जेपी नड्डा का विपक्षी दलों पर निशाना, कहा- केवल हितस्वार्थ के लिए बना है इन दलों का कुनबा, दिलों से हैं दूर

भाजपा के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष जेपी नड्डा ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा है कि ये दिलों से अब तक भी एक नहीं हो सके हैं। ये केवल अपनी स्‍वार्थ पूर्ति के लिए ही एक साथ हैं।

Kamal VermaPublish: Mon, 18 Apr 2022 06:44 PM (IST)Updated: Mon, 18 Apr 2022 06:45 PM (IST)
जेपी नड्डा का विपक्षी दलों पर निशाना, कहा- केवल हितस्वार्थ के लिए बना है इन दलों का कुनबा, दिलों से हैं दूर

नई दिल्ली (जागरण ब्यूरो)। देश के अलग अलग हिस्सों में हुई घटनाओं के बाद विपक्षी नेताओं की ओर जताई गई सामूहिक चिंता को विपक्ष की वोट बैंक की छुद्र राजनीति करार देते हुए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इस समूह में शामिल दलों को इतिहास याद दिलाया और कहा कि सभी डरे हुए दल हैं। उनका चेहरा बेनकाब हो रहा है। इसीलिए फिर से विभाजनकारी राजनीति को बढ़ाना चाह रहे हैं। देशवासियों के नाम लिखे गए पत्र में हालांकि उन्होंने यह आशंका भी जता दी कि इन दलों का कुनबा केवल हितस्वार्थ के लिए बना है, इनका दिल अब भी नहीं मिला है।

दो दिन पहले ही कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, राकांपा प्रमुख शरद पवार, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, राजद के तेजस्वी, माकपा के सीताराम येचुरी समेत लगभग दो दर्जन दलों के नेताओं ने संयुक्त रूप से बयान जारी किया था कि देश में जिस तरह खाना, पहनावा, त्यौहार आदि को लेकर स्थिति उत्पन्न हुई है उससे चिंता है। जाहिर तौर पर उनकी ओर से भाजपा शासन पर निशाना साधा गया था और प्रधानमंत्री की चुप्पी पर भी सवाल दागा गया था।

सोमवार को खुद भाजपा अध्यक्ष की ओर से इसका करारा जवाब दिया गया। नड्डा ने इतिहास के जरिए विपक्ष को ही कठघरे में खड़ा कर दिया। उन्होंने याद दिलाया कि 1966 में इंदिरा गांधी ने गोहत्या पर रोक की मांग कर रहे कुछ साधुओं पर गोलियां चलवा दी थी, राजीव गांधी का एक बयान हजारों सिखों के कत्लेआम का कारण बना, गुजरात, मुरादाबाद, भागलपुर में दंगे कांग्रेस काल में हुए। 2013 में मुजफ्फरनगर में दंगा हुआ किसकी सरकार थी यह बताने की जरूरत नहीं है। 2012 का असम दंगा हो या फिर दलितों के खिलाफ अब तक का सबसे भीषण नरसंहार भी कांग्रेस काल में हुआ।

कांग्रेस को दलित विरोधी करार देते हुए नड्डा ने याद दिलाया कि बाबा साहेब आंबेडकर को चुनाव हरवाने वाली भी कांग्रेस ही थी। उन्होंने कांग्रेस से पूछा कि राजस्थान की करौली की घटना को क्यों भूल जाते हैं.? क्या मजबूरी है। नड्डा ने स्टालिन, पवार और ममता को भी आड़े हाथों लिया और कहा कि तमिलनाडु में सहिष्णुता का हाल ऐसा है कि एक कलाकार को अपमानित और मौखिक रूप से ¨ल¨चग किया गया क्योंकि उनकी विचारधारा उस राजनीतिक दल से नहीं मिलती थी।

गौरतलब है कि मशहूर संगीतकार इलैयाराजा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तारीफ की थी। ममता को उन्होंने बंगाल में हो रही राजनीतिक हत्याओं और महिलाओं के साथ हो रहे दुराचार की याद दिलाई तो महाराष्ट्र के गठबंधन सरकार के कैबिनेट में जबरन वसूली में शामिल मंत्रियों का सवाल खड़ा किया। नड्डा ने कहा कि दरअसल ये लोग जनता से रिजेक्ट किए हुए लोग हैं। घबड़ाए हुए लोग हैं और इसीलिए फिर बंटवारे की राजनीति के जरिए हित साधना चाहते हैं। लेकिन अब देश में दो तरह की धाराएं हैं- एक तरफ है राजग का प्रयास और विकास और दूसरी तरफ तुच्छ राजनीति करने वाली पार्टियों को समूह। ये फिर से साथ आ रहे हैं लेकिन यह मन से है या फिर राजनीतिक स्वार्थ के लिए यह वक्त बताएगा। 

Edited By Kamal Verma

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