अपने पसंदीदा टॉपिक्स चुनें
Dainik Jagran Hindi News
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.
OK

तस्वीरें: अगर चाहते हैं लक्ष्मी की कृपा तो दि‍वाली पर करें ये सरल उपाय

8 Photos Published Wed, 18 Oct 2017 01:36 PM (IST)
//www.jagranimages.com/images/diwali-main_2017_10_18_133647_s.jpg

दिवाली भारत के सबसे बड़े और प्रतिभाशाली त्योहारों में से एक है। यह त्योहार आध्यात्मिक रूप से अंधकार पर प्रकाश की विजय को दर्शाता है। भारतवर्ष में मनाए जाने वाले सभी त्यौहारों में दीपावली का सामाजिक और धार्मिक दोनों दृष्टि से अत्यधिक महत्त्व है। इसे दीपोत्सव भी कहते हैं। दिवाली के दिन सर्वप्रथम पूज्‍यनीय गणेश जी, कुबेर और माता लक्ष्‍मी की वि‍धि‍विधान से पूजा करने से घर में सुख-समृद्ध‍ि का आगमन होता है। इस दिन शुभ मुहुर्त में एक चौकी पर नया कपड़ा बिछाकर सर्वप्रथम पूज्‍यनीय गणेश जी और उनके दाहिने भाग में माता लक्ष्मी को स्थापित करना चाहिए। मान्‍यता है की लक्ष्‍मी जी के साथ विष्‍णु जी़ और सरस्‍वती जी की पूजा करने से मां लक्ष्‍मी जल्‍दी प्रसन्‍न होती हैं।

//www.jagranimages.com/images/wrist_2017_10_18_133658_s.jpg

पूजा में कलाई पर धागा बांधें

पूजा करवाने वाले ब्राह्मण हमारी कलाई पर मौली बांधते हैं। इसे रक्षासूत्र, कलेवा या मौली कहा जाता है। इस मान्यता का सिर्फ धार्मिक ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक कारण भी है। मौली बांधने से त्रिदेव- ब्रह्मा, विष्णु और महेश और तीनों देवियों- लक्ष्मी, पार्वती और सरस्वती की कृपा प्राप्त होती है।विज्ञान की दृष्टि से मौली बांधने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है। जब यह धागा बांधा जाता है तो इससे कलाई पर हल्का सा दबाव बनता है। इस दबाव से त्रिदोष- वात, पित्त तथा कफ का नियंत्रित होता है।

//www.jagranimages.com/images/diwali-main-pic_2017_10_18_133712_s.jpg

कलाई पर धागा बांधने के बाद चावल पीछे फेंकें

पूजा में कलाई पर मौली यानी धागा बांधते समय हाथ में चावल दिए जाते हैं। धागा बांधने के बाद उन चावलों को पीछे फेंक दिया जाता है। इस प्रकार चावल पीछे फेंकने का भाव यह होता है कि चावल के साथ ही हमारी परेशानियां भी दूर हो जाएं। धागा बंधवाने वाले व्यक्ति के सभी दुख खत्म हो जाते हैं और कलाई पर मंत्रों के साथ बंधा हुआ धागा व्यक्ति की रक्षा करता है।

//www.jagranimages.com/images/forhead_2017_10_18_133734_s.jpg

तिलक लगाएं

किसी भी पूजा में तिलक लगाना महत्वपूर्ण परंपरा है। शास्त्रों के अनुसार हमें सूने माथे के साथ भगवान के सामने नहीं जाना चाहिए, क्योंकि यह शुभ नहीं माना जाता। माथे पर तिलक लगाना पूजा के लिए शुभ शकुन होता है। तिलक माथे पर या दोनों भौहों के बीच लगाया जाता है। तिलक कुमकुम या चंदन जैसी पवित्र चीजों से लगाया जाता है।इसका वैज्ञानिक कारण यह है कि तिलक लगाने से दिमाग शांत रहता है और मस्तिष्क को शीतलता मिलती है।

//www.jagranimages.com/images/sindoor_2017_10_18_133836_s.jpg

तिलक लगवाते समय सिर पर रूमाल रखें

पूजा करते समय या तिलक लगवाते समय सिर पर हाथ या रूमाल रखा जाता है। यह भगवान और तिलक लगाने वाले व्यक्ति के लिए सम्मान देना का एक तरीका है। पूजा करते समय कपड़ा सिर पर इसलिए भी रखा जाता है, ताकि पूजन से मिलने वाली ऊर्जा सिर से आकाश की ओर न निकल जाए। सिर मध्य भाग में दशम द्वार होता है, जो कि बहुत ही संवेदनशील होता है। वातावरण में मौजूद सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा का सीधा असर दशम द्वार से व्यक्ति पर होता है। दशम द्वार की सुरक्षा के लिए सिर पर रूमाल रखा जाता है।

//www.jagranimages.com/images/kpoor_2017_10_18_133847_s.jpg

आरती में कर्पूर जलाएं

शास्त्रों के अनुसार कर्पूर जलाने से अक्षय पुण्य प्राप्त होता है। जिस घर में नियमित रूप से कर्पूर जलाया जाता है, वहां पितृदोष या किसी अन्य ग्रह दोष का असर नहीं होता है। कर्पूर जलाने से वातावरण सकारात्मक, पवित्र और सुगंधित होता है। इसकी महक से हमारे विचारों में भी सकारात्मकता आती है।कर्पूर जलाने से वातावरण की शुद्ध हो जाता है।यदि आप रात को सोने से पहले कर्पूर जलाकर सोएंगे तो इससे स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होते हैं। ऐसा करने पर अनिद्रा की शिकायत दूर हो जाती है, बुरे सपने नहीं आते हैं।

//www.jagranimages.com/images/ganesh_2017_10_18_133859_s.jpg

दीपावली पर लक्ष्मी के साथ गणेशजी की पूजा भी जरूर करें

दीपावली पर लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व बताया गया है, लेकिन लक्ष्मी की पूजा के साथ ही श्रीगणेश की पूजा भी अनिवार्य रूप से करनी चाहिए। श्रीगणेश प्रथम पूज्य हैं और इनकी पूजा के बिना कोई मांगलिक काम पूरा नहीं हो सकता है। गणेशजी को शिवजी ने प्रथम पूज्य होने का वरदान दिया था, इसी कारण इनकी पूजा सबसे पहले की जाती है।

//www.jagranimages.com/images/mat_2017_10_18_134028_s.jpg

कुश के आसन पर बैठें

पूजा में बैठने के लिए विशेष प्रकार के आसन का उपयोग किया जाता है। यह कुश का बना होता है। कुश एक प्रकार की घास है। इस घास से बने आसन ही पूजा के लिए श्रेष्ठ बताए गए हैं। शास्त्रों के अनुसार कुश से बने आसन पर बैठकर पूजा करने से श्रेष्ठ फलों की प्राप्ति बहुत ही जल्दी होती है। इस संबंध में वैज्ञानिक मान्यता यह है कि कुश ऊर्जा का कुचालक है यानी कुश ऊर्जा को एक ओर से दूसरी ओर प्रवाहित नहीं होने देता है। इसीलिए कुश के आसन पर बैठकर ही पूजा करनी चाहिए।

राज्य चुनें
  • उत्तर प्रदेश
  • पंजाब
  • दिल्ली
  • बिहार
  • उत्तराखंड
  • हरियाणा
  • मध्य प्रदेश
  • झारखण्ड
  • राजस्थान
  • जम्मू-कश्मीर
  • हिमाचल प्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • पश्चिम बंगाल
  • ओडिशा
  • महाराष्ट्र
  • गुजरात
आपका राज्य