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162 करोड़ रुपये की लागत से श्रद्धा की राह का सोलह श्रृंगार

162 करोड़ रुपये से आसपास किए गए सौंदर्यीकरण स्वर्ण मंदिर की आभा और चमक गई है। विश्व प्रसिद्ध धार्मिक पर्यटन स्थल पहुंचने वाले श्रद्धालु रोमांचित हो रहे हैं।

Kamlesh BhattTue, 25 Oct 2016 12:58 PM (IST)
162 करोड़ रुपये की लागत से श्रद्धा की राह का सोलह श्रृंगार

अमृतसर [धीरज कुमार झा]। श्री हरिमंदिर साहिब पहुंचने वाले श्रद्धालुओं का रोमांच अब और बढ़ गया है। श्रद्धा की राह के 'सोलह श्रृंगार' ने गुरु नगरी की नुहार बदल कर रख दी है। 162 करोड़ रुपये से आसपास किए गए सौंदर्यीकरण व विरासती तस्वीर को देख विश्व प्रसिद्ध धार्मिक पर्यटन स्थल पहुंचने वाले श्रद्धालु रोमांचित हो रहे हैं।

800 मीटर की राह में धर्म, कर्म और मर्म तीनों का संगम बहने लगा है। इस रास्ते में 7000 स्कवायर फीट की एशिया की सबसे बड़ी एलईडी स्क्रीन से जहां गुरबाणी का पाठ लोग देखेंगे व श्रवण करेंगे वहीं जलियांवाला बाग के बाहर जंग-ए-आजादी के लिए जान न्योछावर करने वालों का मर्म भी जानेंगे। शेर-ए-पंजाब महाराजा रंजीत सिंह की 40 फीट ऊंची प्रतिमा भी बनाई गई है जिन्होंने अपने शक्ति के दम पर पंजाब को एकसूत्र में पिरोया था।

विकास की गाथा शुरू होती है टाउन हाल से। 1870 में अंग्रेज इंजीनियर जॉन गार्डन के द्वारा बनाई गई इस ऐतिहासिक इमारत में 1877 से म्यूनिसिपल कमेटी का दफ्तर चल रहा था। अब इस विरासती इमारत को पार्टीशन म्यूजियम में तब्दील कर दिया गया है। 6.5 करोड़ रुपये की लागत से गुलाबी रंग से विरासती इमारत निखर उठी है।

महाराष्ट्र से आए कारीगरों ने इसे तराशा है। टाउन हाल के बाहर भारतीय संविधान के निर्माता बाबा साहब भीम राव अंबेडकर का आदमकद बुत लगाया गया है। मिनी संसद के मॉडल वाले चौराहे के बीचोबीच उनकी प्रतिमा स्थापित की गई है जिसके सामने भारतीय संविधान का भी मॉडल प्रस्तुत किया गया है। इसी चौराहे के समीप सारागढ़ी पार्किंग में 7 हजार स्क्वायर फीट की एलईडी स्क्रीन लगाई गई है, जिससे गुरबाणी का प्रसारण होगा। टाउन हाल से श्री हरिमंदिर साहिब तक 4 एलईडी स्क्रीन लगाई जाएगी।

इससे सौ मीटर आगे बढऩे पर चौक फव्वारा है। यहां कभी महारानी एलिजाबेथ का बुत था, लेकिन अब वहां शेर-ए-पंजाब महाराजा रंजीत सिंह की 40 फुट ऊंची प्रतिमा लगाई गई है। रंजीत सिंह के राज को आज भी याद किया जाता है। वह न्यायप्रिय शासक तो थे ही, उन्होंने साम्राज्य का भी विस्तार किया था। उन्होंने अमृतसर को आध्यात्मिक राजधानी भी घोषित किया था। राह में मुगल काल से लेकर महाराजा रंजीत सिंह के शासनकाल तक के सैनिकों की वेशभूषा वाले 16 सैनिकों के भी बुत लगाए गए हैं। इसके आगे जलियांवाला बाग है जहां 13 अप्रैल 1919 को जनरल डायर ने निहत्थे लोगों पर गोलियों की बौछार करवा दी थी। इसमें सभी धर्मों के लोग शहीद हुए थे। इस कांड ने देश की आजादी का मार्ग प्रशस्त किया।

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गिद्दा व भंगड़ा के स्टैच्यू, शहीदों की प्रतिमा

धर्म सिंह मार्केट के समीप महान सेनानी हरि सिंह नलवा व अकाली नेता फूला सिंह बुर्ज के बुत लगाए गए हैैं। यहीं पर गिद्दा व भंगड़ा के स्टैच्यू भी लगे हैं। जलियांवाला बाग के बाहर शहीदों की प्रतिमा बनाई गई है, जिसमें शहीदी मशाल भी है। जलियांवाला बाग के शहीदों के नाम को उड़ीसा से आए कारीगर ने सफेद मार्बल पर उकेरा है। 480 शहीदों के नाम प्रतिमा पर दर्ज किए गए हैं। इसमें राजस्थानी पत्थर का प्रयोग किया गया है, जबकि स्टेच्यू मेटल के बने हुए हैं।

कोलकाता से मंगाई 7 लाख की घड़ी

टाउन हाल के समीप लगी घड़ी कोलकाता से घड़ी मंगाई गई है। 7 लाख की यह घड़ी हर 15 मिनट पर म्यूजिकल अलार्म बजाती है, जो बताती है कि अब श्रद्धा के राह का सोलह शृंगार हो चुका है। 25 अक्टूबर को डिप्टी सीएम सुखबीर बादल विकास कार्यों को जनता को समर्पित करने वाले हैं।

800 मीटर के रास्ते में इंटरलॉकिंग टाइल्स

800 मीटर इंटरलाकिंग टाइल्स वाले सड़कें बनाई गई हैं। सेंड स्टोन व ब्लैक स्टोन वाले फुटपाथ बने हैं। एलईडी लैंप पोस्ट लगाए गए हैं। फसाड में भी ल्यूमिनेट एलईडी लाइटें लगाई गई हैैं। करीब 600 लाइटें लगाई गई हैैं। हरियाली का भी खयाल रखा गया है। सड़कों के बीचोबीच पौधे लगाए गए हैं। बैठने के लिए सड़क के किनारे 45 बेंच लगाए गए हैैं।

गुलाबी रंग के पेंट वर्क ने बढ़ाई सुंदरता

टाउन हाल से श्री हरिमंदिर साहिब तक फसाड का काम किया गया है जिससे सौ से अधिक दुकान व मकान एक समान रंग रूप में नजर आ रहे हैं। इसमें गुलाबी रंग का पेंट वर्क और जाली वर्क आर्ट भी किया गया है। राह में एलईडी लाइटें भी जगमगाती हैं।

अंडरग्राउंड हुई तारें

52 करोड़ रुपये से हाल गेट से श्री हरिमंदिर साहिब तक सड़कों के नवनिर्माण के अलावा स्टार्म सीवर डाली गई है। टेलीफोन, बिजली व केबल के तारों के जंजाल को अंडरग्राउंड किया गया है।

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