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अतीत के आईने से देखिए लोकसभा चुनाव की तस्वीरें

14 Photos Published Thu, 04 Apr 2019 11:13 AM (IST)
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प्रथम लोकसभा चुनाव के दौरान 16 जनवरी, 1952 को लखनऊ में पंडित जवाहर लाल नेहरू ने अपने चुनावी भाषण में कहा था, कांग्रेस कार्यकर्ताओं में पहले की सी लगन नहीं रही...। इस संबंध में दैनिक जागरण के 17 जनवरी, 1952 के अंक में प्रकाशित समाचार। जागरण

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उत्तर प्रदेश के गोंडा में 25 नवंबर 1978 को जयप्रभाग्राम की स्थापना के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में तत्कालीन राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी, बाला साहब देवरस और अन्य लोग जमीन पर बैठकर भोजन ग्रहण करते हुए। फाइल फोटो

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यह पेपर कटिंग दैनिक जागरण के छह फरवरी, 1977 के अंक की है। पांच फरवरी को दिल्ली के रामलीला मैदान से इंदिरा गांधी ने कांगे्रस के चुनाव अभियान का शंखनाद किया था। विराट आमसभा को संबोधित करते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा ने कहा था- किसी को भी वोट डालने से न रोका जाए... किसी भी प्रकार की हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, भले ही उसके पीछे किसी भी पार्टी का हाथ क्यों न हो...। इंदिरा ने कहा था- चुनाव में एक ही सवाल है देश की एकता और मजबूती का। देश में मजबूत केंद्रीय शासन की जरूरत है, नहीं तो भारत एक नहीं रह सकता। कांग्रेस ने सभी धर्मों और जातियों को एक साथ रखकर देश की एकता मजबूत की है...। कांग्रेस की इस सभा में कांग्रेस अध्यक्ष देवकांत बरुआ, रेल मंत्री कमलापति त्रिपाठी, विदेश मंत्री यशवंत राव चह्वाण और स्वर्ण सिंह ने भाषण दिया था।

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वर्ष 1981 के जून माह की प्रचंड गर्मी के दौरान उत्तर प्रदेश के बांदा जनपद के तिंदवारी विधानसभा क्षेत्र में बुलेट से (पीछे बैठे) पहुंचे उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह (राजा मांडा)। वीपी सिंह ने अपने चुनाव प्रचार में केवल दुपहिया वाहन के इस्तेमाल का निर्णय लिया था। उन्होंने अपने प्रचार में आई जीपों को भी वापस कर दिया था और पूरे विधानसभा क्षेत्र में बुलेट मोटर साइिकल पर अपने साथी राजेंद्र सिंह के साथ बैठकर चुनाव प्रचार किया। उनके प्रचार काफिले में दुपहिया वाहन ही चलते थे। इलाहाबाद के मूल निवासी राजेंद्र सिंह अब ग्रेटर नोएडा में रहते हैं। फाइल फोटो

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10 फरवरी, 1977 के अंक में दैनिक जागरण में प्रकाशित हुए समाचार की प्रति। लोकसभा चुनाव के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने चुनावी सभा में कहा था कि वैध चुनाव गतिविधियों पर किसी भी तरह का प्रतिबंध नहीं है, लेकिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसे गैर राजनीतिक संगठनों पर से पाबंदी नहीं हटाई जा सकती...। नई दिल्ली में मजदूरों की एक रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि कांग्रेस व्यक्तिगत आलोचनाओं में विश्वास नहीं रखती। हालांकि, हमारे पास भी दूसरों के बारे में कहने के लिए बहुत कुछ है...। इसी अंक में दैनिक जागरण ने नौ राज्यों व केंद्रीय क्षेत्रों की कांग्रेस प्रत्याशियों की घोषणा को भी प्रकाशित किया था। घोषित प्रत्याशियों में जम्मू-कश्मीर के ऊधमपुर से डॉ. कर्ण सिंह, अनंतनाग से तत्कालीन रेल राज्य मंत्री

