बिचड़ा तैयार, रोपनी के लिए भारी बारिश का अब इंतजार

क्षेत्र में दो-तीन दिनों से बारिश नहीं होने का असर खेती में दिख रहा है। सिचाई संसाधनों में कमी से धान की रोपनी का कार्य करने में किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। किसानों के द्वारा डाले गये धान के बिचड़े कई गांवों में तैयार हो गए हैं लेकिन खेत में पानी नहीं जमा होने से जुताई नहीं हो पा रही है। इससे रोपनी का कार्य नही शुरू हो पा रहा है ।

JagranPublish: Sun, 03 Jul 2022 10:11 PM (IST)Updated: Sun, 03 Jul 2022 10:11 PM (IST)
बिचड़ा तैयार, रोपनी के लिए भारी बारिश का अब इंतजार

संदेश (भोजपुर)। क्षेत्र में दो-तीन दिनों से बारिश नहीं होने का असर खेती में दिख रहा है। सिचाई संसाधनों में कमी से धान की रोपनी का कार्य करने में किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। किसानों के द्वारा डाले गये धान के बिचड़े कई गांवों में तैयार हो गए हैं, लेकिन खेत में पानी नहीं जमा होने से जुताई नहीं हो पा रही है। इससे रोपनी का कार्य नही शुरू हो पा रहा है ।

नहरों में पानी के आभाव में जहां किसान दिन रात विद्युत चालित मोटर पम्प एवं डीजल इंजन से खेतों को पटवन कर तैयारी में जुट गए है । वहीं, आर्थिक रूप से कमजोर किसान नहर एवं प्रकृति के आश में टकटकी लगाये बैठे हुए है कि कब सिचाई विभाग कोइलवर वितरणी के निचले छोर तक पानी देगा।

विदित हो कि भोजपुर का संदेश क्षेत्र धान का कटोरा कहा जाता था लेकिन पिछले डेढ़ दशक से प्रशासन एवं सिचाई विभाग के निष्क्रियता तथा जनप्रतिनिधियों के उपेक्षा के कारण कोइलवर वितरणी एवं कोरी लाइन में पानी का दर्शन नही हुआ है । सिचाई विभाग भी मूकदर्शक बना हुआ है । सिचाई की जर्जर स्थिति से प्रखंड कई बार सूखे की चपेट में आ गया है । कोइलवर वितरणी में विभागीय उपेक्षा के कारण डेढ़ दशक आज सफाई का कार्य नही हुआ है। जिसके कारण सिचाई के अभाव में बहुत से खेतों में जंगली घास उग आये है। क्षेत्र के किसान भोला शरण सिंह, महेश कुमार सिंह, देवेन्द कुमार सिंह, चंदेश्वर सिंह, अरुण सिंह, मनोज सिंह, आदि ने बताया कि कोइलवर राजवाहा में पूरा गाद भरकर नहर की क्षमता आधी से भी कम हो गया है । वहीं, बांध काटे जाने के कारण गांवों पर बाढ़ का भी खतरा बढ़ गया है।

Edited By Jagran

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