आर्थिक संबंध मजबूत बनाने की दिशा में बेहद अहम हैं भारत और जापान के रिश्ते

जापान रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि उनकी टोक्यो यात्रा भारत-जापान के बीच आर्थिक संबंध मजबूत बनाने की दिशा में अहम साबित होगी। नरेन्द्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा के बीच हुई वार्ता में यह नजर भी आई।

Sanjay PokhriyalPublish: Wed, 25 May 2022 12:19 PM (IST)Updated: Wed, 25 May 2022 12:19 PM (IST)
आर्थिक संबंध मजबूत बनाने की दिशा में बेहद अहम हैं भारत और जापान के रिश्ते

डा. सुशील कुमार सिंह। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जापान यात्रा ऐसे समय में हुई जब दुनिया एक नए तनाव से जूझ रही है। रूस-यूक्रेन युद्ध के जब तीन महीने पूरे हो रहे हैं तब क्वाड की बैठक को अंजाम भी दिया गया। विदित हो कि साल 2007 से शुरू हुआ क्वाडिलेटरल सिक्योरिटी डायलाग (क्वाड) चार देशों का एक ऐसा समूह है, जो व्यापार और रक्षा साझेदारी को मजबूत करने का एक मंच है। हालांकि यह चीन की दृष्टि में हमेशा खटकता रहा है। इससे चीन के दक्षिण चीन सागर में एकाधिकार को न केवल चोट पहुंचती है, बल्कि विश्व की शक्तियों का एक साथ होना भी वह अपने खिलाफ मानता है। हालांकि क्वाड की अब तक की बैठकों में कोई बड़ा नतीजा शायद ही निकला हो। बावजूद इसके दुनिया के फलक पर इसे बाकायदा देखा जा सकता है। रणनीतिक तौर पर क्वाड के गठन के पीछे जापान की ही पहल थी।

उभरती अर्थव्यवस्था के रूप में भारत और तकनीकी रूप से दक्ष जापान मिलकर पूरे विश्व में एक अच्छी छाप छोड़ सकते हैं। भारत और जापान के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना अप्रैल 1952 में हुई थी। इस द्विपक्षीय संबंधों का यह 70वां साल है। भारत और जापान 21वीं सदी में वैश्विक साङोदारी की स्थापना करने के लिए आपसी समझ पहले ही दिखा चुके हैं। वह दौर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का था। इंडो-जापान ग्लोबल पार्टनरशिप इन द ट्वेंटी फस्र्ट सेंचुरी इस बात का संकेत था कि जापान भारत के साथ शेष दुनिया से भिन्न राय रखता है।

वास्तव में भारत-जापान के बीच आर्थिक संबंधों को तीन भागों में बांटा जा सकता है। पहला व्यापार, दूसरा निवेश और तीसरा आर्थिक सहायता। भारत में जापान का आर्थिक निवेश दोनों के आर्थिक संबंधों का एक महत्वपूर्ण पहलू है। हालांकि वर्ष 2001 के बाद से ही जापानी निवेश में तीव्रता देखी जा रही है, मगर मोदी शासनकाल में इसका स्वरूप व्यापक हो गया है। मार्च 2022 में जापान के प्रधानमंत्री दो दिवसीय भारत की यात्र आए थे। तब दोनों देशों के शीर्ष नेताओं ने द्विपक्षीय आर्थिक, सामरिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत बनाने समेत कई अन्य मुद्दों पर चर्चा की थी। जापान के प्रधानमंत्री ने अगले पांच वर्षो में भारत में 42 अरब डालर निवेश करने की घोषणा की थी। गौरतलब है कि जापान लंबे समय से भारत के शहरों के बुनियादी ढांचे के विकास में मदद कर रहा है।

जापान रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि उनकी टोक्यो यात्रा भारत-जापान के बीच आर्थिक संबंध मजबूत बनाने की दिशा में अहम साबित होगी। नरेन्द्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा के बीच हुई वार्ता में यह नजर भी आई। भारत के आटोमोबाइल क्षेत्र से लेकर औद्योगिक गलियारों तक में जापानी निवेश का वादा इसका सुबूत है।

[निदेशक, वाईएस रिसर्च फाउंडेशन आफ पालिसी एंड एडमिनिस्ट्रेशन]

Edited By Sanjay Pokhriyal

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