मुहम्मद शफी कुरैशी का नाम शामिल था। घोषित अन्य प्रत्याशियों में तत्कालीन केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री विद्या चरण शुक्ल, तत्कालीन संचार मंत्री डा शंकर दयाल शर्मा के नाम शामिल थे।

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1979 में छठी लोकसभा भंग होने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने चुनावों की विधिवत घोषणा से पहले ही देशभर में तूफानी दौरे शुरू कर दिए थे। इसी कड़ी में इंदिरा गांधी चार दिसंबर, 1979 को उत्तराखंड दौरे पर आईं थीं। तब उन्होंने नैनीताल जिले के रामनगर स्थित एमपी इंटर कॉलेज के मैदान में जनसभा की थी। अल्मोड़ा, रुद्रपुर, काशीपुर और हल्द्वानी के तूफानी दौरे के चलते वह रामनगर रात 12 बजे पहुंचीं। सर्द रात के बावजूद लोग उनका भाषण सुनने के लिए मैदान में आधी रात तक डटे रहे। रामनगर पहुंचने तक के रास्ते में भी लोग चीड़ के पेड़ के छिलकों की मशाल लेकर उनकी अगवानी के लिए डटे हुए थे। उन्होंने इंटर कॉलेज के मैदान में जनसभा को संबोधित किया। (जागरण आर्काइव)

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आपातकाल का उद्देश्य प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और कांग्रेस का बचाव करना है ना कि लोकतंत्र का...। इंदिरा पर यह सीधा हमला 1977 के चुनावी महासमर में जनता पार्टी के उपाध्यक्ष चौधरी चरण सिंह ने किया था। वह 19 फरवरी, 1977 को उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में जनसभा कर रहे थे। 20 फरवरी के अंक में दैनिक जागरण ने इसे प्रथम पृष्ठ पर छापा था। तब दैनिक जागरण कानपुर और गोरखपुर से एक साथ प्रकाशित होता था। चरण सिंह ने कहा था, ...वर्ना क्या कारण है कि प्रधानमंत्री द्वारा देश में शांति की घोषणा के बाद भी आपात स्थिति नहीं हटाई जा रही है। आज शासन में निर्भीकता का कोई मूल्य नहीं है। सरकार को आज प्रधानमंत्री नहीं बल्कि उनके पुत्र संजय गांधी चला रहे हैं। वे ही मुख्यमंत्रियों को निकालते और बनाते हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री (एनडी तिवारी) उन्हीं की देन हैं। सामंतशाही का इससे बड़ा उदाहरण और क्या हो सकता है कि एक सामान्य नागरिक होते हुए भी संजय गांधी सरकारी खर्चों पर यात्रा करते हैं। राज्यपाल और मुख्यमंत्री उनकी अगवानी करने जाते हैं...। उधर, इसी दिन शांति निकेतन में इंदिरा गांधी पत्रकारों से मुखातिब थीं। दैनिक जागरण ने लिखा, विपक्षी दलों के इस आरोप के उत्तर में कि उनकी सरकार तानाशाही है, प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने प्रतिप्रश्न किया- चुनाव का क्या अर्थ होता है। हम चुनाव क्यों करा रहे हैं। चुनाव ही विरोधी दलों के आरोप का सबसे अच्छा खंडन है...।

