Dangerous Hill Station In Himachal : हिमाचल के ये हिल स्‍टेशन खूबसूरत के साथ खतरनाक भी, जरा सी चूक और भुगतना पड़ेगा खामियाजा

Dangerous Hill Station In Himachal मानसून के साथ हिमाचल के पहाड़ भी अब खतरनाक हो गए हैं। हिमाचल आने वाले सैलानी भी जरा संभल जाएं। हिल स्‍टेशन की सड़कों पर जरा सी चूक आपकी जान जोखिम में डाल सकती है। गाड़ी संभलकर चलानी होगी।

Virender KumarPublish: Sat, 02 Jul 2022 05:05 PM (IST)Updated: Sat, 02 Jul 2022 05:05 PM (IST)
Dangerous Hill Station In Himachal : हिमाचल के ये हिल स्‍टेशन खूबसूरत के साथ खतरनाक भी, जरा सी चूक और भुगतना पड़ेगा खामियाजा

मनाली, जागरण संवाददाता।

Dangerous Hill Station In Himachal, हिमाचल में मानसून ने दस्‍तक दे दी है। ऐसे में अब पहाड़ाें का सफर सुरक्षित नहीं है। खासतौर पर कुल्‍लू, मंडी व लाहुल-स्‍पीति में सबसे ज्‍यादा भूस्‍खलन के मामले सामने आते हैं। यहां पर पर्यटकों की आवाजाही भी अधिक रहती है। ऐसे में यहां सफर करने वाले पर्यटकों व अन्‍य लोगों काे विशेष एहतियात बरतने की आवश्‍यकता रहती है। कुल्लू, मनाली व लाहुल कुछेक स्थानों पर वाहन सावधानीपूर्वक चलाने की जरूरत है। खासकर अन्‍य राज्‍यों से आने वाले पर्यटकों को क्‍योंकि सैलानियों को पहाड़ पर गाड़ी चलाने का कम अनुभव होता है। ऐसे में बरसात में भूस्खलन के कारण सड़कों पर सफर करना खतरनाक हो जाता है।

मंडी : पद्धर क्षेत्र के दुंधा में पहली बरसात में लबालब हुई चौरा-कुम्हारडा सड़क। जागरण

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मंडी से शुरू हो जाता है सिलसिला

मंडी पहुंचते ही सफर में रुकावट आना शुरू हो जाएगी। इसलिए मंडी पहुंचते ही यह जानकारी जुटा लें कि मंडी कुल्लू नेशनल हाईवे पर ट्रैफ़िक सुचारू है या नहीं। अगर ट्रैफिक बंद है तो मंडी से कटौला होते हुए कुल्लू मनाली का रुख करें। अगर ट्रैफिक सुचारू है तब नेशनल हाईवे का ही रुख करें। इस मार्ग पर फोरलेन सड़क का निर्माण कार्य चला हुआ है। बरसात में भूस्खलन का खतरा अधिक रहता है। इसलिए मंडी से लेकर नगवाईं तक सावधनी बरतने की अधिक आवश्यकता है। नगवाईं से कुल्लू तक खतरा कम है। कुल्लू से मनाली के बीच भी जगह-जगह भूस्खलन का खतरा रहता है, इसलिए इस बीच भी सावधानी की जरूरत है।

जोगेंद्रनगर : मंडी-पठानकोट एनएच पर ढेलू के नजदीक भूस्खलन से अटकी चट्टान हादसे के लिए तैयार।   जागरण, फाइल फोटो

मनाली पहुंचने के बाद आगे लेह व काजा जाने का कार्यक्रम है तो और अधिक सावधानी बरतनी पड़ेगी। लाहुल घाटी के अधिकतर नालों में बाढ़ जुलाई अगस्त में ही आती है, इसलिए नालों को पार करते हुए सतर्क रहना होगा। हालांकि बीआरओ (Border Road Organisation) ने मनाली-लेह मार्ग को चकाचक कर लिया है।

मंडी जिला के सात मील में पहड़ी से गिरे पत्थर की चपेट में आई कार। 

मनाली से लेह रवाना होने से पहले प्रशासन व पर्यटन से जुड़े संगठनों से मार्ग बहाली की जानकारी अवश्य ले लें। सभी परिस्थितियों को सामान्य होता देख ही मनाली से लेह की ओर निकलें। रास्ते में सरचू रुककर जानकारी लेने के बाद आगे बढ़ें। सुखद यह है कि अब इस मार्ग पर जगह जगह सिग्नल होने से दूर संचार की सुविधा मिल गई है। दूसरी ओर ऐतिहासिक झील चंद्रताल व काजा के सफर में रोमांच तो बहुत है, लेकिन खतरा भी कम नहीं है।

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ग्रांफू-काजा मार्ग पर भी जगह-जगह भूस्खलन

ग्रांफू-काजा मार्ग।

ग्रांफू-काजा मार्ग पर भी जगह-जगह भूस्खलन होने का खतरा रहता है। ग्रांफू, छतड्डू, छोटा दड़ा, बड़ा दड़ा से लोसर तक सड़क की हालत बेहतर न होने से जोखिम अधिक है। इस मार्ग पर छतड़ू से लोसर के बीच दूरसंचार सुविधा नहीं है। इसलिए पूरी तैयारी के साथ सफर करें।

क्‍या कहते हैं अधिकारी

  • एसडीएम मनाली डाक्‍टर सुरेंद्र ठाकुर ने कहा अब ट्रैकिंग कारोबार गति पकड़ेगा। इसलिए ट्रैकिंग से जुड़े लोगों को सावधानी पूर्वक काम करने की जरूरत है। बरसात को देखते हुए व मौसम की जानकारी लेने के बाद ही ट्रैकिंग करें। पर्यटकों को खासतौर पर सावधानी बरतने की जरूरत है।                                                
  • उपायुक्त लाहुल स्पीति नीरज कुमार ने कहा कि बरसात को लेकर प्रशासन तैयारी में जुट गया है। उन्होंने कहा कि पर्यटक सफर करने से पहले प्रशासन से विस्तृत जानकारी ले लें और ट्रैकिंग में जाने से पहले पुलिस को सूचित करें, ताकि विपदा पड़ने पर आसानी से मदद पहुंचाई जा सके।

Edited By Virender Kumar

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