Amit Shah: गुजरात दंगों में पीएम मोदी को मिली क्लीन चिट को गृहमंत्री अमित शाह ने बताया सत्य की जीत

Amit Shah गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि देश की न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करते हुए पीएम नरेन्द्र मोदी बिना एक शब्द बोले सभी दुखों को भगवान शंकर के विषपान की तरह 18-19 साल तक सहन करके लड़ते रहे। उन्होंने कहा कि यह सत्य की जीत है।

Ashisha RajputPublish: Sat, 25 Jun 2022 08:12 PM (IST)Updated: Sat, 25 Jun 2022 08:12 PM (IST)
Amit Shah: गुजरात दंगों में पीएम मोदी को मिली क्लीन चिट को गृहमंत्री अमित शाह ने बताया सत्य की जीत

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। गुजरात दंगों को लेकर लगे आरोपों से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को मिली क्लीन चिट को सत्य की जीत बताते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने आरोपों को बड़े षड्यंत्र का हिस्सा बताया है। उन्होंने कहा कि देश की न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करते हुए मोदी बिना एक शब्द बोले सभी दुखों को भगवान शंकर के विषपान की तरह 18-19 साल तक सहन करके लड़ते रहे। उन्होंने इसे लोकतंत्र में संविधान के सम्मान का आदर्श उदाहरण बताया।

गृहमंत्री अमित शाह ने कहा-

गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि झूठे आरोप लगाने वालों को मोदी और भाजपा से माफी मांगनी चाहिए। मोदी के खिलाफ 19 साल तक चले दुष्प्रचार को तीस्ता सीतलवाड़ के एनजीओ, कुछ पत्रकारों और विरोधी राजनीतिक दलों की तिकड़ी का षड़यंत्र बताते हुए उन्होंने कहा कि गुजरात दंगे को लेकर अभी तक किसी भी अदालत ने मुख्यमंत्री के रूप में मोदी की भूमिका पर संदेह नहीं किया है। यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने फैसले में हर आरोप का विस्तार से जवाब देते हुए उस समय मोदी सरकार की ओर दंगे रोकने की कोशिशों की प्रशंसा की है।

उन्होंने कहा सुप्रीम कोर्ट ने दंगे के दिन ही सेना बुलाने के फैसले को लेकर मुख्यमंत्री के रूप में मोदी की सराहना की। शाह ने सेना पहुंचने में हुई देरी को लेकर सवाल उठाने वाले को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि दिल्ली में 1984 में हुए सिख दंगे को रोकने के लिए सेना क्यों नहीं बुलाई गई थी। यहां तक कि उसकी एसआइटी जांच तक नहीं कराई गई। केंद्र में मोदी सरकार बनने के बाद इसकी एसआइटी जांच कराई गई और लोग जेल भी गए।

शाह ने साफ किया कि गुजरात दंगा गोधरा में 60 बेगुनाह हिन्दुओं को जिन्दा जला देने की प्रतिक्रिया में हुई घटना थी। पुलिस, प्रशासन और सूचना तंत्र इसका अनुमान लगाने में विफल रहा। उन्होंने यह भी साफ किया कि बाद में सूचना तंत्र की इस कमजोरी को दूर किया गया, जिसके कारण 2002 के बाद गुजरात में एक भी दंगे नहीं हुआ। इसके साथ ही उन्होंने गोधरा की घटना की निंदा नहीं करने को लेकर कांग्रेस को कठघरे में खड़ा किया।

न्याय व्यवस्था पर भरोसा होने के कारण मोदी ने कभी सफाई नहीं दी

झूठे आरोपों के बावजूद मोदी की ओर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिए जाने के बारे में पूछे जाने पर अमित शाह ने कहा कि अदालत के सामने लंबित मामले में कुछ नहीं बोलने का फैसला भारतीय न्यायिक प्रणाली में अटूट विश्वास को दिखाता है। इसी विश्वास के कारण मोदी कोई भी स्पष्टीकरण नहीं देने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि यह फैसला कोई मजबूत मन वाला व्यक्ति ही कर सकता है।

गुजरात सरकार की रजामंदी पर गठित हुई थी एसआइटी

गुजरात दंगे में तत्कालीन मोदी सरकार की भूमिका की जांच के लिए एसआइटी के गठन के बारे में शाह ने कहा कि अदालत के सामने एनजीओ ने इसकी मांग की थी और गुजरात सरकार की रजामंदी के बाद ही अदालत के आदेश से एसआइटी का गठन किया गया था। एसआइटी की जांच निष्पक्ष बताते हुए उन्होंने कहा कि तत्कालीन मनमोहन ¨सह सरकार के दौरान केंद्र के अफसरों को इसमें रखा गया था, इसीलिए एसआइटी की रिपोर्ट पर सवाल उठाना सही नहीं होगा। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को वही कहा, जो स्थानीय अदालत से लेकर हाईकोर्ट और एसआइटी कहता रहा है। यही नहीं, पंजाब के पूर्व पुलिस महानिदेशक केपीएस गिल ने भी दंगा रोकने के लिए मोदी के प्रयासों की प्रशंसा की थी।

मोदी को बदनाम करने में भाजपा विरोधियों ने कोई कसर नहीं छोड़ी

सारी सच्चाई सामने होने के बावजूद मोदी के खिलाफ चले दुष्प्रचार के लिए रचे गए षड़यंत्र का पर्दाफाश करते हुए अमित शाह ने कहा कि भाजपा विरोधी राजनीतिक दलों, एनजीओ और कुछ पत्रकारों ने एक संगठित गिरोह तक झूठ को प्रचारित करने का काम किया। गुजरात में जब भी इंवेस्टर्स समिट होती थी या मोदी विदेश दौरे पर जाते थे, तो उनकी छवि धूमिल करने के लिए झूठे लेख लिखे जाते थे। उन्होंने कहा कि इन लोगों का इकोसिस्टम इतना मजबूत और व्यापक था कि उनके द्वारा फैलाये गए झूठ को ही लोग सच समझने लगे। उन्होंने कहा कि अब तक सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि जाकिया जाफरी का इस्तेमाल दूसरे लोगों ने मोदी की छवि धूमिल करने के लिए किया है।

दंगों से भाजपा को फायदा होने की बात बेमानी

अमित शाह ने भाजपा पर मुस्लिम विरोधी होने और दंगा कराने के आरोपों को भी खारिज कर दिया। उन्होंने भाजपा के किसी भी राज्य के पांच साल के कार्यकाल और अन्य दलों के पांच साल के कार्यकाल के दौरान दंगे और उनमें हुई मौतों की तुलना करने की चुनौती दी। दंगे से भाजपा को फायदा होने का आरोप का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि ऐसा होता को भाजपा शासित राज्यों में ज्यादा दंगे होते, जो नहीं हो रहे हैं।

 

Edited By Ashisha Rajput

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