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आपातकाल के बाद 1977 में हुए छठे आम चुनाव के दौरान राजनीतिक सरगर्मी चरम पर थी। इस चुनाव में अविभाजित उत्तर प्रदेश में जहां 85 सीटों के लिए 443 प्रत्याशी अंतिम रूप से मैदान में थे वहीं कांग्रेस चुनावी बाजी मारने के लिए पुरजोर कोशिश कर रही थी। गुवाहाटी में 22 फरवरी को आयोजित एक जनसभा में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने कहा कि आपात स्थिति हटाने अथवा मीसा या आपत्तिजनक सामग्री प्रकाशन निवारण कानून रद करने का लोकसभा चुनाव से कोई संबंध नहीं है। पिछले 19 महीनों के दौरान अनुशासन व शांति व्यवस्था संबंधी जो उपलब्धि हुई है, आपात स्थित हटाने से उनकी प्रक्रिया में रुकावट आ जाएगी। इंदिरा गांधी की इस सभा समेत कई अन्य चुनाव से संबंधित खबरों को दैनिक जागरण ने 23 फरवरी 1977 के अंक में प्रकाशित किया था। वहीं इस चुनावी माहौल में इंदिरा गांधी के बड़े बेटे संजय गांधी भी काफी सक्रिय थे। अमेठी में हुई एक सभा उन्होंने जनता पार्टी को मौसमी चिड़िया बताया था। जबकि कोलकाता में एक सभा को संबोधित करते हुए माक्र्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी के नेता ज्योति बसु ने चुनाव में बड़ी धांधली की आशंका जताई थी। (जागरण आर्काइव)

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1971 के संसदीय चुनाव के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी हरियाणा के सिरसा के गांव नाथूसरी चौपटा में लोकसभा चुनाव के दौरान रैली करने आई थीं। उस समय इंदिरा गांधी की लोकप्रियता चरम पर थी। उन्हें देखने और भाषण सुनने के लिए बड़ी संख्या में ट्रैक्टर ट्रालियों में लोग पहुंचे। इंदिरा का हेलीकॉप्टर लुदेसर गांव में उतरा और उन्हें रैली स्थल तक कार से ले जाया गया। रैली के दौरान धूल भरी आंधी चलने लगी थी, जो इंदिरा गांधी का भाषण खत्म होते तेज हो गई और टेंट पूरी तरह से उखड़ गया। कांग्रेस की ओर से चौ. दलबीर सिंह (कुमारी सैलजा के पिता) प्रत्याशी थे। वह चुनाव में विजयी रहे। मंच पर इंदिरा के साथ चौधरी भजनलाल, चौ. बंसीलाल, ठाकुर बहादुर सिंह व अन्य नेता भी थे। रैली की यह तस्वीर पूर्व विधायक ठाकुर बहादुर सिंह के बेटे भूपेंद्र सिंह राठौड़ ने सिरसा के मुख्य संवाददाता सुधीर आर्य को उपलब्ध कराई।

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इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देश आम चुनाव के दौर से गुजर रहा था। आठवीं लोकसभा के चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी ने घोषणा पत्र जारी किया। एक दिसंबर, 1984 को प्रकाशित अंक में दैनिक जागरण ने लिखा, भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में मूल्यों पर आधारित राजनीति, लोकतांत्रिक सरकार, धर्मनिरपेक्षता तथा गांधीवादी अर्थव्यवस्था के प्रति अपनी पूर्ण प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए लोगों को ऐसी सरकार का देने का वादा किया है, जो देश की एकता तथा अखंडता के प्रति समर्पित होगी। पार्टी की आर्थिक योजना में कृषि को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। सार्वजनिक क्षेत्र में उत्पादन बढ़ाने तथा उसे लाभप्रद बनाने को उस पर लगे नियंत्रण को कम किया जाएगा। ऐसी उपभोक्ता वस्तुओं की सूची बढ़ाई जाएगी, जिनका केवल लघु तथा कुटीर उद्योगों में निर्माण किया जाएगा। पार्टी ने कर ढांचे में सुधार की बात की है। कोई नया कर नहीं लगाने, आयकर की न्यूनतम सीमा बढ़ाकर 30,000 रुपये करने तथा चुंगी एवं बिक्री कर को पूरी तरह समाप्त करने का आश्वासन दिया है...। इसी अंक में दैनिक जागरण ने लिखा, देशभर में लोकसभा की 514 सीटों के लिए लगभग 3500 प्रत्याशियों के नाम वापस ले लेने के बाद लगभग 5000 उम्मीदवार अब मैदान में हैं। नाम वापसी की आज अंतिम तारीख थी...। जागरण आर्काइव

