ULFA-I ने गणतंत्र दिवस पर बंद के आह्वान से किया परहेज, असम के मुख्यमंत्री ने संगठन के फैसले का किया स्वागत

भारत में कोरोना महामारी के चलते दिन-ब-दिन हालात बिगड़ते जा रहे हैं। ऐसी स्थिति को देखते हुए देश के गणतंत्र दिवस समारोह को कोविड प्रतिबंधों के अंतर्गत मनाया जाएगा। वहीं परेश बरुआ के नेतृत्व वाले ULFA-I ने गणतंत्र दिवस समारोह में बंद का आह्वान करने से परहेज किया है।

Ashisha RajputPublish: Mon, 24 Jan 2022 09:15 AM (IST)Updated: Mon, 24 Jan 2022 09:18 AM (IST)
ULFA-I ने गणतंत्र दिवस पर बंद के आह्वान से किया परहेज, असम के मुख्यमंत्री ने संगठन के फैसले का किया स्वागत

गुवाहाटी, आइएएनएस। भारत में कोरोना महामारी के चलते दिन-ब-दिन हालात बिगड़ते जा रहे हैं। वायरस का प्रकोप एक बार फिर अपने चरम पर पहुंच गया है। ऐसी स्थिति को देखते हुए देश के गणतंत्र दिवस समारोह को कोविड प्रतिबंधों के अंतर्गत मनाया जाएगा। वहीं परेश बरुआ के नेतृत्व वाले ULFA-I ने गणतंत्र दिवस समारोह में बंद का आह्वान करने से परहेज किया है। आपको बता दें कि ऐसा 20 वर्षों में पहली बार हुआ है। इस फैसले का असम के मुख्यमंत्री ‌हिमंता बिस्व सरमा ने खुलकर स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि इस तरह के कदम भविष्य में संगठन और सरकार के बीच एक औपचारिक चर्चा में तेजी लाएंगे।

असम के मुख्यमंत्री ने फैसले को बताया महत्वपूर्ण कदम

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा ने, परेश बरुआ के नेतृत्व वाले यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट आफ असम-इंडिपेंडेंट के गणतंत्र दिवस समारोह में हड़ताल और बहिष्कार से परहेज करने के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने संगठन के इस कदम की सराहना करते हुए उम्मीद जताई कि भविष्य में इस तरह के कदम से ULFA-I और केंद्र सरकार के बीच औपचारिक बातचीत हो सकती है।

क्या कहा मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा ने

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा ने‌ रविवार को मीडिया से की बातचीत में कहा, 'उल्फा-आई प्रमुख परेश बरुआ का निर्णय एक स्वागत योग्य कदम है। इस तरह के विश्वास-निर्माण उपायों से भविष्य में सरकार और संगठन के बीच औपचारिक चर्चा की सुविधा होगी।'

ULFA-I ने की घोषणा

ULFA-I ने शनिवार रात एक बयान में घोषणा कर बताया कि कोविड-19 महामारी की स्थिति को देखते हुए उसने इस साल के गणतंत्र दिवस समारोह का बंद या बहिष्कार करने से परहेज किया है। असमिया भाषा में तीन पन्नों के एक बयान में उग्रवादी संगठन ने विभिन्न पूर्वोत्तर राज्यों में सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम, 1958 (AFSPA) को जारी रखने और 4 और 5 दिसंबर को सुरक्षा बलों द्वारा नागालैंड में 14 लोगों की हत्या करने के लिए सरकार की आलोचना की।

असम के मुख्यमंत्री ने इस महीने की शुरुआत में उल्फा-आई से गणतंत्र दिवस पर बंद का आह्वान नहीं करने की अपील की थी और कहा था कि उन्होंने केंद्र सरकार से संगठन के साथ शांति वार्ता में तेजी लाने का अनुरोध किया है। सरमा ने मुख्यमंत्री का पद संभालने के बाद पिछले साल 10 मई को, परेश बरुआ ने शांति वार्ता के लिए आगे आने और 42 साल पुराने उग्रवाद को दूर करने का आग्रह किया था। उल्फा-आई ने अनुकूल प्रतिक्रिया दी थी और पिछले साल मई में एकतरफा युद्धविराम की घोषणा की थी और इसे अब तक तीन बार बढ़ाया था। असम के मुख्यमंत्री ने पहले कहा था कि उन्हें (केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा) उल्फा-आई के साथ प्रारंभिक वार्ता शुरू करने की पूरी जिम्मेदारी दी गई है। फिलहाल असम सरकार और उल्फा-I के बीच बैक चैनल वार्ता जारी है। 

Edited By Ashisha Rajput

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