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अरसे बाद मीडिया से रूबरू हुए नवजोत सिंह सिद्धू, कैप्‍टन अमरिंदर सरकार को फिर घेरा

Navjot Singh Sidhu पंजाब के पूर्व कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू वीरवार को यहां म‍ीडिया से रूबरू हुए। पंजाब की कैप्‍टन अमरिंदर सिंह सरकार से इस्‍तीफा देने के बाद यह पहला मौका था जब सिद्धू ने मीडिया से बातचीत की।

Sunil Kumar JhaThu, 04 Mar 2021 03:48 PM (IST)
अरसे बाद मीडिया से रूबरू हुए नवजोत सिंह सिद्धू, कैप्‍टन अमरिंदर सरकार को फिर घेरा

चंडीगढ़, जेएनएन। पंजाब के फायर ब्रांड नेता और राज्‍य के पूर्व कैबिनेट मंत्री नवजाेत सिंह सिद्धू लंबे अरसे बाद आज मीडिया से रूबरू हुए। सिद्धू ने फिर पंजाब की अपनी पार्टी की सरकार को घेरा। उन्‍हाेंने राज्‍य में तिलहन और दलहन की खरीद के लिए कैप्‍टन अमरिंदर सिंह सरकार पर सवाल उठाए।

नवजाेत सिंह सिद्धू ने यहां पंजाब भवन में पत्रकारों से बातचीत की। सिद्धू ने कहा कि आखिर पंजाब सरकार दाल और तिलहन पर किसानों को न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य (एमएसपी) क्‍यों नहीं दे रही है। पंजाब सरकार को चाहिए कि वह राज्‍य के किसानों को दलहन और तिलहन की फसलों पर एमएसपी दे। उन्‍होंने कहा कि सरकार पांच-पांच गांव पर कोल्ड स्टोरेज बनाए। पंजाब के किसान में होल्डिंग कैपेसिटी बढानी चाहिए। काेलड स्‍टोरेज से किसानों की अपने फसलों की होल्डिंग कैपेसिटी बढ़ेगी।

चंडीगढ़ में पंजाब भवन में पत्रकारों से बात करते पूर्व कैबिनेट मंत्री नवजाेत सिंह सिद्धू। (जागरण)

नवजाेत सिद्धू ने इस दाैरान हरियाणा का उदाहरण दिया। उन्‍होंने कहा कि हरियाणा तिल व तिलहन खरीदता है और फिर तेल बेचता है। इससे किसानों की आर्थिक दशा सुधरती है।  बता दें कि इससे पहले भी नवजोत सिंह सिद्धू अपनी पार्टी की कैप्‍टन अमरिंदर सिंह सरकार पर निशाना साधते रहे हैं। उन्होंने किसान आंदोलन के प्रति भी अपना पूरा समर्थन व्‍यक्‍त किया। उन्‍होंने कहा कि कृषि कानूनों को किसानों के हित में वापस लिया जाना चाहिए।

बता दें कि कैप्‍टन अमरिंदर सिंह की सरकार से इस्‍तीफा देने के बाद नवजोत सिंह सिद्धू पहली बार मीडिया के सामने आए। कैप्‍टन सरकार से इस्‍तीफा देने के बाद वह सार्वजनिक रूप से बहुत कम नजर आए और इस दौरान उन्‍होंने मीडिया से दूरी बना ली।

इस मौके पर नवजोत सिंह सिद्धू ने चार सूत्रीय कार्यक्रम का पेश किया। ये हैं-

- सिद्धू ने कहा कि सरकार को तिलहन और दलहन पर एमएसपी देनी चाहिए। इससे न सिर्फ पंजाब का पानी बचेगा बल्कि डायवर्सिफिकेशन (फसल विवधिकरण) भी होगा। 

- सिद्धू ने कोऑपरेटिव सिस्टम को ब्यूरोक्रेसी के हाथ से निकाल कर किसानों के हाथों में देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इससे किसान अपनी फसल का मूल्य खुद तय कर पाएगा। जैसा कि वेरका और अमूल में होता है। 2 किलो दूध बेचने वाला किसान और 100 किलो दूध बेचने वाला किसान को एक ही भाव मिलता है।

- उन्‍हाेंने कहा कि मनरेगा की तरह खेतिहर मजदूर को भी वेतन सपोर्ट देना चाहिए।

- सिद्धू ने कोल्ड स्टोरेज बनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि अगर सरकार 5-5 गांव में कोल्ड स्टोरेज बनाती है तो किसान अपने माल को होल्ड कर सकेंगे और उन्‍‍हें उचित भाव भी मिलेगा। इससे किसान की आमदनी भी बढ़ेगी। इन कानूनों को बनाने के लिए राज्य सरकार को केंद्र की तरफ देखने की कोई आवश्यकता नहीं है। वह अपने स्तर पर भी यह कानून बना सकती है। जब उनसे यह पूछा गया कि क्या उन्होंने अपने प्रस्ताव सरकार को दिए हैं तो उन्होंने कहा कि इस बार सीएलपी (कांग्रेस विधायक दल) की मीटिंग नहीं हुई है। सरकार जब भी मांगे कि वह प्रस्ताव दे देंगे।

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