दुश्मन को ‘घर में घुसकर मारेंगे’ आइबीजी के लड़ाके, भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा पर होगी तैनाती

Integrated Battle Group of the army इसी माह आकार ले लेगा सेना का पहला इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप जम्मू से सटी भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा पर होगी तैनाती।

Babita KashyapPublish: Wed, 13 Nov 2019 09:05 AM (IST)Updated: Wed, 13 Nov 2019 09:49 AM (IST)
दुश्मन को ‘घर में घुसकर मारेंगे’ आइबीजी के लड़ाके, भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा पर होगी तैनाती

जम्मू,  नवीन नवाज। Integrated Battle Group of the army सेना का इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप (आइबीजी) आदेश के 12 घंटे के भीतर ही दुश्मन को घर में घुसकर ढेर कर देगा। यह इसकी विशेष दक्षता में शामिल है। प्रतिरक्षा हो या आक्रमण, युद्ध जैसी किसी भी स्थिति से तुरंत निबटने में यह दस्ता हर क्षण तत्पर रहेगा। इस माह के अंत तक जम्मू से सटी अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास इसकी तैनाती होने जा रही है। जिसके बाद लद्दाख, पूर्वोतर और राजस्थान में भी चरणबद्ध तैनाती होगी। 

यह महज विशेष प्रशिक्षण प्राप्त कमांडोज का दस्ता मात्र नहीं, बल्कि पैदल सेना, टैंक, तोपखाना, वायु रक्षा, संचार और युद्धकौशल के तमाम अत्याधुनिक हथियारों से लैस पूरी यूनिट है। दुश्मन की हर चाल को विफल बनाने की हरसंभव क्षमता-योग्यता इसमें निहित है। इसीलिए इसे इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप यानी एकीकृत युद्धक समूह कहा गया है। आवश्यकता पड़ते ही तुरंत धावा बोल देना इसकी सबसे बड़ी खूबी है। यानी तैयारी या रणनीति बनाने के लिए कोई अतिरिक्त समय की इसे आवश्यकता नहीं पड़ेगी, बस आदेश मिलने की ही देर रहेगी।

लड़ाकों को दिया जा रहा है विशेष प्रशिक्षण 

सीमा से सटे हर क्षेत्र में दुश्मन के खतरे, वहां की भौगोलिक चुनौतियों और लक्ष्य (3टी- थ्रेट, टेरेन और टास्क) को ध्यान में रखकर इसके लड़ाकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। साथ ही परिस्थितियों के अनुकूल साजोसामान से भी सुसज्जित किया गया है। सूत्रों के अनुसार आइबीजी का आकार किसी भी सैन्य ब्रिगेड से बड़ा और किसी डिवीजन से थोड़ा कम होगा। इसमें शामिल अधिकारियों, जवानों की संख्या क्षेत्रीय और ऑपरेशन की आवश्यकताओं के अनुरूप तय की जाएगी। आइबीजी की कमान मेजर जनरल रैंक के एक अधिकारी के पास होगी और वह संबधित कोर के जीओसी के अधीन होगा।

ग्रुप के गठन को सैद्धांतिक मंजूरी 

अधिकारियों के अनुसार जम्मू में तैनात किए जाने वाले पहले बैटल ग्रुप को हिमाचल प्रदेश के योल स्थित सेना की सबसे युवा कोर कोर-9 के अधीन तैयार किया गया है। इस ग्रुप की ऑपरेशनल जिम्मेदारियों का प्रशिक्षण और पुष्टि हो चुकी है। इसका लक्ष्य सेना को बदलती चुनौतियों और सीमापार से बढ़ते खतरों के मुताबिक पूरी तरह समर्थ बनाया जाना है। बता दें कि इस ग्रुप के गठन को बीते साल सैद्धांतिक मंजूरी दी गई थी। इसे सेना के संगठनात्मक ढांचे में बदलाव की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। जम्मू से सटी सीमा पार पाकिस्तानी सेना ने करीब छह माह से अपने टी-80यू टैंक के साथ रेजीमेंट और अल-खालिद ब्रिगेड को तैनात रखा हुआ है। उसने यह टैंक अंतरराष्ट्रीय सीमा से करीब 50-60 किलोमीटर दूर अलर्ट पर रखे हैं। ऐसे में पाकिस्तान की साजिश के मुकाबले के लिए यह दस्ता तैयार रहेगा।

अधिकारियों के अनुसार प्रत्येक बैटल ग्रुप में लगभग छह से आठ यूनिट एकीकृत की गई हैं। प्रत्येक ग्रुप का ढांचा और उनकी दक्षता संबधित इलाके में दुश्मन की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए तय की गई है। आदेश मिलते ही यह किसी भी पल दुश्मन के इलाके में दाखिल होने के लिए भी तत्पर रहेंगे। यह लड़ाके मौजूदा स्ट्राइकिंग कोर के मुकाबले कहीं अधिक सक्रिय और तीव्र कार्रवाई करने में सक्षम होंगे।   

क्या है इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप (आइबीजी) 

आकार : किसी भी सैन्य ब्रिगेड से बड़ा और किसी डिवीजन से थोड़ा कम। पहले बैटल ग्रुप को हिमाचल प्रदेश के योल स्थित सेना की सबसे युवा कोर कोर-9 के अधीन तैयार किया गया है।

तैनाती : इसी माह के अंत तक जम्मू से सटी अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास किया जाएगा तैनात। 

विशेषता

  • आदेश के 12 घंटे के भीतर कार्रवाई कर दुश्मन के ठिकानों को ध्वस्त करने में सक्षम सेना का विशेष लड़ाकू दस्ता। 
  • युद्ध जैसी किसी भी स्थिति से निपटने, प्रतिरक्षा अथवा आक्रमण के लिए हर क्षण तत्पर।
  • 3टी यानी थ्रेट (कैसी भी चुनौती) टेरेन (कैसे भी भौगोलिक क्षेत्र में) और टास्क (काम को अंजाम देना) की विशेष क्षमता।
  •  बेमिसाल युद्ध कौशल, पैदल सेना, टैंक, तोपखाना, वायु रक्षा समेत युद्ध और संचार की अत्याधुनिक क्षमताओं से लैस।

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Edited By Babita kashyap

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