This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.
OK

यूथ हास्टल न होने से एक ही दिन में लौट जाते हैं पर्यटक

देश-विदेश में टूरिज्म की नजर से पहचाने जाने वाले अमृतसर शहर में एक भी यूथ होस्टल की सुविधा नहीं हैं।

JagranMon, 19 Apr 2021 05:06 AM (IST)
यूथ हास्टल न होने से एक ही दिन में लौट जाते हैं पर्यटक

हरीश शर्मा, अमृतसर

देश-विदेश में टूरिज्म की नजर से पहचाने जाने वाले अमृतसर शहर में एक भी यूथ होस्टल की सुविधा नहीं हैं। इस कारण यहां आने वाले पर्यटक महंगे होटलों में ज्यादा दिन ठहरने के बजाय वापिस लौटने को ही तरजीह देते हैं। आम दिनों में दरबार साहिब, दुर्गयाणा मंदिर, रामतीर्थ में माथा टेकने, जलियांवाला बाग और भारत-पाक सीमा पर रिट्रीट सेरेमनी देखने को हर रोज शहर में करीब एक लाख लोग आते हैं। यह लोग शहर में दो से तीन दिन रुकने के बजाये केवल एक रात ठहर कर वापस लौट जाते हैं। इसका एक बड़ा कारण यह है कि अमृतसर में टूरिज्म विभाग की ओर से कोई भी यूथ होस्टल रजिस्ट्रड नहीं किया जाना है। ऐसे में यहां पर ठहरने की व्यवस्था केवल होटलों में हैं या फिर दरबार साहिब की ओर से बनाई गई सराय में ही है। सवा लाख टूरिस्ट में से 60 से 70 हजार लोग ऐसे होते हैं, जो होटलों का किराया नहीं दे पाते हैं और एक दिन यहां पर घूम कर वापस लौट जाते हैं।

करीब दो साल पहले जब नवजोत सिंह सिद्धू टूरिज्म विभाग के मंत्री थे तो उन्होंने यूथ होस्टल रजिस्टर्ड करने संबंधी जल्द प्रपोजल बनाने की बात की थी। मगर उनके मंत्री पद से हटने के बाद यह बात भी कहीं दफन हो गई।

टूरिज्म विभाग के जिला अधिकारी गुरशरण सिंह ने कहा कि अभी तक विभाग की तरफ से भी कोई प्रपोजल उनके पास नहीं हैं। अगर हेड आफिस से इस संबंधी कोई प्रपोजल आती हैं तो उस पर काम किया जाएगा ताकि पर्यटकों को ज्यादा से ज्यादा फायदा मिल सके। बॉक्स:

बीस साल पहले माल मंडी में होस्टल बनाने की बनी थी योजना:

करीब 20 साल पहले माल मंडी में यूथ होस्टल बनाने की योजना बनी थी। इसे बाद में ठंडे बस्ते में चली गई। इसी दौरान दिल्ली-लाहौर बस सेवा शुरू हुई तो यहां पर इन बसों को खड़ा करना शुरू कर दिया गया। ऐसा होता है यूथ होस्टल

यूथ होस्टल एक तरह के सस्ते होटल की तरह होता हैं। यहां पर मात्र 50 से 100 रुपये तक कमरा मुहैया करवाया जाता है। इस होस्टल में कम्युनिटी प्वाइंट बना होता हैं। होस्टल में ठहरने वाले यात्री यहां पर खाना भी बना लेते हैं। केवल उन्हें बाजार से सामान लेकर आना होता हैं। टूरिस्ट के जाते समय जो राशन बच जाता है, उसे कम्युनिटी प्वाइंट पर जमा करवा दिया जाता हैं ताकि जब कोई नया टूरिस्ट आए तो उस सामान का इस्तेमाल कर सकें।

ਪੰਜਾਬੀ ਵਿਚ ਖ਼ਬਰਾਂ ਪੜ੍ਹਨ ਲਈ ਇੱਥੇ ਕਲਿੱਕ ਕਰੋ!

अमृतसर में कोरोना वायरस से जुडी सभी खबरे

डाउनलोड करें हमारी नई एप और पायें अपने शहर से जुड़ी हर जरुरी खबर!