विषकुंभ व प्रीति योग में 14 से शुरू होगा सावन, मंदिरों व शिवालयों में भोलेनाथ का जलाभिषेक कर श्रद्धालु मांगेगे मन्नतें

सावन का महीना भोलेनाथ की पूजा के लिए बहुत खास माना गया है। यह माह भगवान भोलेनाथ की भक्ति और साधना का है।

JagranPublish: Sun, 03 Jul 2022 10:35 PM (IST)Updated: Sun, 03 Jul 2022 10:35 PM (IST)
विषकुंभ व प्रीति योग में 14 से शुरू होगा सावन, मंदिरों व शिवालयों में  भोलेनाथ का जलाभिषेक कर श्रद्धालु मांगेगे मन्नतें

जासं, सिवान : सावन का महीना भोलेनाथ की पूजा के लिए बहुत खास माना गया है। यह माह भगवान भोलेनाथ की भक्ति और साधना का है। महादेव का प्रिय महीना इस बार 14 जुलाई से शुरू होगा और 12 अगस्त को समाप्त होगा। 30 दिनों के सावन में इस बार चार सोमवारी व्रत होगा। प्रथम सोमवारी 18 जुलाई, दूसरी सोमवारी 25 जुलाई, तीसरी सोमवार एक अगस्त, और चौथी सोमवार 8 अगस्त को है। वहीं 12 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा है। सावन मास को सर्वोत्तम मास कहा जाता है। मान्यता है कि सावन में भगवान भोलेनाथ के रुद्राभिषेक, पार्थिव पूजा, शिव सहस्त्रनामा का पाठ करने से शिव की विशेष कृपा बरसती है। मान्यता है कि जो व्यक्ति सावन मास की शिवरात्रि व सोमवारी को जलाभिषेक करके भोलेनाथ की विधि-विधान से पूजा करता है, उसकी सभी मुरादें पूरी होती हैं। आंदर के पड़ेजी निवासी आचार्य पंडित उमाशंकर पांडेय ने बताया कि सावन का महीना 14 जुलाई यानी गुरुवार से प्रारंभ हो रहा है, जो 12 अगस्त तक रहेगा। इस बार सावन का पावन मास श्रावण और प्रीति योग में शुरू हो रहा है। बताया कि सावन के महीने में पड़ने वाले सोमवार को व्रत रखा जाता है। वहीं कुंवारी कन्याएं सावन के महीने में सोमवार के दिन व्रत रखकर भगवान भोलेनाथ से अच्छे पति को प्राप्त करने की कामना करती हैं। भगवान भोलेनाथ को सावन के महीने में प्रसन्न रखने के लिए आस्था और विश्वास के साथ विशेष पूजा अर्चना की जाती है।

सावन की तैयारी में केसरिया वस्त्र से पटा पूरा बाजार :

कोरोना संक्रमण के कारण दो साल से बंद कावर यात्रा को लेकर अभी से ही शिवभक्तों में उत्साह देखने को मिल रहा है। शिवभक़्तों के उपयोग के वस्त्र और सामान की दुकानें सजनी शुरू हो गई है। पूरा बाजार केसरिया रंग से पट गया है। श्रद्धालु अभी से ही झारखंड स्थित देवघर धाम जाने की तैयारी में जुट गए हैं। किसान जहां खेती कार्य में तन-मन से लगे हुए हैं, वहीं बाबा के भक्त गेरुआ वस्त्र व कांवर की खरीदारी में जुट गए हैं। बाजारों में चहल-पहल काफी बढ़ गई है।

शिवालयों व मंदिरों में शुरू हुई तैयारी :

जिला मुख्यालय समेत ग्रामीण क्षेत्रों में श्रावणी मेले की तैयारी शुरू हो गई है। गुठनी के सोहगरा धाम, सिसवन के मेहंदार स्थित महेंद्रानाथ धाम, मैरवा धाम स्थित हरेराम ब्रह्म धाम, जीरादेई के अकोल्ही स्थित अनंतधाम, दरौली के चकरी स्थित सिद्धगुफा धाम सहित शहर के महादेवा स्थित पंचमुखी शिव मंदिर, भावनाथ मंदिर, श्रीनगर स्थित शिव मंदिर, मखदुम सराय महावीरपुरम स्थित शिव मंदिर समेत अऩ्य सभी शिवालय व मंदिरों में तैयारी शुरू हो गई है। मंदिरों के रंगरोगन का काम जारी है।

सावन में नहीं करें ये काम :

सावन के महीने में भगवान भोलेनाथ की पूजा करने वाले श्रद्धालुओं को तेल नहीं लगाना चाहिए। इस माह में तेल और तिल का दान करने से भोलेनाथ की कृपा प्राप्त होती है। इस माह मांस, मछली, मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। शारीरिक स्वास्थ्य और उत्तम विचार के लिए मांस मदिरा के सेवन से बचना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि सावन मास में दिन में सोने से भगवान भोलेनाथ रुष्ट हो जाते हैं। इसीलिए भक्ति के इस महीने में भगवान भोलेनाथ की आराधना करनी चाहिए। ऊं नम: शिवाय मंत्र का जाप करना लाभकारी होगा।

महत्वपूर्ण दिन

पहला सावन सोमवार : 18 जुलाई

दूसरा सावन सोमवार : 25 जुलाई

तीसार सावन सोमवार : 1 अगस्त

चौथा सावन सोमवार : 08 अगस्त

सावन शिवरात्रि : 26 जुलाई

श्रावण मास का अंतिम दिन : 12 अगस्त

Edited By Jagran

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