Punjab Election 2022: चुनावी मौसम में अफसर भी बनने लगे नेता, नौकरी छोड़ राजनीति के मैदान में कूदे

Punjab Election 2022 पंजाब विधानसभा चुनाव में पूर्व ब्यूरोक्रेट्स भी चुनाव मैदान में हैं। राज्य में आधा दर्जन से ज्यादा आइएएस आइपीएस और पीसीएस अफसर चुनावी अखाड़े में उतरे हैं। कांग्रेस भाजपा शिअद आप व बसपा सभी दलों ने अफसरों को टिकट दिया है।

Kamlesh BhattPublish: Sat, 29 Jan 2022 10:45 AM (IST)Updated: Sat, 29 Jan 2022 05:52 PM (IST)
Punjab Election 2022: चुनावी मौसम में अफसर भी बनने लगे नेता, नौकरी छोड़ राजनीति के मैदान में कूदे

इन्द्रप्रीत सिंह, चंडीगढ़। Punjab Election 2022: आधा दर्जन से ज्यादा आइएएस, आइपीएस और पीसीएस अफसर अपनी पहली पारी से रिटायर होकर या रिटायरमेंट लेकर चुनावी अखाड़े में दूसरी पारी शुरू करने जा रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि कोई भी पार्टी ऐसी नहीं है, जिसने पूर्व ब्यूरोक्रेट्स, पुलिस अफसरों को टिकट नहीं दिया है। हालांकि ऐसा हर चुनाव में होता है, लेकिन इक्का-दुक्का अफसरों को छोड़कर ज्यादा अफसरों को मुंह की ही खानी पड़ती है। पूर्व डीजीपी पीएस गिल, पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के प्रिंसिपल सेक्रेटरी रहे दरबारा सिंह गुरु, पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल जेजे सिंह ऐसे अधिकारी रहे हैं जो अपनी तमाम कोशिशों के बावजूद विधानसभा की सीढ़ियां नहीं चढ़ सके।

इस बार लुधियाना जिले की गिल सीट ऐसी है जहां दो-दो पूर्व आइएएस एक-दूसरे के आमने-सामने हैं। भारतीय जनता पार्टी ने जहां इस सीट से एसआर लद्दड़ को मैदान में उतारा है, वहीं कांग्रेस ने एक बार फिर से कुलदीप वैद्य पर भरोसा जताया है। लद्दड़ बठिंडा, संगरूर, मानसा और नवांशहर जैसे जिलों में डीसी रह चुके हैं, जबकि कुलदीप वैद्य भी मोगा में डीसी रहे हैं। कुलदीप वैद्य को इस बार गिल के बजाय जगराओं सीट से उतारने की तैयारी चल रही थी, लेकिन वह अपनी सीट बचाए रखने में कामयाब रहे।

फगवाड़ा सीट से पूर्व आइएएस अफसर बलविंदर सिंह धालीवाल एक बार फिर से चुनाव मैदान में हैं। कांग्रेस ने उन पर दूसरी बार भरोसा किया है। वह सामाजिक सुरक्षा विभाग में डायरेक्टर जैसे महत्वपूर्ण पद पर रह चुके हैं। भाजपा ने नवजोत सिंह सिद्धू के खिलाफ तमिलनाडु के चीफ रेजिडेंट कमिश्नर के पद पर काम कर रहे जगमोहन सिंह राजू को अमृतसर पूर्वी सीट से खड़ा किया है। उन्होंने अपनी रिटायरमेंट से डेढ़ साल पहले ही वीआरएस ले ली, जिसे राज्य सरकार ने स्वीकार कर लिया है।

आइएएस अफसरों के अलावा पूर्व आइपीएस अफसर भी चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। बहुजन समाज पार्टी ने चमकौर साहिब सीट से मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के खिलाफ पूर्व आइपीएस हरमोहन सिंह संधू को खड़ा किया है। आम आदमी पार्टी ने पूर्व आइजी कुंवर विजय प्रताप सिंह को अमृतसर उत्तरी से चुनाव मैदान में उतारा है। वह भी सशक्त उम्मीदवार हैं।

भारतीय जनता पार्टी ने रोपड़ से पूर्व एसपी इकबाल सिंह लालपुरा को उतारा है। हालांकि पार्टी ने उन्हें अल्पसंख्यक आयोग का चेयरमैन भी बनाया था और माना जा रहा था कि उनका बेटा इस सीट पर उतरेगा, लेकिन पार्टी ने लालपुरा को ही टिकट देकर अपने इरादे साफ कर दिए हैं कि पार्टी अपनी सीनियर लीडरशिप को उतारेगी। वह ओबीसी समुदाय से संबंधित हैं और रोपड़ में इस समुदाय का अच्छा खासा आधार है।

शिरोमणि अकाली दल भी पीछे नहीं है। उन्होंने जगराओं से पूर्व पीसीएस अफसर एसआर कलेर को फिर से मैदान में उतारा है। वह पहले भी पार्टी की ओर से विधायक रह चुके हैं। इसके अलावा अन्य सेक्टर के अफसर भी चुनाव मैदान में हैं। उधर, भाजपा ने एसआर कलेर के अधीन बतौर तहसीलदार काम कर चुके कंवर नरिंदरपाल को उनके सामने मैदान में उतार दिया है। कलेर जब लुधियाना में एडीशनल डिप्टी कमिश्नर के तौर पर काम कर रहे थे, उस समय कंवर नरिंदरपाल सिंह लुधियाना में बतौर तहसीलदार काम कर रहे थे।

दाखा में कैप्टन के दो पूर्व ओएसडी आमने-सामने

लुधियाना की दाखा विधानसभा से पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के अधीन एक साथ काम करने वाले दो पूर्व ओएसडी (आफिसर आन स्पेशल ड्यूटी) संदीप संधू और दमनजीत सिंह मोही अब एक-दूसरे के खिलाफ राजनीति के मैदान में जंग लड़ेंगे। यह वह पूर्व साथी हैैं जो कभी कैप्टन के लिए एक ही टेबल पर बैठकर काम करते थे परंतु राजनीति के अखाड़े में प्रतिद्वंदी होंगे। कैप्टन संधू को कांग्रेस तो मोही को कैप्टन की पार्टी पंजाब लोक कांग्रेस पार्टी ने टिकट दिया है। 

Edited By Kamlesh Bhatt

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