पंजाब के पूर्व डीजीपी के कार्यकाल में जारी प्रमोशन और भर्ती के आदेशों की भी जांच शुरू

पंजाब के पूर्व डायरेक्टर जनरल आफ पुलिस (डीजीपी) कार्यकाल में जारी आदेशों की भी जांच शुरू हो गई। एसआइटी को कई पूर्व डीजीपी के कार्यकाल में फर्जी हस्ताक्षर पर विभागीय जांच में फंसे अधिकारी-मुलाजिमों को राहत देने प्रमोशन और भर्ती की आशंका हैं।

JagranPublish: Wed, 26 Jan 2022 06:01 PM (IST)Updated: Wed, 26 Jan 2022 06:01 PM (IST)
पंजाब के पूर्व डीजीपी के कार्यकाल में जारी प्रमोशन और भर्ती के आदेशों की भी जांच शुरू

कुलदीप शुक्ला, चंडीगढ़।

पंजाब के पूर्व डायरेक्टर जनरल आफ पुलिस (डीजीपी) कार्यकाल में जारी आदेशों की भी जांच शुरू हो गई। एसआइटी को कई पूर्व डीजीपी के कार्यकाल में फर्जी हस्ताक्षर पर विभागीय जांच में फंसे अधिकारी-मुलाजिमों को राहत देने, प्रमोशन और भर्ती की आशंका हैं। अभी तक पूर्व डीजीपी सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय के समय में फर्जी हस्ताक्षर पर प्रमोशन की जांच में विभाग के अंदर फर्जी रिक्रूटमेंट करना भी उजागर हुआ हैं। प्रमोशन लेटर पर हस्ताक्षर करने वाले पूर्व डीजीपी के पीए कुलविदर सिंह की गिरफ्तारी के बाद परतें खुलने लगी हैं। अब इससे संबंधित सभी रिकार्ड मांगने वाली एसआइटी इस एंगल पर जांच करने का हवाला देकर अधिकारिक तौर पर कुछ भी बोलने से कतरा रही है।

इस तरह चला फर्जीवाड़े का खेल

डीजीपी चट्टोपाध्याय के पीए कुलविदर की भूमिका सब इंस्पेक्टर हरविदर और इंस्पेक्टर सतवंत के साथ मिलकर फर्जी हस्ताक्षर करता था। इससे पहले डीजीपी रहने वाले इकबाल प्रीत सिंह सहोता के समय पर भी कुलविदर पीए रह चुका है। दूसरे आरोपित भी डीजीपी आफिस में तैनात होने के साथ उनके करीबी बने थे। सूत्रों के अनुसार पिछले कई वर्षों से विभाग में सक्रिय गैंग पहले भी डायरेक्टर जनरल (डीजीपी) के ट्रांसफर पर नजर बनाकर रखते थे। ट्रांसफर होने की चर्चाओं के बीच पहले से तैयार लिस्ट को फर्जी हस्ताक्षर के दम पर जारी कर देते थे।

मुख्यमंत्री बदलते ही बदले चार डीजीपी

मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के बनने से अब तक पंजाब में चार डीजीपी बदल चुके हैं। पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिदर सिंह के कार्यकाल में डीजीपी रहने वाले दिनकर गुप्ता के बाद इकबाल प्रीत सिंह सहोता को चार्ज सौंपा गया। सहोता के बाद चट्टोपाध्याय को डीजीपी बनाया गया। आचार संहिता लागू होने से कुछ देर पहले सहोता को हटाकर वी के भावरा को पदभार सौंपा गया।

चार आरोपितों को जेल, तीन की तलाश

आरोपित इंस्पेक्टर सतवंत, बर्खास्त एसआइ सरबजीत, डीजीपी आफिस में तैनात सुपरिटेंडेंट संदीप कुमार, सुपरिटेंडेंट बहादुर सिंह और हेड कांस्टेबल मनी कटोच को जेल भेज दिया है। अब मामले में पुलिस को लोकल रैंक के असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर से सब इंस्पेक्टर बने हरविदर सिंह सतिदर और लोकल रैंक के कांस्टेबल से हेड कांस्टेबल बने संजीव की तलाश कर रही है। जबकि एक इंस्पेक्टर भी निशाने पर है। सूत्रों के अनुसार एसआइ हरविदर सिंह के बेटे सहित एक पूर्व आइपीएस अधिकारी के बेटे को फर्जी हस्ताक्षर पर रिक्रूटमेंट करने की बात सामने आ रही है। हरविदर का बेटा भी फरार चल रहा है।

Edited By Jagran

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