थामस कप की जीत से उत्साहित भारतीय बैडमिंटन संघ दो और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट की मेजबानी को तैयार

बाई के सचिव संजय मिश्रा ने दैनिक जागरण से कहा रविवार को हमारी कार्यकारी समिति की बैठक हुई। बाई अध्यक्ष और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की सलाह के बाद हमने यह फैसला किया है कि भारत में अधिक अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट का आयोजन किया जाना चाहिए।

Sanjay SavernPublish: Mon, 16 May 2022 09:12 PM (IST)Updated: Mon, 16 May 2022 09:12 PM (IST)
थामस कप की जीत से उत्साहित भारतीय बैडमिंटन संघ दो और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट की मेजबानी को तैयार

अभिषेक त्रिपाठी, नई दिल्ली। भारतीय पुरुष टीम के थामस कप में स्वर्ण पदक जीतने से भारतीय बैडमिंटन संघ (बाई) काफी उत्साहित है और उसने दो और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट की मेजबानी करने का फैसला किया है। बाई का लक्ष्य देश में अधिक अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट की मेजबानी के साथ ही राष्ट्रमंडल खेल, एशियाई खेल, ओलिंपिक और विश्व चैंपियनशिप जैसे बड़े टूर्नामेंटों में टीम की तैयारी को बेहतर करना है, जिससे खिलाड़ी देश के लिए अधिक पदक जीतें।

बाई के सचिव संजय मिश्रा ने दैनिक जागरण से कहा, 'रविवार को हमारी कार्यकारी समिति की बैठक हुई। बाई अध्यक्ष और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की सलाह के बाद हमने यह फैसला किया है कि भारत में अधिक अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट का आयोजन किया जाना चाहिए। अभी हमारे यहां दिल्ली में सुपर-500 इंडिया ओपन, लखनऊ में सुपर-300 सैयद मोदी मेमोरियल और सुपर 100 ओडिशा ओपन का आयोजन होता है। इसके साथ ही पुणे में जूनियर इंटरनेशनल और बेंगलुरु में इंटरनेशनल चैलेंज का आयोजन होता है। आज अगर यूरोप में कोई टूर्नामेंट होता है तो हमारे 40 खिलाड़ी वहां खेलने जाते हैं और एक खिलाड़ी पर सब मिलाकर डेढ़-दो लाख रुपये खर्च होते हैं। हम लोगों ने अध्यक्ष से अपील की और सभी ने फैसला किया कि हम दो और अंतरराष्ट्रीय चैलेंज की मेजबानी करने के लिए तैयार हैं। हम विश्व बैडमिंटन महासंघ (बीडब्ल्यूएफ) से इसकी मेजबानी हासिल करने की अपील करेंगे और अगर ऐसा हो जाता है तो अगले साल से हम लोग दो अतिरिक्त अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट की मेजबानी करेंगे।'

उन्होंने कहा, 'बैठक में अध्यक्ष का कहना था कि हमें आगे भी अगर अच्छा करना है तो हमारे पास कोच अच्छे होने चाहिए। अभी हम सभी राज्य संघों से कहेंगे कि अपने-अपने राज्यों से दो-दो कोच के नाम की सूची बाई को दें। उसके बाद हम चार-चार कोचों के दल को बारी-बारी से दो नेशनल कोचिंग सेंटर में दो सप्ताह के लर्निग डेवलपमेंट प्रोग्राम के लिए भेजेंगे, जिससे वहां सीखने के बाद वे राज्य में जाकर और बेहतर काम कर सकें। अध्यक्ष का कहना है कि साई तो हमें सहायता देता ही है लेकिन इसके अलावा हम 30 कोच की नियुक्ति करेंगे, इसमें सीनियर खिलाड़ी भी होंगे जो खेल चुके हैं लेकिन बैडमिंटन से जुड़े रहना चाहते हैं। इसके लिए बाई वेबसाइट पर आवेदन निकाले जाएंगे। आवेदन के आधार पर हम चयन करेंगे और अलग-अलग राज्यों में भेजेंगे। इनका वेतन बाई देगा। उनका वेतन काबिलियत पर निर्भर करेगा। उन कोचों को साल में एक बार राष्ट्रीय सेंटर में आना होगा जिसमें उनके प्रदर्शन की समीक्षा होगी।'

संजय ने कहा, 'बाई इसके साथ ही अंडर-11 के लिए एक टूर्नामेंट की शुरुआत करेगा। पंचकूला और नागपुर में राष्ट्रीय सेंटर खोलने की भी हमारी योजना है। हमारी कोशिश होगी कि राष्ट्रमंडल खेलों में हम ज्यादा से ज्यादा पदक देश के लिए लाएं। थामस कप में जीत हासिल करना हमारे लिए बूस्टर रहा। अब खिलाड़ी किसी भी बड़े टूर्नामेंट में दबाव नहीं लेंगे और मुझे यकीन है कि आगे भी टीम हम सभी को गौरवान्वित करती रहेगी।'

Edited By Sanjay Savern

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