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तस्वीरों में देखें कुंभ में आए अखाड़ों का इतिहास

8 Photos Published Tue, 15 Jan 2019 04:52 PM (IST)
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मकर संक्रांति के प्रथम शाही स्नान के साथ कुंभ मेले का आगाज हो चुका है। प्रथम शाही स्नान पर मंगलवार को दोपहर करीब 12 बजे तक 85 लाख श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाई। मेला 4 मार्च तक चलेगा। कुंभ का साक्षी बनने के लिए लाखों साधु-संत आए हैं। 13 मान्यता प्राप्त अखाड़े हैं। इनमें से सात शैव, तीन वैष्णव व तीन उदासीन (सिक्ख) अखाड़े रहेंगे। इसके अलावा जूना अखाड़ा में समाहित हो चुका किन्नर अखाड़ा भी कुंभ का साक्षी बन गया है।

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जूना अखाड़ा (शैव)

जूना अखाड़ा पहले भैरव अखाड़े के रूप में जाना जाता था। दरअसल, उस वक्त इनके इष्टदेव भैरव थे। भैरव भगवान शिवजी के रूप हैं। वर्तमान में इस अखाड़े के इष्टदेव भगवान दत्तात्रेय हैं, जो कि रुद्रावतार हैं। इस अखाड़े के अंतर्गत आवाहन, अलखिया व ब्रह्मचारी भी हैं।

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श्री पंचायती अखाड़ा निरंजनी

निरंजनी अखाड़े की स्थापना वर्ष 1904 में गुजरात के मांडवी नामक स्थान पर हुई थी। हालांकि, इस तिथि को निरंजनी स्वीकार नहीं करते। ऐसा इसलिए, क्योंकि उनके पास एक प्राचीन तांबे की छड़ है। इस पर निरंजनी अखाड़े के स्थापना के बारे में विक्रम संवत् 960 अंकित है। इस अखाड़े के इष्टदेव भगवान कार्तिकेय हैं, जो देवताओं के सेनापति हैं। निरंजनी अखाड़े के साधु शैव हैं व जटा रखते हैं।

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आवाहन अखाड़ा (शैव)

यह अखाड़ा जूना अखाड़े से सम्मिलित है। इस अखाड़े की स्थापना 547 में हुई थी, लेकिन जदुनाथ सरकार इसे 1547 बताते हैं। इस अखाड़े का केंद्र दशाश्वमेघ घाट, काशी में है। इस अखाड़े के संन्यासी भगवान श्रीगणेश व दत्तात्रेय को अपना इष्टदेव मानते हैं।

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अटल अखाड़ा (शैव)

इस अखाड़े के इष्टदेव भगवान श्रीगणेश हैं। इनके शस्त्र-भाले को सूर्य प्रकाश के नाम से जाना जाता है। इस अखाड़े की स्थापना गोंडवाना में सन् 647 में हुई थी। इसका केंद्र काशी में है। इस अखाड़े का संबंध निर्वाणी अखाड़े से है।

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आनंद अखाड़ा (शैव)

यह अखाड़ा विक्रम संवत् 856 में बरार में बना था, जबकि सरकार के अनुसार, विक्रम संवत् 912 है। इस अखाड़े के इष्टदेव सूर्य हैं।

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अग्नि अखाड़ा (शैव)

अग्नि अखाड़े की स्थापना सन् 1957 में हुई थी, हालांकि इस अखाड़े के संत इसे सही नहीं मानते। इसका केंद्र गिरनार की पहाड़ी पर है। इस अखाड़े के साधु नर्मदा-खण्डी, उत्तरा-खण्डी व नैस्टिक ब्रह्मचारी में विभाजित है।

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निर्मल अखाड़ा (सिक्ख)

इस अखाड़े की स्थापना सिख गुरु गोविंदसिंह के सहयोगी वीरसिंह ने की थी। ये सफेद कपड़े पहनते हैं। इसके ध्वज का रंग पीला या बसंती होता है और ऊन या रुद्राक्ष की माला हाथ में रखते हैं।

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