विदेशी अंशदान नियमन कानून मामले में सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट, केंद्र के फैसले को रद करने की लगाई गई है गुहार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि वह उस याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करेगा जिसमें केंद्र के उस फैसले को रद करने की मांग की गई है जिसके तहत 5789 संगठनों ने अपना विदेशी अंशदान नियमन कानून (FCRA) पंजीकरण खो दिया था।

Krishna Bihari SinghPublish: Mon, 24 Jan 2022 06:26 PM (IST)Updated: Mon, 24 Jan 2022 07:41 PM (IST)
विदेशी अंशदान नियमन कानून मामले में सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट, केंद्र के फैसले को रद करने की लगाई गई है गुहार

नई दिल्ली, पीटीआइ। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सोमवार को कहा कि वह उस याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करेगा जिसमें केंद्र (Union Govt) के उस फैसले को रद करने की मांग की गई है जिसके तहत 5,789 संगठनों ने अपना विदेशी अंशदान नियमन कानून (Foreign Contribution Regulation Act, FCRA) पंजीकरण खो दिया था। विदेशी चंदा प्राप्त करने के लिए किसी भी एसोसिएशन और एनजीओ के लिए एफसीआरए पंजीकरण अनिवार्य होता है।

अमेरिका स्थित एनजीओ 'ग्लोबल पीस इनिशिएटिव' (Global Peace Initiative) द्वारा दायर याचिका, जस्टिस एएम खानविलकर (Justices AM Khanwilkar) और जस्टिस सीटी रविकुमार (CT Ravikumar) की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आई। पीठ ने कहा कि मामले की सुनवाई मंगलवार को होगी। देश में 31 दिसंबर, 2021 तक 22,762 एफसीआए पंजीकृत संगठन थे। इस कानून के कारण पहली जनवरी को यह संख्या घटकर 16,829 रह गई।

अधिकारियों ने कहा था कि 18,778 संगठनों के एफसीआरए लाइसेंस 29 सितंबर, 2020 ले लेकर और 31 दिसंबर, 2021 के बीच समाप्त हो रहे थे। उनमें से 12,989 संगठनों ने 30 सितंबर, 2020 से 31 दिसंबर, 2021 के बीच एफसीआरए लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए आवेदन किया है। चूंकि 5,789 संगठनों ने एफसीआरए लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए आवेदन नहीं किया, इसलिए उन्हें पंजीकृत संगठन नहीं माना गया। इसके अलावा 179 अन्य संगठनों का पंजीकरण अन्य कारणों से रद कर दिया गया।

मलयालम अभिनेता दुष्‍कर्म मामले में केरल की याचिका खारिज

वहीं दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने एक महिला के साथ दुष्‍कर्म मामले के मुख्य साजिशकर्ता मलयालम फिल्म अभिनेता दिलीप के मामले की जांच की समय सीमा बढ़ाए जाने की केरल सरकार की याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति एएम खानविलकर (Justices AM Khanwilkar) और न्यायमूर्ति सीटी रविकुमार (CT Ravikumar) ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि ऐसी गुजारिश केवल मामले की सुनवाई कर रही अदालत कर सकती है। 

Edited By Krishna Bihari Singh

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