PM Modi के ड्रीम प्रोजेक्ट के लिए मुरादाबाद में नहीं मिल रहे मनरेगा मजदूर, 95 हजार को नहीं मिली मजदूरी

PM Modi Dream Project Amrit Sarovar प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट अमृत सरोवर के लिए उत्तर प्रदेश के जनपद मुरादाबाद में मजदूर मिलना मुश्किल हो गया है। मनरेगा मजदूर अमृत सरोवर के लिए काम करने को तैयार नहीं हो रहे हैं। इसका कारण भी बड़ा है।

Samanvay PandeyPublish: Tue, 05 Jul 2022 09:05 AM (IST)Updated: Tue, 05 Jul 2022 09:05 AM (IST)
PM Modi के ड्रीम प्रोजेक्ट के लिए मुरादाबाद में नहीं मिल रहे मनरेगा मजदूर, 95 हजार को नहीं मिली मजदूरी

जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। PM Modi Dream Project Amrit Sarovar : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट अमृत सरोवर के लिए उत्तर प्रदेश के जनपद मुरादाबाद में मजदूर मिलना मुश्किल हो गया है। मनरेगा मजदूर अमृत सरोवर के लिए काम करने को तैयार नहीं हो रहे हैं। इसका कारण भी बड़ा है। दरअसल, मुरादाबाद के करीब 95 हजार मनरेगा मजदूरों को बजट के अभाव में मजदूरी नहीं मिल पा रही है। मजदूरों के खातों में अभी तक मजदूरी की धनराशि नहीं पहुंची है। पीड़ित लगातार मजदूरी दिलाने की मांग कर रहे हैं। इसकी वजह से अमृत सरोवर का मिट्टी का काम भी करने के लिए भी मजदूर मिलना मुश्किल हो रहे हैं।

भीषण गर्मी में मनरेगा के मजदूरों का बुरा हाल है। लेकिन, मजदूरी समय से नहीं मिल पा रही है। पिछले साल का कच्चे काम और सामग्री का 27 करोड़ बकाया चल रहा है। इसकी वजह से प्रधान आगे काम कराने से डर रहे हैं। इस साल एक अप्रैल से 20 जून तक 97 लाख रुपये मजदूरी का बकाया चल रहा है। दो करोड़ 47 लाख 88 हजार रुपये मेटेरियल का बकाया है। 32 लाख रुपये टैक्स के दिये जाने हैं।

मजदूरी और सामग्री का मिलाकर कुल तीन करोड़ 84 लाख 64 लाख रुपये का बकाया चल रहा है। इससे मजदूर परेशान हैं। ग्राम प्रधानों के घरों के चक्कर लगाकर मजदूरी की धनराशि दिलाने की लगातार मांग कर रहे हैं। परियोजना निदेशक, डीआरडीए सतीश प्रसाद मिश्र ने बताया कि सरकार से मजदूरों का बकाया देने के लिए बजट मांगा गया है। जल्द ही मजदूरों का भुगतान कराने की कोशिश की जा रही है।

वर्षा से पहले 20 प्रतिशत काम भी नहीं होगा पूराः मनरेगा में सामग्री और मजदूरी का पैसा नहीं मिलने पर अमृत सरोवर बनाए जाने का काम प्रभावित हो रहा है। बिना मजदूरी मिले कोई काम करने के लिए तैयार नहीं है। कई मजदूर तो पिछले साल की मजदूरी लेने के लिए अफसरों के यहां चक्कर लगा रहे हैं।

Edited By Samanvay Pandey

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