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मोहाली नगर निगम में शामिल हुए गांव और नए सेक्टर, आजाद ग्रुप ने स्वास्थ्य मंत्री पर लगाए गंभीर आरोप

आजाद ग्रुप के पार्षदों ने कहा कि निगम में शामिल होने के लिए गांवों व सेक्टरों का रेवेन्यू रिकॉर्ड इकट्ठा करने में एक से डेढ़ साल लग जाएगा। इतने में चुनाव हो जाएंगे और लोग इस भ्रम में रहेंगे कि उनके क्षेत्र निगम की हद में आ गए है।

By Ankesh ThakurEdited By: Published: Mon, 28 Jun 2021 05:00 PM (IST)Updated: Mon, 28 Jun 2021 05:00 PM (IST)
मोहाली में आजाद ग्रुप के पार्षदों ने स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू पर कई आरोप लगाए हैं।

रोहित कुमार, मोहाली। पंजाब के सेहत मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू ने अपने मेयर भाई अमरजीत सिंह जीती सिद्धू के जरिये पंजाब में 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव में वोटों की राजनीति करने के लिए नगर निगम की मीटिंग में कई गलत फैसले लिए हैं। हदबंदी का प्रस्ताव पारित करना सिर्फ वोटों की राजनीति है। आजाद ग्रुप के पार्षद सुखदेव सिंह पटवारी, मंजीत सिंह सेठी, परमिंदर सोहाना ने ये आरोप लगाए।

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आजाद ग्रुप के पार्षदों ने कहा कि निगम में शामिल होने के लिए गांवों व सेक्टरों का रेवेन्यू रिकॉर्ड इकट्ठा करने में एक से डेढ़ साल लग जाएगा। इतने में चुनाव हो जाएंगे और लोग इस भ्रम में रहेंगे कि उनके क्षेत्र निगम की हद में आ गए है। ध्यान रहे कि सूबे के सेहत मंत्री मोहाली विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ते है। विपक्ष ने कहा कि वोटों का लाभ लेने के लिए हदबंदी जैसे प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई। पार्षदों ने कहा कि फिलहाल वे इस मामले में विभागीय लड़ाई लडेगें। अगर बात नहीं बनी तो वे अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।

विपक्षी पार्षदों ने कहा कि जिन सेक्टरों व गांवों को नगर निगम का हिस्सा बनाया जा रहा है। इस समय इन क्षेत्रों में अवैध कॉलोनियों की भरमार है। इन अवैध कॉलोनियों को लेकर गमाडा की ओर से आए दिन कार्रवाई की जा रही है। अगर यह एरिया निगम अपने क्षेत्र में शामिल करता है तो अवैध निर्माणों को लेकर निगम की क्या पॉलिसी होगी।  इस पर भी कई सवाल खड़े होते हैं या तोअवैध कॉलोनियां पूरी तरह रेगुलराइज कर दी जाएगी ? या फिर तोड़ी जाएगी। इसके साथ ही नई कॉलोनियों को बनाने का एक और चक्र शुरू हो जाएगा। 

पार्षदों ने कहा कि अवैध कॉलोनियों के चलते ही यह ग्रामीण एरिया के रसूखदार लोग इन्हें नगर निगम की हद में शामिल करना चाहते हैं ताकि राजनीतिक रसूख के साथ बचा जा सके। लाइब्रेरियों को चलाने के लिए एसोएिशनों को दस हजार रुपये देने की बात कहीं गई है। लेकिन इतना तो बिजली का बिल आ जाएगा। पार्षदों की ओर से अन्य फैसलों पर भी सवाल उठाए गए। मेयर और सेहत मंत्री अपने चेहतों के जरियो वोटों की राजनीति कर रहे है।


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