मेरा लक्ष्य देश के लिए कामनवेल्थ और ओलिंपिक का स्वर्ण पदक जीतना है : लक्ष्य सेन

लक्ष्य सेन ने कहा कि आत्मविश्वास के साथ जीत का पूरा भरोसा था। हमारी युवा टीम पूरे जोश से भरी हुई थी। तालमेल भी बहुत अच्छा था। विश्व रैंकिंग के शीर्ष-10 में रहने वाले खिलाड़ी टीम का हिस्सा थे। तो भरोसा था इस बार जरूर इतिहास लिखा जाएगा।

Sanjay SavernPublish: Tue, 17 May 2022 08:34 PM (IST)Updated: Tue, 17 May 2022 08:34 PM (IST)
मेरा लक्ष्य देश के लिए कामनवेल्थ और ओलिंपिक का स्वर्ण पदक जीतना है : लक्ष्य सेन

बैडमिंटन खिलाड़ी लक्ष्य सेन की शानदार शुरुआत के साथ भारतीय टीम ने 73 वर्ष बाद इतिहास रचा। टीम का अहम हिस्सा रहे लक्ष्य ने भारतीय खिलाड़ियों का मनोबल ही नहीं बढ़ाया, बल्कि टीम में जोश भर थामस कप जीतने के लिए प्रेरित किया। सभी खिलाड़ियों ने श्रेष्ठ प्रदर्शन कर थामस कप भारत की झोली में डाला। मूल रूप से उत्तराखंड के अल्मोड़ा के लक्ष्य सेन की प्रतिभा देख उनके पिता व कोच डीके सेन ने 2011 में 10 साल की उम्र में ही उन्हें प्रकाश पादुकोण अकादमी बेंगलुरु भेज दिया था। तब तक लक्ष्य राष्ट्रीय स्तर पर कई प्रतियोगिताएं जीत चुके थे। उनके खेल में लगातार सुधार हो और कोई दिक्कत न आए, इसलिए माता-पिता व भाई चिराग सेन भी 2018 में बेंगलुरु शिफ्ट हो गए। पिता डीके सेन उनके कोच के रूप में हमेशा साथ रहते हैं। दैनिक जागरण संवाददाता चंद्रशेखर द्विवेदी से फोन पर बातचीत में लक्ष्य सेन ने कहा कि मेरा अगला लक्ष्य कामनवेल्थ गेम्स व ओलिंपिक में स्वर्ण पदक जीतना है। पेश हैं इस बातचीत के प्रमुख अंश :-

-क्या इस बार सोचा था कि भारत इतिहास बनाएगा?

--आत्मविश्वास के साथ जीत का पूरा भरोसा था। हमारी युवा टीम पूरे जोश से भरी हुई थी। तालमेल भी बहुत अच्छा था। विश्व रैंकिंग के शीर्ष-10 में रहने वाले खिलाड़ी टीम का हिस्सा थे। तो भरोसा था इस बार जरूर इतिहास लिखा जाएगा।

-थामस कप के दौरान आपको किन-किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा?

--चुनौती सबसे पहले थी विश्व रैंकिंग में चोटी के खिलाड़ियों के साथ मुकाबला। इसके बाद दूसरी चुनौती मैदान ने दी। बैड¨मटन कोर्ट फिसलन वाला था। अच्छी गुणवत्ता का नहीं था। जिससे दिक्कत होना स्वभाविक था। मुझे फीवर और लूजमोशन भी हो गए थे, जिससे थोड़ी कमजोरी थी। उसके बाद भी हिम्मत नहीं हारी। जीत के जुनून ने लक्ष्य के करीब पहुंचाया।

-थामस कप में सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी किस टीम को मान रहे थे। उसे पटखनी देने की क्या रणनीति रही?

--मलेशिया, इंडोनेशिया मुख्य प्रतिद्वंद्वी टीमें रहीं। मलेशिया पांच बार जीत चुका था और इंडोनेशिया तो लगातार 10 से भी अधिक बार जीत चुका था। इसलिए इन टीमों से चुनौती मिलना स्वभाविक था। इसके लिए हम तैयार भी थे। सभी टीमों की कमजोरी व ताकत को अभ्यास के दौरान बखूबी समझा था।

-पहला मुकाबला जीत से शुरू करने के बाद आपके मन में क्या चल रहा था?

--सभी को यकीन था की अच्छा करेंगे। जीते नहीं भी तो प्रदर्शन से देश का नाम रोशन जरूर होगा। सभी खिलाडि़यों ने अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन देकर जीत हासिल कर ली।

-अब लक्ष्य का अगला लक्ष्य क्या है?

--थामस कप के बाद अब इंडोनेशिया व मलेशिया में होने वाली प्रतियोगिता को जीतने पर फोकस रहेगा। इसके बाद कामनवेल्थ गेम्स है, जिसकी तैयारी चल रही है। वहां भी स्वर्ण पदक जीतने का लक्ष्य है। उसके बाद लक्ष्य का भी वही लक्ष्य है जो सभी खिलाड़ियों का होता है, ओलिंपिक में शामिल होकर देश को स्वर्ण पदक दिलाना है।

-थामस कप जैसे बड़े खेल के लिए किस तरह की तैयारियां की गई थीं?

--तैयारी को लेकर अलग से कोई शिविर नहीं लगाए गए थे, इसके लिए सभी लोगों को पता था कि टीम बेहतर है। अपने-अपने स्तर से हर खिलाड़ी तैयारी कर रहा था। सबसे बड़ी चीज थी सबसे मिलकर खेला। जो एक-दूसरे की ताकत भी बनी।

-जीत का श्रेय किसे देते है, आपके अलावा किस खिलाड़ी का प्रदर्शन बेहतरीन रहा?

--माता-पिता, टीम, कोच, प्रशिक्षण लेने वाले साथी और टूर्नामेंट का हिस्सा रहे सभी 10 खिलाड़ियों को इसका श्रेय जाता है। आने वाले दिनों में खिलाड़ी और बेहतर प्रदर्शन करेंगे। युवा खिलाड़ियों में संभावनाएं बहुत हैं।

-बैडमिंटन में उभरते खिलाड़ियों को क्या संदेश देंगे?

--कड़ी मेहनत, अनुशासन, समर्पण, ये तीन चीजें हों तो किसी को सफल होने से कोई नहीं रोक सकता है।

Edited By Sanjay Savern

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