सुप्रीम कोर्ट ने सिविल सेवा परीक्षा 2020 की अंतिम चयन सूची को रद करने से किया इन्कार, जानें क्‍या कहा

सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को जस्टिस एल. नागेश्वर राव और जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने नीतीश शंकर की उस याचिका पर सुनवाई करने से इन्कार कर दिया जिसमें संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा 2020 की अंतिम चयन सूची को रद करने की मांग की गई थी।

Krishna Bihari SinghPublish: Fri, 21 Jan 2022 07:21 PM (IST)Updated: Fri, 21 Jan 2022 07:53 PM (IST)
सुप्रीम कोर्ट ने सिविल सेवा परीक्षा 2020 की अंतिम चयन सूची को रद करने से किया इन्कार, जानें क्‍या कहा

नई दिल्ली, एएनआइ। सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को जस्टिस एल. नागेश्वर राव और जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने नीतीश शंकर की उस याचिका पर सुनवाई करने से इन्कार कर दिया जिसमें संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा, 2020 की अंतिम चयन सूची को रद करने की मांग की गई थी। याचिका में कहा गया था कि इसमें आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा का उल्लंघन किया गया है।

जजों के प्रशिक्षण पर एनजेए को सुझाव सौंपने की अनुमति दी

जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस दिनेश महेश्वरी की पीठ ने शुक्रवार को एक पूर्व न्यायिक अधिकारी को जजों के प्रशिक्षण पर अपने सुझाव नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी (एनजेए) को विचार के लिए सौंपने की अनुमति प्रदान कर दी। पीठ ने कहा ये ऐसे मामले नहीं हैं जिन पर न्यायिक तौर पर बहस हो सकती है, बल्कि इन चीजों पर विशेषज्ञों को ध्यान देना चाहिए।

बंद कमरे में सुनवाई की तेजपाल की मांग पर सोमवार को सुनवाई

तहलका पत्रिका के पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल की याचिका पर सुनवाई से शुक्रवार को जस्टिस एल. नागेश्वर राव ने खुद को अलग कर लिया। तेजपाल ने इस याचिका में बांबे हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी जिसमें उसने 2013 के यौन हमला मामले की बंद कमरे में सुनवाई की मांग को ठुकरा दिया था। जस्टिस राव की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह कहते हुए दूसरी पीठ के समक्ष सुनवाई सोमवार तक टाल दी कि वह इस मामले में 2015 में गोवा की ओर से वकील के तौर पर पेश हो चुके हैं।

आरटीआइ एक्ट के प्रविधान लागू करने की मांग पर केंद्र को नोटिस

जस्टिस एसके कौल और जस्टिस एमएम सुंद्रेश की पीठ ने शुक्रवार को किशन चंद्र जैन की याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया। याचिका में सूचना का अधिकार (आरटीआइ) अधिनियम के उस प्रविधान को प्रभावी तरीके से लागू करने की मांग की गई है जिसमें अधिकारियों के लिए उनके कामकाज के संबंध में अहम जानकारियां स्वत: उजागर करना अनिवार्य है। याचिका में इस प्रविधान को कानून का आत्मा बताया गया है।  

Edited By Krishna Bihari Singh

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