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मां दुर्गा की द्वितीय शक्ति का रूप है 'ब्रह्मचारिणी', देखें तस्वीरें

7 Photos Published Fri, 22 Sep 2017 12:44 PM (IST)
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मां दुर्गा की द्वितीय शक्ति का रूप ब्रह्मचारिणी का है। नवरात्र के दूसरे दिन माता ब्रह्मचारिणी का आवाहन ध्यान व पूजा की जाती है। ब्रह्म में लीन होकर तप करने के कारण इस महाशक्ति को ब्रह्मचारिणी की संज्ञा दी गई है। यह देवी ज्योतिर्मयी एवं अत्यन्त भव्य हैं। इनके दाहिने हाथ में जप की माला तथा बायें हाथ में कमण्डल रहता है। माता सदैव आनन्दमय रहती है।

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दूसरी दुर्गा ब्रह्मचारिणी को समस्त विद्याओं की ज्ञाता माना गया है। इनकी आराधना से अनंत फल की प्राप्ति और तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार, संयम जैसे गुणों की वृद्धि होती है।

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ब्रह्मचारिणी का अर्थ हुआ, तप की चारिणी यानी तप का आचरण करने वाली। दूसरे दिन मां के ब्रह्मचारिणी रूप की पूजा की जाती है। बनारस स्थित ब्रह्मचारिणी देवी मंदिर।

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ब्रह्मचारिणी का यह स्वरूप श्वेत वस्त्र पहने दाएं हाथ में अष्टदल की माला और बाएं हाथ में कमंडल लिए हुए सुशोभित है। सूरत में उमयाधाम स्थित ब्रह्मचारिणी देवी।

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कहा जाता है कि देवी ब्रह्मचारिणी अपने पूर्व जन्म में पार्वती स्वरूप में थीं। वह भगवान शिव को पाने के लिए 1000 साल तक सिर्फ फल खाकर रहीं और 3000 साल तक शिव की तपस्या सिर्फ पेड़ों से गिरी पत्तियां खाकर की। कड़ी तपस्या के कारण उन्हें ब्रह्मचारिणी कहा गया।

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महाशक्ति की आराधना का पर्व है नवरात्री। तीन हिंदू देवियों- पार्वती, लक्ष्मी और सरस्वती के नौ विभिन्न स्वरूपों की उपासना के लिए निर्धारित है, जिन्हें नवदुर्गा के नाम से जाना जाता है।

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नवरात्र में पहले तीन दिन पार्वती के तीन स्वरूपों की अगले तीन दिन लक्ष्मी माता के स्वरूपों और आखिरी के तीन दिन सरस्वती माता के स्वरूपों की पूजा करते हैं।

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