मधुबनी के गांवों में फैल रही सफेद चंदन की खुशबू

मधुबनी । मधुबनी जिले में सफेद चंदन की खेती की जा रही है। लदनियां प्रखंड के कुमरखत गांव के शिक्षक राकेश कुमार रोशन छौरही के आधा युवा किसान अविनाश कुमार भोला यादव रामकुमार सहित जिले के एक दर्जन किसानों ने करीब ढाई एकड़ में डेढ़ हजार सफेद चंदन के पौधों की खेती शुरू की है।

JagranPublish: Sun, 03 Jul 2022 11:18 PM (IST)Updated: Sun, 03 Jul 2022 11:18 PM (IST)
मधुबनी के गांवों में फैल रही सफेद चंदन की खुशबू

मधुबनी । मधुबनी जिले में सफेद चंदन की खेती की जा रही है। लदनियां प्रखंड के कुमरखत गांव के शिक्षक राकेश कुमार रोशन, छौरही के आधा युवा किसान अविनाश कुमार, भोला यादव, रामकुमार सहित जिले के एक दर्जन किसानों ने करीब ढाई एकड़ में डेढ़ हजार सफेद चंदन के पौधों की खेती शुरू की है। राकेश कुमार रोशन द्वारा एक एकड़ में तीन साल पूर्व की गई चंदन पौधों की लंबाई करीब पांच फीट हो गई है। सभी किसान ऊसर खेत में 10 फीट की दूरी पर चंदन पौधों के बीच अरहर, सरसों, अदरक, हल्दी का फसल ले रहे है। चंदन की फसल पर बाढ़-सुखाड़ का कोई खास असर नहीं होता है। चंदन पौधों को प्रारंभिक दो-तीन वर्षों तक समुचित अधिक देखभाल की जरूरत होती है। उसके बाद इसकी कम देखभाल पर भी बेहतर खेती होती है। चंदन एक परोपजीवी पेड़ है। जिसकी ऊंचाई 18 से 25 फीट होती है। मधुबनी सहित मिथिला की मिट्टी व वातावरण चंदन की खेती के लिए उपयुक्त है। गोरखपुर की शबला सेवा संस्थान से चंदन खेती की मिली प्रेरणा : किसान राकेश कुमार रोशन ने बताया कि सफेद चंदन की खेती के लिए गोरखपुर की शबला सेवा संस्थान से प्रेरणा मिली है। संस्थान के अध्यक्ष किरण यादव 400 चंदन के पौधे निशुल्क मिला। शेष 600 पौधे 80 रूपये प्रति मूल्य पर खरीदा था। संस्थान के अध्यक्ष ने बताया कि मधुबनी सहित राज्य के अन्य जिलों में सफेद चंदन की खेती के लिए संस्था इच्छुक किसानों को शुरू में चंदन का पौधा निशुल्क देते है। मधुबनी के 15 किसानों को दस-दस पौधे निशुल्क दिए हैं। वहीं सीतामढ़ी में 150 किसानों में पांच-पांच पौधा वितरित किए हैं। चंदन लकड़ियों की खरीदारी संस्थान द्वारा की जाएगी। एक एकड़ में चंदन की खेती से एक से डेढ़ करोड़ रुपए की आमदनी का अनुमान : राकेश के अनुसार, सफेद चंदन एक किलो लकड़ी 10 हजार रुपये तक में बिक रही है। सफेद चंदन के तेल की खूब मांग होती है। चंदन पेड़ के छिलके की मांग अगरबत्ती, साबुन व आयुर्वेदिक दवा बनाने वाली कंपनियों में होती है। आमतौर पर प्रतिवर्ष एक एकड़ में धान व गेहूं की फसल से लागत छोड़कर करीब 30 हजार रुपये की बचत होती है। इस तरह 15 वर्षों में अधिकतम साढ़े चार लाख रुपये की आमदनी होती है। जबकि एक एकड़ में चंदन की खेती से 12 से 15 वर्ष में एक से डेढ़ करोड़ रुपए की आमदनी का अनुमान है।

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'राकेश कुमार रोशन सहित जिले के अन्य किसानों द्वारा सफेद चंदन की खेती शुरू किया जाना सराहनीय प्रयास है। चंदन की खेती से किसान अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। जिले के अन्य किसानों को भी सफेद चंदन की खेती की ओर आगे आना चाहिए।'

- राकेश कुमार, सहायक निदेशक, उद्यान, मधुबनी।

Edited By Jagran

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