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बुलेट चलानी आती है, पटाखे नहीं

बुलट ता रखिया पटाके पाण नूं.. यह गीत गाया तो लोगों ने सिर आंखों पर बिठाया। मुझे उम्मीद नहीं थी कि यह गीत इतना हिट होगा।

Thu, 15 Mar 2018 11:03 AM (IST)
बुलेट चलानी आती है, पटाखे नहीं

जागरण संवाददाता, चंडीगढ़ : बुलट ता रखिया पटाके पाण नूं.. यह गीत गाया तो लोगों ने सिर आंखों पर बिठाया। मुझे उम्मीद नहीं थी कि यह गीत इतना हिट होगा। इस गाने के बाद तो मेरी एंट्री स्टेज पर बुलेट के साथ ही होने लगी। हां, मुझे बुलेट चलानी तो आती है मगर पटाखे नहीं। गायिका सुनंदा शर्मा से जब बुलेट चलाने को लेकर सवाल हुए तो उन्होंने कुछ इस अंदाज में जवाब दिया। बुधवार को वह होटल जेम्स प्लाजा-17 में बातचीत के लिए पहुंचीं। सुनंदा को पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री में दो वर्ष पूरे हो चुके हैं और अब तक उन्होंने पांच गीत रिलीज किए और सभी गीत हिट हुए। सोशल साइट ने पहले ही बना दिया था हिट सुनंदा ने कहा कि कुछ वर्ष पहले तक उनका सिंगर बनने का कोई प्लान नहीं था। स्कूल और कॉलेज में हल्का फुल्का गाना होता था, वह भी बिना किसी ट्रेनिंग के। कुलविंदर बिल्ला का गीत सच्चा सूरमा जब रिलीज हुआ तो उसे गाकर मैंने यूट्यूब पर अपलोड कर दिया। कुछ ही दिनों में गीत हिट हो गया। कई प्रसिद्ध गायकों ने भी इसे सराहा। एक दिन अमर ऑडियो से गाने को लेकर कॉल आया। पहला गीत बिल्ली अक्ख रिलीज हुआ और हिट भी हो गया। मुझे कभी लगा ही नहीं कि मैं इंडस्ट्री का हिस्सा हूं। वह तो जब लोग मुझे बाहर पहचानने लगे तो अंदाजा हुआ कि मैं गायिका बन चुकी हूं। कानून तोड़ने की नहीं मगर किसी की जिंदादिली दिखाई है गीत में पटाखे गीत को लेकर कई लोगों ने कटाक्ष भी किए? इस पर सुनंदा ने कहा कि हां, मगर इसमें केवल एक पंजाबी युवक के लाइफस्टाइल को दिखाया गया है, जिसके पास सब कुछ है मगर फिर भी वह बुलेट से प्यार करता है। इसके जरिए उसकी जिंदादिली को दिखाया गया है। गाने में मैं अपनी एक सहेली से बात कर रही हूं, कि यह नौजवान अपनी बुलेट से कितना प्यार करता है। इसे इतना गंभीरता से क्यों लिया जा रहा है, यह पता नहीं चला। मैंने जट यमला जैसे गीत गाए, मगर किसी ने उस गीत के लिए मुझे याद नहीं किया मगर केवल पटाखे तक ही सीमित रखा। दरअसल लोगों को पसंद ही ऐसे गीत आते हैं। मगर मेरी कोशिश कभी भी अपने गीतों के जरिए गैंगस्टर और कानून तोड़ने जैसे शब्दों से दूर ही रहने की है। मैं पटाखे जैसा गीत गा सकती हूं, मगर बंदूक और गैंगस्टर टाइप नहीं। सज्जन सिंह रंगरूट जैसी फिल्म में काम करना सौभाग्य सज्जन सिंह रंगरूट में आपका किरदार बिल्कुल सादा है, जिसमें कोई भी मेकअप नहीं किया गया? इस पर सुनंदा ने कहा हां, दरअसल यह बिल्कुल मेरे जैसा है। मुझे सजना संवरना इतना भाता नहीं। फिल्म के निर्देशक पंकज बतरा ने यह किरदार मुझे दिया तो मैंने काफी सोच समझकर इसके लिए हां कही। दरअसल मेरे गीत हिट हुए तो कई फिल्म के ऑफर मुझे आए, मगर यह ऐसा किरदार था जिसके लिए न नहीं कह सकती थी। दलजीत दोसांझ जैसे बड़े एक्टर के साथ काम करना बेहद मजेदार था। यह फिल्म रशिया में भी रशियन भाषा में रिलीज होगी, इसकी खुशी है। हिट होने के बाद भी मेरी जिंदगी वैसी ही है सुनंदा ने कहा कि उनके परिवार में आज तक कोई गायिकी में नहीं आया। परिवार में सब पढ़ाई से जुड़े हैं। ऐसे में उन्होंने भी अंग्रेजी में एमए की। वह बोलीं कि एमए में जैसेतैसे पास हुई, अब स्थायी गायिका बन चुकी हूं तो खुश हूं। हालांकि मैं आराम से आगे बढ़ना चाहती हूं। मुझे कोई जल्दी नहीं है। इसलिए दो वर्ष में अभी तक केवल पांच गीत ही रिलीज किए हैं। आगे जल्द ही एक और गीत के साथ सामने आऊंगी।

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