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देश में इमरजेंसी के बाद जब हालात सुधरे तो 1977 में चुनावों की घोषणा हो गई। कांग्रेस में घुटन महसूस कर रहे बाबू जगजीवन राम ने अपनी पार्टी ‘कांग्रेस फॉर डेमोक्रेसी‘ का गठन किया। इसके बाद कांग्रेस के खिलाफ जंग छेड़ने के लिए उस वक्त जनसंघ, शिरोमणि अकाली दल और अन्य क्षेत्रीय दलों के विलय से बनी जनता पार्टी में अपनी पार्टी को भी जोड़ा। जनता पार्टी का हिस्सा बनने के बाद जगजीवन राम जालंधर में सभी के संयुक्त उम्मीदवार इकबाल सिंह ढिल्लों का चुनाव प्रचार करने के लिए जालंधर में आए। जगजीवन राम के विचार सुनने के लिए शहर में लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। जालंधर के बलर्टन पार्क में उन्होंने रैली को संबोधित किया। इस चुनाव में पहली बार गठबंधन के उम्मीदवार ने कांग्रेस के गढ़ में सेंध लगाई थी।

जागरण आर्काइव

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सभी दलों की राजनीति, नीति और कार्यक्रम कटुता, घृणा और हिंसा से मुक्त हों। यदि किसी क्षेत्र में सभी दल आपस में सहयोग कर सकते हैं तो उन्हें ऐसा करना चाहिए। हमें क टुता को रास्ते में नहीं आने देना चाहिए...। 1977 के लोकसभा चुनाव के दौरान उक्त बात तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने एक सार्वजनिक सभा के दौरान कही। 19 फरवरी, 1977 को प्रकाशित अपने अंक में दैनिक जागरण ने लिखा- प्रधानमंत्री ने कहा, मेरे कहने का तात्पर्य यह है कि यद्यपि बहुत से क्षेत्रों में हम एक दूसरे का विरोध कर सकते हैं, लेकिन यदि ऐसा कोई क्षेत्र है जिसमें परस्पर सहयोग संभव है तो हमें ऐसा करना चाहिए। उदाहरण के लिए जब देश पर आक्रमण हुआ, तब हम लोगों ने सहयोग से काम लिया। हालांकि, उस समय भी कुछ गु्रपों ने स्थिति का लाभ उठाने की कोशिश की...।

(जागरण आर्काइव)

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मंडी (हिमाचल प्रदेश) : ‘भाषण मेरा सुनते हो, वोट कांग्रेस को देते हो। अगर इस बार भी मंडी की जनता ने ऐसा ही किया तो मैं दोबारा कभी यहां नहीं आऊंगा।’ 1989 के लोकसभा चुनाव में मंडी संसदीय क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी महेश्वर सिंह के समर्थन में आयोजित रैली में अटल बिहारी वाजपेयी ने जब यह बात कही तो लोग पानी-पानी हो गए थे। राजीव गांधी मंत्रिमंडल में खाद्य व आपूर्ति राज्यमंत्री पंडित सुखराम कांग्रेस प्रत्याशी थे, लेकिन वाजपेयी की रैली के बाद सुखराम हार गए। रैली में भीड़ देख वाजपेयी ने कहा था कि हर चुनाव में वह मंडी आते हैं। हजारों की संख्या में लोग भाषण सुनने पहुंचते हैं, लेकिन जब चुनाव परिणाम सामने आते हैं तो यहां से कांग्रेस की जीत होती है। तब मतदाताओं ने वाजपेयी की बात का मान रखा था। भाजपा के महेश्वर सिंह जीते थे। महेश्वर सिंह इस चित्र में नहीं हैं (सभा को संबोधित कर रहे थे)।

(जागरण आर्काइव)

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जनता पार्टी की बुलंदी के समय प्रधानमंत्री बनने से पूर्व रेवाड़ी में चुनावी सभा को संबोधित करते चौ. चरणसिंह। यह फोटो 1979 का है। हमें यह फोटो भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष स्व.ओमप्रकाश ग्रोवर के पुत्र सुनील ग्रोवर ने उपलब्ध करवाया है।

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