच गए। हालांकि दोनों अधिकारी वहां पर अपने आप को सिविल सर्जन होने का दावा करेंगे, लेकिन वहां डायरेक्टर हेल्थ किस अधिकारी को क्या अधिकार देते हैं, इसके बारे में अभी स्पष्ट नहीं है। 10,11

वाट्सएप ग्रुप से डा. मांडी बाहर

वहीं स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के मुताबिक दोनों अधिकारियों में लगातार दूरी बनती चली जा रही है। सरकारी तौर पर बनाए गए सिविल सर्जन वाट्सएप ग्रुप से डा. हरभजन राम मांडी को बाहर कर दिया गया है। इसके बाद डा. मांडी ने नया वाट्सएप ग्रुप बना लिया और उसमें सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को शामिल कर लिया है। सूचना यह भी है कि इस मामले को लेकर सिविल सर्जन डा. हरभजन राम ने माननीय पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट में शिकायत भी दर्ज करवाई है। डाक साइन करवाने को लेकर असमंजस की स्थिति

सिविल सर्जन कार्यालय से जारी होने वाले सरकारी दस्तावेजों पर किस अधिकारी के हस्ताक्षर होंगे इसको लेकर दोनों अधिकारी भी आमने-सामने हैं। जबकि कार्यालय के कर्मचारियों में भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। अपना नाम ना छापने की शर्त पर अधिकतर कर्मचारियों ने बताया कि उनके कार्यालय का सिस्टम अस्त-व्यस्त हो चुका है। उन्हें अब यह तक नहीं पता चल रहा कि किस अधिकारी से हस्ताक्षर लिए जाएं। कार्यालय में चल रहे दो अटेंडेंस रजिस्टर

सिविल सर्जन कार्यालय में इस समय तो अटेंडेंस रजिस्टर भी चल रहे हैं। एक रजिस्टर डाक्टर विजय के पास है तो दूसरा डाक्टर हरभजन के पास है। ऐसे में कार्यालय में आने वाले कर्मचारी अपनी हाजिरी लगाने को लेकर भी दोनों अधिकारियों की इस लड़ाई में फंस चुके हैं।

Edited By Jagran

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